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हनुमंत उपासना: आज है हनुमान जन्मोत्सव

विशेष पूजा करके पाएं बजरंग बली का आशीर्वाद
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हिंदू धर्म में हनुमान जन्मोत्सव का पर्व बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन भक्तजन अपने आराध्य देव हनुमानजी के लिए उपवास भी रखते हैं। पवनपुत्र हनुमान को भगवान शिव का 11वां अवतार माना जाता है।

हनुमानजी का जन्म चैत्र मास की शुक्ल पूर्णिमा के दिन हुआ था। भक्तों का मंगल करने के लिए प्रभु श्रीराम के भक्त हनुमानजी धरती पर अवतरित हुए थे। इस बार यह तिथि 27 अप्रैल दिन मंगलवार को है। हनुमान जयंती के दिन बजरंगबली की पूजा पाठ करने से शत्रु पर विजय और हर मनोकामना पूरी होती है।

स तरह मनाएं हनुमान जन्मोत्सव
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हनुमान जन्मोत्सव के दिन उपवास रखने वाले एक दिन ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए, साथ ही कुछ नियमों का पालन करना पड़ता है। इस दिन भक्तजन मंदिरों में अपने आराध्य देव के दर्शन करने और उनका आशीष लेने जाते हैं। शास्त्रों के अनुसार, हनुमानजी बाल ब्रह्मचारी थे इसलिए इन्हें जनेऊ भी पहनाया जाता है और इनकी मूर्तियों पर सिंदूर और चांदी का वर्क भी चढ़ाते हैं।

कहा जाता है राम की लंबी उम्र के लिए हनुमानजी अपने शरीर पर सिंदूर लगा लिया था और इसी कारण उन्हें भक्तों का सिंदूर चढ़ाना बहुत अच्छा लगता है।

संध्या के समय दक्षिण मुखी हनुमान मूर्ति के सामने शुद्ध होकर हनुमानजी के चमत्कारी मंत्रों का भी जाप किया जाए तो यह बहुत फलदाई होता है। हनुमान जयंती पर हनुमान चालिसा और रामचरितमानस के सुंदरकाण्ड पाठ को पढ़ना भी हनुमानजी को प्रसन्न करता है।

धरती पर सशरीर हैं बजरंगबली
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राम नाम की महिमा का वर्णन और उनके काम के लिए हनुमानजी आज भी पृथ्वी पर सशरीर विराजमान हैं, इस बात का प्रमाण महाभारत में मिलता है। हनुमानजी कलियुग के अंत तक धर्म की रक्षा के लिए पृथ्वी पर रहेंगे।

बजरंगबली चिरायु हैं, भगवान राम ने इन्हें वरदान दिया है। कहते हैं धरती पर जहां भी रामकथा का आयोजन होता है, वहां हनुमानजी किसी ना किसी रूप में मौजूद होते हैं इसलिए रामजी की पूजा में हनुमान जी की पूजा जरूर होती है।

हनुमानजी की जन्म कथा
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समुद्रमंथन के बाद भगवान शिव ने भगवान विष्णु का मोहिनी रूप देखने की इच्छा प्रकट की थी। जो उन्होने समुद्र मंथन के दौरान देवताओं और असुरों को दिखाया था।

उनकी इच्छा का पालन करते हुए भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण कर लिया। भगवान विष्णु का आकर्षक रूप देखकर शिवजी कामातुर हो गए और उन्होंने अपना वीर्यपात कर दिया।

पवनदेव ने शिवजी के वीर्य को वानर राजा केसरी की पत्नी अंजना के गर्भ में प्रविष्ट कर दिया। इस तरह अंजना के गर्भ से वानर रूप हनुमान का जन्म हुआ। उन्हें शिव का 11वां रुद्र अवतार माना जाता है।

कैसे करें हनुमान जी की पूजा
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अभिजित मुहूर्त में हनुमान जी की पूजा करना अत्यंत शुभ है।
उत्तर-पूर्व दिशा में चौकी पर लाल कपड़ा रखें।
हनुमान जी के साथ श्री राम जी के चित्र की स्थापना करें।
हनुमान जी को लाल और राम जी कको पीले फूल अर्पित करें।
लड्डुओं के साथ-साथ तुलसी दल भी अर्पित करें।
पहले श्री राम के मंत्र ‘राम रामाय नमः’ का जाप करें।
फिर हनुमान जी के मंत्र ‘ॐ हं हनुमते नमः’ का जाप करें।

कर्जों से मुक्ति पाने के लिए करें ये उपाय
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हनुमान जी के सामने चमेली के तेल का दीपक जलाएं।
हनुमान जी को गुड़ का भोग लगाएं।
इसके बाद हनुमान चालीसा का 11 बार पाठ करें।
संभव हो तो इस दिन मीठी चीजों का दान भी करें।

चैत्र पूर्णिमा, (27अप्रैल 2021) के दिन भगवान श्री हनुमान जी ने माता अंजना के गर्भ द्वारा जन्म लिया था, अतः हनुमान जयंती के अवसर पर भगवान हनुमान जी को प्रसन्न करने हेतु कुछ महामंत्र तथा उनकी संक्षिप्त रूप से पूजा विधि प्रस्तुत की जा रही है ।

हनुमान की पूजा विधि:-
1. चैत्र पूर्णिमा के दिन स्नान आदि से निवृत्त होने के बाद पूजा स्थान पर दक्षिण की दिशा में मुख करके बैठ जाएं।

2. तत्पश्चात हनुमान जी के चित्र को एक चौकी पर स्थापित कर दें।

3. अब उनका जल तथा पंचामृत से अभिषेक करें। अब लाल पुष्प या लाल गुलाब, सिंदूर, चमेली का तेल, अक्षत्, धूप, गंध, दीप आदि उनको अर्पित करें।

4. इस प्रकार पंचोपचार अथवा दसोपचार पूजन इसके बाद चने और गुड़ का भोग लगाएं।

5. भगवान को लाल लंगोट जरूर चढ़ाएं, यह भगवान को अत्यंत प्रिय है ।

6. हनुमान चालीसा, सुंदरकांड, श्रीराम स्तुति का पाठ किया जा सकता है।

7. तत्पश्चात निम्नलिखित महामंत्रो मे से किसी भी एक मंत्र का एकाग्र मन से, मूंगे की माला द्वारा क्रमशः सात, चालीस अथवा सौ माला की संख्या मे जाप करने से समस्त मनोकामनाओ की पूर्ति, सुख और सौभाग्य की प्राप्ति, शत्रुओं की पराजय तथा बंधन से मुक्ति प्राप्त होती हैं ।

8. अंत में हनुमान की आरती करें और प्रणाम कर अपनी मनोकामनाएं उनके समक्ष व्यक्त कर दें।

 

श्री हनुमान महामंत्र:-

मंत्र-1

अतुलितबलधामं नमामि हेमशैलाभदेहं नमामि । दनुजवनकृशानुं नमामिज्ञानिनामग्रगण्यम् नमामि ।सकलगुणनिधानं नमामि वानराणामधीशं नमामि । रघुपतिप्रियभक्तं नमामि वातजातं नमामि ।

मंत्र – 2
ओम नमो हनुमते रुद्रावताराय विश्वरूपाय अमित विक्रमाय प्रकटपराक्रमाय महाबलाय सूर्य कोटिसमप्रभाय रामदूताय स्वाहा।

मंत्र – 3
ओम नमो हनुमते रुद्रावताराय सर्वशत्रुसहांरणाय सर्वरोगाय सर्ववशीकरणाय रामदूताय स्वाहा।

मंत्र – 4
ओम नमो हनुमते रुद्रावतराय वज्रदेहाय वज्रनखाय वज्रसुखाय वज्ररोम्णे वज्रनेत्राय वज्रदंताय वज्रकराय वज्रभक्ताय रामदूताय स्वाहा ।

 

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