Sourav Ganguly का बड़ा ऐलान: टीम इंडिया के कोच बनने को तैयार, राजनीति से साफ इनकार, गंभीर की कोचिंग पर भी दी प्रतिक्रिया”
पूर्व भारतीय कप्तान और बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष Sourav Ganguly ने एक साक्षात्कार में बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि वह भारतीय टीम के कोच बनने के लिए तैयार हैं, अगर उन्हें मौका दिया जाए। यह बयान भारतीय क्रिकेट के प्रशंसकों में नई उम्मीदें जगा रहा है। वहीं, उन्होंने राजनीति में जाने की अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया है।
🗣️गांगुली बोले- “कोच बनने को तैयार हूं, देखना होगा भविष्य क्या लाता है”
पूर्व कप्तान गांगुली ने कहा, “मैंने क्रिकेट में कई भूमिकाएं निभाईं हैं। बंगाल क्रिकेट संघ (CAB) का अध्यक्ष बना, फिर बीसीसीआई का अध्यक्ष। मुझे हमेशा व्यस्तता रही, लेकिन अब अगर मौका मिला तो मैं जरूर टीम इंडिया का कोच बनने के लिए तैयार हूं।”
गांगुली ने यह भी स्पष्ट किया कि अभी वो 50 वर्ष के हैं और कोचिंग जैसी जिम्मेदारी को निभाने के लिए पर्याप्त अनुभव और जोश रखते हैं।
🏏गांगुली ने की गंभीर की तारीफ, कहा – अच्छा कर रहे हैं काम
गांगुली ने मौजूदा कोच गौतम गंभीर के काम की सराहना करते हुए कहा, “गौतम अच्छा काम कर रहे हैं। शुरुआत थोड़ी धीमी रही, लेकिन बाद में उन्होंने जबरदस्त वापसी की। चैंपियंस ट्रॉफी में उनका प्रदर्शन काबिले तारीफ रहा। अब इंग्लैंड जैसी कठिन सीरीज में भी वो खुद को साबित कर सकते हैं।”
यह बयान तब आया है जब भारत और इंग्लैंड के बीच 5 टेस्ट मैचों की महत्वपूर्ण सीरीज खेली जा रही है, जिसका पहला मुकाबला लीड्स के हेडिंग्ले मैदान पर हो रहा है।
💥गांगुली का चमकदार क्रिकेट करियर, हर युवा के लिए प्रेरणा
सौरव गांगुली का क्रिकेट करियर 16 वर्षों तक चला और उन्होंने कई यादगार पल दिए।
उन्होंने 1992 में वेस्टइंडीज के खिलाफ अपना पहला वनडे मैच खेला था। 1996 में इंग्लैंड के लॉर्ड्स मैदान पर अपने टेस्ट करियर की शुरुआत करते हुए 131 रन की ऐतिहासिक पारी खेली, जिसने उन्हें रातों-रात स्टार बना दिया।
उनकी उपलब्धियां:
113 टेस्ट मैचों में बनाए 7,212 रन
311 वनडे में बनाए 11,363 रन
टेस्ट में 16 शतक और वनडे में 22 शतक
वनडे में सर्वोच्च स्कोर: 183 रन (श्रीलंका के खिलाफ, 1999 वर्ल्ड कप)
👑2000 में कप्तानी का भार संभालते हुए भारत को नई दिशा दी
साल 2000 में जब भारतीय क्रिकेट विवादों से घिरा हुआ था, उस समय गांगुली ने कप्तानी संभाली और टीम को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उन्होंने भारत को विदेशों में कई टेस्ट जीत दिलाई।
2002 में लॉर्ड्स में नेटवेस्ट ट्रॉफी की जीत और 2003 में वर्ल्ड कप फाइनल तक का सफर, गांगुली की कप्तानी में संभव हुआ।
🔚2008 में क्रिकेट को कहा अलविदा, लेकिन क्रिकेट से नाता नहीं टूटा
2008 में सौरव गांगुली ने इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास लिया, लेकिन उनका सफर यहीं नहीं रुका। वो लगातार अलग-अलग भूमिकाओं में भारतीय क्रिकेट से जुड़े रहे।
🚨बीसीसीआई और आईसीसी में निभाई अहम भूमिकाएं
2015 से 2019 तक बंगाल क्रिकेट संघ (CAB) के अध्यक्ष
2019 से 2022 तक BCCI के 35वें अध्यक्ष
2021 में बने ICC मेंस क्रिकेट कमेटी के चेयरमैन (अनिल कुंबले की जगह)
इन सभी भूमिकाओं में गांगुली ने क्रिकेट की नीतियों को नया आकार दिया और खिलाड़ियों के हितों के लिए मजबूत आवाज उठाई।

