उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure) की चमत्कारी होम्योपैथिक दवाएं: बिना साइड इफेक्ट करें ब्लड प्रेशर कंट्रोल
Dr. Ved Prakash
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मान लीजिए किसी व्यक्ति की उम्र 50 वर्ष है।
👉 50 में से 20 घटाएं: शेष = 30
👉 30 का आधा करें: शेष = 15
👉 इस 15 में 120 जोड़ें: कुल = 135
इस प्रकार, 50 वर्ष के व्यक्ति का सामान्य संकोचन रक्तचाप (Systolic BP) लगभग 135 mmHg होना चाहिए।
हाई ब्लड प्रेशर के लक्षण: इन संकेतों को न करें नजरअंदाज
उच्च रक्तचाप के लक्षण अक्सर आम समस्याओं जैसे लग सकते हैं, लेकिन यदि ये बार-बार होते हैं, तो सतर्क हो जाना चाहिए:
नींद न आना या बार-बार झपकियां आना
माथे या सिर की गुद्दी में लगातार दर्द
सिर भारी लगना और चक्कर आना
काम में अरुचि और थकावट महसूस होना
चिड़चिड़ापन और दिल बैठने जैसा अहसास
सांस फूलना, नकसीर आना, छाती में दर्द
अंगों का सुन्न हो जाना या उनमें सरसराहट
लगातार सिरदर्द या हृदय में असहजता
बिना साइड इफेक्ट होम्योपैथिक दवाएं: उच्च रक्तचाप पर असरदार नियंत्रण
अब जानिए उन प्रमुख होम्योपैथिक दवाओं के बारे में जो हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में आश्चर्यजनक रूप से कारगर मानी गई हैं:
बेराइटा म्यूर 6X
(Baryta Mur 6X)
जब रक्तचाप किसी भी कारण से बढ़ा हो, यह दवा सबसे पहले दी जा सकती है।
विशेष रूप से वृद्ध पुरुषों के लिए यह बेहद प्रभावी है, जिन्हें बिस्तर पर लेटने पर सिर दर्द होता है।
यदि सिस्टोलिक प्रेशर (ऊपरी) ऊंचा हो और डायस्टोलिक (निचला) सामान्य या कम हो, तो यह औषधि चमत्कारी साबित होती है।
शक्ति: 6X से 30 तक कोई भी
लेकेसिस 1M
(Lachesis 1M)
जिन रोगियों को नींद लेने के बाद तकलीफ बढ़ जाती है, उनके लिए यह औषधि मुख्य है।
रोगी को सोने से डर लगता है, क्योंकि नींद के बाद स्थिति और बिगड़ती है।
टाइट कपड़े, गले में टाई या कमर पर कसी बेल्ट बर्दाश्त नहीं कर पाते।
ऐसे लक्षण वाले मरीजों में Lachesis अत्यंत उपयोगी है।
ऑरम म्यूरियेटिकम नेट्रोनेटम 2X, 3X और ऑरम मेट 30
(Aurum Muriaticum Natronatum 2X/3X, Aurum Met 30)
यदि ब्लड प्रेशर का कारण नर्वस सिस्टम की उत्तेजना है, तो यह औषधियां बहुत लाभदायक हैं।
थोड़ी चढ़ाई या परिश्रम पर छाती में भारीपन, फटने जैसा दर्द—ऐसे लक्षणों में विशेष उपयोगी।
Aurum Met 30 विशेष रूप से गहन मानसिक तनाव या डिप्रेशन वाले मरीजों में कारगर रहती है।
ग्लोनॉयन 30
(Glonoinum 30)
पूरे शरीर में नाड़ी की धड़कन महसूस होना, विशेषकर उंगलियों के सिरों तक।
सिर में खून चढ़ने जैसा अहसास, सूर्य की गर्मी से सिरदर्द होना।
सीधा बैठने पर चक्कर आना, सिर की धमनियों का फूल जाना—इन लक्षणों में अत्यंत प्रभावी।
यह औषधि अचानक बढ़े रक्तचाप के लिए ‘रैपिड रिलीफ’ का काम करती है।
होम्योपैथी और जीवनशैली: दोनों का मेल है ज़रूरी
केवल दवाएं लेना ही पर्याप्त नहीं है। अगर आप हाई बीपी से स्थायी रूप से राहत चाहते हैं तो आपको अपने जीवनशैली में भी बदलाव करने होंगे:
नमक का सेवन सीमित करें
तेज मिर्च-मसाले और तली चीज़ें कम करें
योग, प्राणायाम और ध्यान को दिनचर्या में शामिल करें
रोज़ाना कम से कम 30 मिनट तेज़ चाल से टहलें
धूम्रपान और शराब से दूरी बनाएं
पर्याप्त नींद और तनाव प्रबंधन को प्राथमिकता दें
क्या होम्योपैथिक इलाज सुरक्षित है? जानिए विशेषज्ञों की राय
होम्योपैथिक उपचार लंबे समय तक चलने वाला लेकिन बेहद सुरक्षित तरीका है। इसमें शरीर को संपूर्ण रूप से ठीक करने पर जोर दिया जाता है, जिससे न केवल लक्षण बल्कि रोग की जड़ पर वार होता है। हालांकि, किसी भी दवा को शुरू करने से पहले किसी अनुभवी होम्योपैथिक चिकित्सक से परामर्श ज़रूर करें।
क्या करें जब ब्लड प्रेशर अचानक बढ़ जाए?
तुरंत Glonoinum 30 की 3-4 बूंदें जीभ पर डालें
सिर और पैरों पर ठंडी पट्टियां रखें
नमक और चाय-कॉफी से तत्काल परहेज करें
गहरी सांसें लें और शरीर को शांत रखें
ब्लड प्रेशर को हल्के में न लें, समय रहते करें इलाज
उच्च रक्तचाप को ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है, क्योंकि यह बिना किसी चेतावनी के दिल, किडनी और दिमाग पर घातक असर डाल सकता है। समय रहते इसकी पहचान और इलाज बेहद जरूरी है।

