Canada में सड़क हादसे में पंजाब के युवक की मौत: मनिंदर सिंह की अंतिम यात्रा बनी परिवार का दर्दनाक सपना
लुधियाना, पंजाब – लुधियाना के एक साधारण जमींदार परिवार में जन्मा मनिंदर सिंह, जो अपनी मेहनत और संघर्ष के बलबूते Canada तक पहुंचा था, अब सिर्फ यादों में रह गया है। एडमोंटन शहर में एक दर्दनाक सड़क हादसे में मनिंदर की मौत हो गई, जिसने पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ा दी है।
यह हादसा उस वक्त हुआ जब एक अनियंत्रित ट्रक ड्राइवर ने अपनी गाड़ी अचानक हाईवे पर उतार दी, जिससे मनिंदर सिंह का ट्राला जोरदार टक्कर में चकनाचूर हो गया।
सुबह 4.30 बजे घर तक पहुँची मनहूस खबर
इस हृदयविदारक खबर की पुष्टि गांव के सरपंच रघबीर सिंह ने मनिंदर के परिवार को सुबह करीब 4.30 बजे दी।
मनिंदर के पिता कुलदीप सिंह और भाई जतिंदर सिंह का रो-रोकर बुरा हाल है। उन्होंने बताया कि कनाडा में मौजूद एक रिश्तेदार ने फोन कर बताया कि यह हादसा कल दोपहर 12 बजे हुआ था, जब मनिंदर सिंह का ट्राला एक तेज रफ्तार ट्रक से टकरा गया।
हादसे में ट्राले का अगला हिस्सा पूरी तरह टूट गया और मनिंदर को सिर व शरीर में गंभीर अंदरूनी चोटें आईं। उन्हें तुरंत कैलगरी के अस्पताल में ले जाया गया, जहां उनकी मौत की पुष्टि हुई।
7 घंटे रुका ट्रैफिक, एडमोंटन पुलिस कर रही जांच
एडमोंटन पुलिस ने हादसे की गंभीरता को देखते हुए सात घंटे तक ट्रैफिक रोक दिया।
हादसे के बाद कनाडा पुलिस और मेडिकल टीमें मौके पर पहुंचीं। मनिंदर का शव कैलगरी अस्पताल में रखा गया है, जहां दो दिनों तक मेडिकल जांच और फॉरेंसिक प्रक्रिया चलेगी। उसके बाद ही शव को भारत भेजने की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी।
2019 में छोड़ा भारत, कनाडा में मेहनत से बनाई पहचान
मनिंदर सिंह 2019 में कनाडा गया था। उसने शुरुआती दिन काफी संघर्ष में गुजारे, लेकिन अपनी लगन, ईमानदारी और मिलनसार स्वभाव से वहां एक ट्रक ड्राइवर के तौर पर अच्छी पहचान बना ली थी। अपने व्यवहार और मददगार रवैये के कारण वह न सिर्फ एडमोंटन के पंजाबी समुदाय, बल्कि पूरे गांव में एक प्यारा चेहरा था।
गांव के लोग बताते हैं कि मनिंदर कभी किसी की मदद से पीछे नहीं हटता था। उसकी सफलता को देखकर कई अन्य नौजवान भी विदेश जाकर कुछ करने की प्रेरणा लेते थे। लेकिन यह दर्दनाक अंत सभी को अंदर तक झकझोर गया है।
गांव में पसरा मातम, स्कूलों में रही शोक सभा
मनिंदर सिंह की मौत की खबर से पूरा गांव गमगीन है। स्कूलों में शोक सभा रखी गई, जहां बच्चों और शिक्षकों ने दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी। गांव की गलियों में सन्नाटा पसरा है और हर किसी की आंखें नम हैं।
गांव के बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक ने एक ही बात कही – “ऐसे मेहनती बेटे को यूं खोना किसी दुःस्वप्न से कम नहीं।”
सरकार से उठी मांग: शव भारत लाया जाए, परिवार को मिले सहायता
गांव के लोगों ने केंद्र और पंजाब सरकार से अपील की है कि मनिंदर का शव जल्द भारत लाया जाए, ताकि उसके परिजन उसका अंतिम संस्कार अपने गांव में कर सकें।
इसके साथ ही गांववासियों और स्थानीय नेताओं ने यह भी मांग रखी है कि मनिंदर के परिवार को आर्थिक सहायता और सरकारी मदद दी जाए, क्योंकि यह एक साधारण किसान परिवार है, जो पहले ही सीमित संसाधनों में जीवन बिता रहा है।
गांव में पहुंचे प्रशासनिक अधिकारी, परिवार को दिया भरोसा
घटना की सूचना मिलते ही लुधियाना जिले के तहसीलदार और प्रशासनिक अधिकारी गांव पहुंचे और परिवार को आश्वासन दिया कि वे विदेश मंत्रालय के जरिए शव भारत लाने में हर संभव मदद करेंगे।
सरपंच रघबीर सिंह ने बताया कि वे खुद भी विदेश मंत्रालय और NRI विभाग से संपर्क में हैं।
मनिंदर के सपनों पर लगा विराम, लेकिन उसकी कहानी बनी प्रेरणा
मनिंदर सिंह की कहानी उन हजारों युवाओं की तरह है जो बेहतर भविष्य की तलाश में विदेश जाते हैं। लेकिन यह हादसा एक सच्चाई भी उजागर करता है – विदेश की ज़िंदगी में संघर्ष और खतरे दोनों होते हैं।
मनिंदर ने अपने जीवन में ईमानदारी, मेहनत और कड़ी लगन का परिचय दिया।
गांव के युवाओं के लिए वह एक प्रेरणा थे और रहेंगे।

