अमेरिका की San Diego मस्जिद में खूनी हमला, गोलीबारी में 5 की मौत; हेट क्राइम एंगल से जांच तेज
अमेरिका के San Diego में सोमवार को हुई भीषण गोलीबारी ने पूरे देश को झकझोर दिया। सैन डिएगो स्थित एक मस्जिद परिसर में हुई फायरिंग में कुल 5 लोगों की मौत हो गई, जिनमें एक सिक्योरिटी गार्ड और दो संदिग्ध हमलावर शामिल बताए जा रहे हैं। पुलिस के अनुसार हमलावर किशोर उम्र के थे और शुरुआती जांच में इसे संभावित हेट क्राइम के तौर पर देखा जा रहा है।
यह हमला Islamic Center of San Diego में हुआ, जिसे सैन डिएगो काउंटी की सबसे बड़ी मस्जिदों में गिना जाता है। घटना के बाद पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया और मस्जिद परिसर को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया।
मस्जिद परिसर में मचा हड़कंप, मौके पर पहुंचे सुरक्षा बल
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक गोली चलने की आवाज सुनते ही मस्जिद परिसर में अफरा-तफरी मच गई। लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। कुछ ही देर में पुलिस और इमरजेंसी सेवाओं की टीमें मौके पर पहुंच गईं।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि गोलीबारी में एक सिक्योरिटी गार्ड की मौत हुई है, जबकि दो संदिग्धों के शव मस्जिद के पास खड़े एक वाहन में मिले।
प्रारंभिक जांच में यह माना जा रहा है कि दोनों संदिग्धों ने खुद को गोली मारी। हालांकि पुलिस ने कहा है कि मामले की विस्तृत जांच अभी जारी है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है।
17 और 19 साल के बताए जा रहे संदिग्ध
पुलिस के मुताबिक मृत संदिग्धों में एक की उम्र 17 साल और दूसरे की 19 साल थी। अधिकारियों ने फिलहाल उनकी पहचान सार्वजनिक नहीं की है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि दोनों हमलावरों का मकसद क्या था और क्या उन्होंने पहले से इस हमले की योजना बनाई थी।
एफबीआई और स्थानीय जांच एजेंसियां सोशल मीडिया गतिविधियों, संपर्कों और संभावित कट्टरपंथी या नफरत से जुड़े एंगल की भी जांच कर रही हैं।
हेट क्राइम एंगल से जांच तेज
अमेरिकी अधिकारियों ने इस घटना को बेहद गंभीर मानते हुए हेट क्राइम की संभावना से इनकार नहीं किया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि धार्मिक स्थलों पर हमले अमेरिका में लगातार चिंता का विषय बने हुए हैं। हाल के वर्षों में मस्जिदों, चर्चों और यहूदी उपासना स्थलों पर कई हिंसक घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
हालांकि पुलिस ने अभी तक हमले के पीछे की स्पष्ट वजह साझा नहीं की है, लेकिन जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या हमला किसी धार्मिक नफरत से प्रेरित था।
मस्जिद में गैर-मुस्लिमों का दौरा चल रहा था
मस्जिद के इमाम Taha Hassane ने बताया कि घटना के समय मस्जिद में गैर-मुस्लिम लोगों का एक दौरा कार्यक्रम चल रहा था।
उन्होंने कहा कि इस्लामिक सेंटर विभिन्न समुदायों के बीच संवाद और आपसी समझ बढ़ाने का काम करता है। इसी उद्देश्य से गैर-मुस्लिम लोगों को मस्जिद में आमंत्रित किया गया था ताकि वे इस्लाम और मुस्लिम संस्कृति को बेहतर तरीके से समझ सकें।
इमाम ने बताया कि स्कूल के सभी शिक्षक और छात्र सुरक्षित हैं और फिलहाल किसी अतिरिक्त खतरे की जानकारी नहीं है।
मस्जिद परिसर में चलता है स्कूल भी
Islamic Center of San Diego केवल धार्मिक गतिविधियों का केंद्र नहीं है, बल्कि यहां एक स्कूल भी संचालित होता है।
इस स्कूल में बच्चों को अरबी भाषा, इस्लामिक स्टडीज और कुरान की शिक्षा दी जाती है। मस्जिद प्रशासन के अनुसार यह केंद्र सामाजिक और सामुदायिक गतिविधियों में भी सक्रिय भूमिका निभाता है।
घटना के बाद सुरक्षा कारणों से पूरे परिसर को बंद कर दिया गया और लोगों से मस्जिद से दूर रहने की अपील की गई।
कैलिफोर्निया के गवर्नर बोले- मुस्लिम समुदाय अकेला नहीं
Gavin Newsom ने घटना पर गहरा दुख जताते हुए कहा कि कैलिफोर्निया मुस्लिम समुदाय के साथ मजबूती से खड़ा है।
उन्होंने कहा—
“जहां परिवार, बच्चे और लोग शांति से इबादत करने आते हैं, वहां ऐसा हमला बेहद भयावह और अस्वीकार्य है। कैलिफोर्निया में नफरत के लिए कोई जगह नहीं है।”
गवर्नर ने बताया कि कैलिफोर्निया हाईवे पेट्रोल और गवर्नर ऑफिस ऑफ इमरजेंसी सर्विसेज की टीमें स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर हालात पर नजर बनाए हुए हैं।
अमेरिका में बढ़ती गोलीबारी की घटनाओं से चिंता
अमेरिका में हाल के वर्षों में गोलीबारी की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। स्कूल, धार्मिक स्थल, सार्वजनिक कार्यक्रम और बाजार जैसी जगहें भी अब सुरक्षित नहीं मानी जा रही हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका का गन कल्चर और हथियारों की आसान उपलब्धता इन घटनाओं के पीछे बड़ा कारण माना जाता है।
हाल के महीनों में अमेरिका में कई बड़ी गोलीबारी की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनमें बच्चों और आम नागरिकों की मौत हुई है।
अमेरिका में बंदूक संस्कृति पर फिर उठे सवाल
अमेरिका में हथियार रखने का अधिकार संविधान के दूसरे संशोधन के तहत दिया गया है। 1791 में बने इस कानून के तहत नागरिकों को हथियार खरीदने और रखने की स्वतंत्रता मिली थी।
हालांकि समय के साथ अमेरिका में गन कल्चर को लेकर विवाद भी बढ़ता गया है। आलोचकों का कहना है कि आसान हथियार उपलब्धता के कारण हिंसक घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका में कई राज्यों में बंदूक खरीदना बेहद आसान माना जाता है, जिसके चलते अक्सर मानसिक रूप से अस्थिर या हिंसक प्रवृत्ति वाले लोग भी हथियार हासिल कर लेते हैं।
धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता
सैन डिएगो मस्जिद में हुई घटना के बाद धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि विभिन्न समुदायों के पूजा स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना अब बेहद जरूरी हो गया है। कई धार्मिक संगठनों ने सरकार से अतिरिक्त सुरक्षा और निगरानी की मांग की है।

