नहीं होगी पालिका की बोर्ड बैठक
पालिका की बोर्ड बैठक गई भविष्य के गर्भ में
29 को नहीं होगी पालिका की बोर्ड बैठक, मंडल कमिश्नर ने प्रकरण का निस्तारण होने तक लगायी रोक
मुजफ्फरनगर। नगर पालिका परिषद मुजफ्फरनगर की बोर्ड बैठक 29 को नहीं होगी। इसके होने का मामला खटाई में चला गया है। सहारनपुर मंडल कमिश्नर ने प्रकरण के पूरी तरह से निस्तारण न होने तक बोर्ड बैठक पर रोक लगा दी। जिसके चलते नगर के विकास कार्यों की गाड़ी पूरी तरह से पटरी से उतर गयी। बोर्ड बैठक न होने को लेकर सिटी मजिस्ट्रेट/अधिशासी अधिकारी ने एक पत्रा जारी किया। बोर्ड बैठक न होना पालिकाध्यक्ष के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। बोर्ड बैठक का होना अब भविष्य के गर्भ में है। सहारनपुर मंडल के कमिश्नर चंद्र प्रकाश त्रिपाठी ने नगर पालिका परिषद, मुजफ्फरनगर की 29 को होने वाली बोर्ड बैठक पर सभासद राजीव शर्मा व अन्य की अपील पर संज्ञान लेते हुए वीटो लगा दिया अर्थात स्टे कर दिया। उन्होंने सभासद राजीव शर्मा आदि के प्रार्थना पर संज्ञान लेते हुए 25 जून 2018 की जांच के संबंध में जिलाधिकारी राजीव शर्मा को एक पत्र जारी किया। जिसमें उनके द्वारा कहा गया कि जब तक इस प्रकरण का पूरी तरह से निस्तारण नहीं हो जाता, तब तक नगर पालिका परिषद, मुजफ्फरनगर की बोर्ड बैठक न आयोजित की जाए। उन्होंने लिखा कि 12 जून 2018 के प्रस्ताव संख्या 60 को स्वीकृत करने एवं शेष प्रस्तावों को अस्वीकृत किये जाने की संस्तुति की गयी है।
31 अक्टूबर को जारी पत्र में कहा गया कि नगर मजिस्ट्रेट द्वारा प्रश्नगत प्रकरण के संबंध की गयी जांच प्राविधानों के अनुसार नहीं है। जिला शासकीय अधिवक्ता (सिविल) मुजफ्फरनगर की आख्या के आधार पर विधिक मत पेश किया, जो कि विधिक दृष्टि से सही नहीं है। प्रभारी जिलाधिकारी द्वारा अपने पत्र (22 नवंबर) में उल्लेख किया है कि नगर मजिस्ट्रेट की जांच आख्या 18 जुलाई 2018 एवं पत्रावली के अनुशीलन के अनुसार नगर पालिका परिषद, मुजफ्फरनगर की बोर्ड बैठक आयोजित हुई, जिसमें 50 में से 47 सभासद उपस्थित हुए। बोर्ड बैठक में उपस्थित सभासदगणों में से सिटी मजिस्ट्रेट की जांच आख्या में उल्लिखित 29 सभासदों द्वारा बोर्ड बैठक 12 जून 2018 में एजेंडे के प्रस्ताव संख्या 60 को बहुमत के आधार पर स्वीकृत किया गया है। शेष प्रस्तावों को अस्वीकृत किया गया है। उन्होंने आगे लिखा कि जिलाधिकारी के पत्र 31 अक्टूबर में पालिका की बोर्ड बैठक में पारित प्रस्ताव संख्या 60 असहमत होने व प्रभारी जिलाधिकारी द्वारा स्वीकृत किये जाने की संस्तुति की गयी है। जो आपस में विरोधाभासी है। इसके अतिरिक्त प्रभारी जिलाधिकारी को मात्र नैतिक कार्यों को सम्पादित किये जाने का अधिकार होता है, नीति विषयक निर्णय उनके स्तर से लिया जाना औचित्यपूर्ण नहीं है। मंडलायुक्त ने प्रस्ताव संख्या 60 के पारित होने अथवा न होने के संबंध में स्पष्ट अभिमत देने को कहा है। साथ ही कहा कि जब तक इस प्रकरण का निस्तारण नहीं हो जाता, तब तक पालिका की बोर्ड बैठक न की जाए। वहीं दूसरी ओर सिटी मजिस्ट्रेट/अधिशासी अधिकारी अतुल कुमार ने मंडलायुक्त के पत्र को लेकर सभी सभासदों व अन्य नामितों को पत्र जारी किया बोर्ड बैठक न होने को लेकर। जिसमें कहा गया कि सभासद राजीव शर्मा आदि के प्रार्थना पत्र 25 जून 2018 की जांच के विषयक प्रकरण का निस्तारण न होने तक कोई भी बोर्ड बैठक न की जाए। इसलिए 29 नवंबर को प्रातः 11 बजे होने वाली पालिका की बोर्ड बैठक प्रकरण के निस्तारण तक स्थगित की जाती है। बोर्ड बैठक का स्थगित होना पालिकाध्यक्ष के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
