Russia से तेल खरीद पर अड़ा भारत, ट्रम्प का 50% टैरिफ! विनय कुमार का बड़ा बयान, अमेरिका-भारत रिश्तों में नई तनातनी
India Russia Oil Trade को लेकर अमेरिका और भारत के बीच तनाव एक बार फिर गहराता दिख रहा है। रूस में भारत के राजदूत विनय कुमार ने साफ कहा है कि भारत रूस से तेल खरीदना जारी रखेगा। उन्होंने दो टूक कहा – “भारतीय कंपनियां वहीं से तेल खरीदेंगी, जहां उन्हें सबसे अच्छा सौदा मिलेगा।”
रूस की सरकारी एजेंसी TASS को दिए इंटरव्यू में राजदूत ने अमेरिका द्वारा लगाए गए 50% टैरिफ को बेबुनियाद करार दिया।
ट्रम्प का टैरिफ वार
पूर्व राष्ट्रपति और अब रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत पर कड़ा आर्थिक हमला बोला है।
जुलाई 2025 में उन्होंने भारत पर 25% टैरिफ लगाया।
अब अगस्त के अंत से यह 50% तक बढ़ जाएगा।
ट्रम्प का आरोप है कि भारत रूस से तेल खरीदकर अमेरिका को पीछे छोड़ रहा है और इससे रूस की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है, जिसका सीधा असर यूक्रेन युद्ध पर पड़ रहा है।
भारत को रूसी तेल पर 5% छूट
रूस के डिप्लोमेट रोमन बाबुश्किन ने 20 अगस्त को खुलासा किया था कि भारत को रूस से कच्चा तेल खरीदने पर लगभग 5% डिस्काउंट मिल रहा है।
युद्ध से पहले (2021 तक) भारत रूस से सिर्फ 0.2% (68 हजार बैरल/दिन) तेल लेता था।
मई 2023 तक यह आंकड़ा बढ़कर 45% (20 लाख बैरल/दिन) हो गया।
2025 की शुरुआत से जुलाई तक भारत रोजाना औसतन 17.8 लाख बैरल तेल रूस से खरीद रहा है।
पिछले दो साल में भारत ने हर साल 130 अरब डॉलर (11.33 लाख करोड़ रुपये) से ज्यादा का रूसी तेल खरीदा है।
अमेरिकी आरोप: भारत कर रहा मुनाफाखोरी
ट्रम्प के ट्रेड एडवाइजर पीटर नवारो ने भारत पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा था कि भारत रूस से सस्ता तेल खरीदकर उसे रिफाइन कर महंगे दामों पर दूसरे देशों को बेच रहा है।
उनके अनुसार:
रूस को इस पैसे से यूक्रेन युद्ध के लिए फंडिंग मिल रही है।
भारतीय कंपनियां मुनाफा कमा रही हैं।
और भारत, अमेरिका को सामान बेचकर वहीं से मिले पैसों से रूस का तेल खरीद रहा है।
नवारो ने कहा – “भारत के बिना रूस युद्ध नहीं लड़ पाएगा। इसलिए भारत पर टैरिफ जरूरी है।”
हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि रूस-यूक्रेन जंग में शांति का रास्ता भारत से होकर ही गुजरता है।
भारत का दो टूक जवाब
भारत कई बार साफ कर चुका है कि उसका रूसी तेल व्यापार राष्ट्रहित और ऊर्जा सुरक्षा के लिए है, न कि किसी युद्ध को बढ़ावा देने के लिए।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हाल ही में रूस दौरे के दौरान कहा था –
“भारत रूसी तेल का सबसे बड़ा खरीदार नहीं है, बल्कि चीन है।”
उन्होंने कहा कि भारत को सस्ती ऊर्जा चाहिए और सरकार अपने नागरिकों के हित में वही करेगी, जो सबसे बेहतर होगा।
भारत-रूस साझेदारी बनाम अमेरिका का दबाव
भारत और रूस की ऊर्जा साझेदारी दशकों पुरानी है। अमेरिका के दबाव के बावजूद भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद न सिर्फ जारी रखी, बल्कि उसे और बढ़ाया।
भारत की रिफाइनरी कंपनियां (IOCL, HPCL, Reliance) रूसी तेल पर ज्यादा निर्भर हो रही हैं।
डिस्काउंट और आसान पेमेंट विकल्पों ने रूस को भारत के लिए सबसे भरोसेमंद सप्लायर बना दिया है।
अमेरिका, जो भारत का बड़ा व्यापारिक साझेदार है, अब इसे चुनौती की तरह देख रहा है।
ट्रम्प का चुनावी एजेंडा और भारत
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रम्प का यह कदम पूरी तरह चुनावी राजनीति से जुड़ा है।
अमेरिकी जनता महंगाई और गैस प्राइस से परेशान है।
ट्रम्प चाहते हैं कि चीन और भारत जैसे देशों पर सख्ती दिखाकर वे वोटरों का विश्वास जीतें।
भारत पर 50% टैरिफ लगाने का फैसला उनके चुनावी एजेंडे को मजबूती देगा।
आगे क्या होगा?
India Russia Oil Trade को लेकर अमेरिका और भारत में तनातनी आगे भी बढ़ सकती है।
अगर भारत अपने रुख पर कायम रहता है, तो अमेरिका भारत पर और सख्त व्यापारिक पाबंदियां लगा सकता है।
वहीं भारत को यह तय करना होगा कि वह सस्ती ऊर्जा सुरक्षा और अमेरिकी दबाव के बीच संतुलन कैसे बनाए।
रूस के साथ भारत की रणनीतिक साझेदारी न केवल तेल बल्कि रक्षा और तकनीक तक फैली है, इसलिए यह मुद्दा और जटिल हो गया है।

