Meerut: ऊर्जा राज्यमंत्री के करीबी युवकों द्वारा छात्रों की पिटाई, पुलिस की मूकदर्शक भूमिका पर सवाल
Meerut शहर के तेजगढ़ी क्षेत्र में एक होटल में खाना खा रहे चार छात्रों को ऊर्जा राज्यमंत्री डॉ. सोमेंद्र तोमर के करीबी समर्थकों द्वारा न केवल मारपीट का सामना करना पड़ा, बल्कि उनके साथ अपमानजनक व्यवहार भी किया गया। यह घटना तब घटी जब छात्रों से कार हटाने को लेकर विवाद हुआ। इस दौरान आरोपियों ने खुद को मंत्री के करीबी के रूप में पेश करते हुए छात्रों को धमकाया और उन्हें सड़क पर नाक रगड़ने को मजबूर किया। पुलिस की मौजूदगी में हुए इस घटनाक्रम ने कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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कार निकालने के विवाद में 2 लोगों की बेरहमी से पिटाई, सड़क पर नाक रगड़वाकर माफी मंगवाई!
मंत्री का नाम लेकर धौंस दिखाई, चुनावी रेस में हैं विकुल!#UttarPradesh #ViralVideo #BJP pic.twitter.com/l4MKy0IdbT— News & Features Network | World & Local News (@newsnetmzn) October 21, 2025
होटल में हुआ विवाद:
यह घटना मेडिकल थाना क्षेत्र के तेजगढ़ी इलाके में स्थित एक होटल में हुई। चार कॉलेज के छात्र होटल में खाना खा रहे थे, तभी उनकी कार को लेकर कुछ युवकों से कहासुनी हो गई। विवाद का मुख्य कारण बताया जा रहा है कि आरोपियों ने छात्रों से उनकी कार हटाने के लिए कहा था। बात बढ़ते-बढ़ते मारपीट तक पहुंच गई, और इस दौरान आरोपियों ने अपने आप को ऊर्जा राज्यमंत्री डॉ. सोमेंद्र तोमर के करीबी समर्थक बताकर छात्रों को धमकाना शुरू कर दिया।
मंत्री का नाम और मारपीट:
आरोप है कि जब विवाद बढ़ने लगा, तो युवकों ने मंत्री के करीबी होने का हवाला दिया और छात्रों को धमकी देने लगे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जैसे ही स्थिति ने गंभीर रूप लिया, पुलिस मौके पर मौजूद थी। लेकिन पुलिस ने किसी तरह की कार्रवाई करने के बजाय मूकदर्शक की भूमिका निभाई। आरोपियों ने पुलिस की उपस्थिति के बावजूद छात्रों को सड़क पर नाक रगड़वाने की धमकी दी और अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया। यह घटनाक्रम न केवल कानून व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि राजनैतिक प्रभाव के चलते किस प्रकार अपराधियों को बचाव मिल सकता है।
पुलिस की भूमिका पर सवाल:
इस घटना ने पुलिस की भूमिका को गंभीर रूप से परखने की आवश्यकता पैदा कर दी है। पुलिस के लिए यह एक बड़ी चुनौती बन गई है, क्योंकि आरोपी जब मंत्री के करीबी समर्थक होने का दावा कर रहे थे, तो पुलिस ने बिना किसी कार्रवाई के घटनास्थल छोड़ दिया। यह एक उदाहरण है कि जब राजनीतिक दबाव और प्रभाव का खेल होता है, तो कानून-व्यवस्था प्रभावित होती है। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों ने पुलिस की निष्क्रियता पर सवाल उठाए हैं।
वायरल वीडियो और पुलिस की जांच:
इस घटना के दौरान कुछ प्रत्यक्षदर्शियों ने वीडियो बना लिया, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। वायरल वीडियो में छात्रों के साथ मारपीट और अपमानजनक व्यवहार को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। इस वीडियो के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज किया है और एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह ने कहा है कि मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
गुंडागर्दी और राजनीतिक प्रभाव:
यह घटनाक्रम एक और उदाहरण है कि कैसे राजनीतिक प्रभाव के चलते सामान्य नागरिकों को असहाय बना दिया जाता है। छात्रों को सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया और उनके साथ मारपीट की गई, जो पूरी तरह से गुंडागर्दी की श्रेणी में आता है। यह भी सवाल उठता है कि अगर यह घटना किसी और व्यक्ति के साथ होती, तो क्या पुलिस उसी तरह निष्क्रिय रहती या फिर सक्रिय रूप से कार्रवाई करती?
एसपी सिटी का बयान:
एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह ने इस पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी और कहा कि वायरल वीडियो के आधार पर पूरी घटना की जांच की जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि जांच पूरी होने के बाद, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
राजनीतिक दबाव और पुलिस कार्यप्रणाली:
यह घटना केवल एक स्थानीय विवाद नहीं बल्कि पुलिस की कार्यप्रणाली और राजनीतिक दबाव का एक बड़ा उदाहरण है। जहां एक ओर पुलिस को अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए था, वहीं दूसरी ओर आरोपियों के करीबी राजनीतिक संबंधों ने इस मामले को और जटिल बना दिया। इस मामले में पुलिस की निष्क्रियता और आरोपियों के ऊपर राजनैतिक दबाव को देखते हुए यह सवाल उठता है कि क्या हर नागरिक को समान रूप से न्याय मिलता है, या फिर शक्तिशाली लोग कानून से ऊपर होते हैं?
इस पूरी घटना ने न केवल मेरठ शहर की कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठाए हैं, बल्कि यह भी दर्शाया है कि कैसे राजनीतिक दबाव और ताकतवर लोगों के प्रभाव में न्याय प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इस घटना के बाद पुलिस के ऊपर भी बड़ा दबाव है कि वे मामले की निष्पक्ष जांच करें और दोषियों को सजा दिलवाएं।
मेरठ के इस विवाद ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कानून-व्यवस्था की स्थिति को सुधारने के लिए पुलिस और राजनीतिक दलों दोनों को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हों।

