Salman Khan बोले—मैंने गुटखा नहीं, सिर्फ चांदी वाली इलायची का एड किया! कोटा कोर्ट में पान मसाला विवाद पर बड़ा बयान
News-Desk
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Bollywood celebrity endorsements, deceptive ad allegation India, Inder Mohan Singh Hani complaint, Kota consumer court, misleading advertisement case, pan masala legal case, Rajshree elaichi ad issue, Salman court statement, salman khan, Salman Khan advocate Ashish Dubey, Salman Khan pan masala controversyकोटा कंज्यूमर कोर्ट में चल रहे चर्चित विज्ञापन विवाद मामले में बॉलीवुड अभिनेता Salman Khan ने अपना पक्ष रखते हुए साफ कहा है कि उन्होंने गुटखा या पान मसाला का प्रचार नहीं किया, बल्कि सिर्फ चांदी वाली इलायची (सिल्वर इलायची) का विज्ञापन किया था।
यह बयान उस शिकायत से जुड़ा है जिसमें सलमान पर भ्रामक और गुमराह करने वाले विज्ञापन का आरोप लगाया गया था।
इस विवाद ने अब कोर्ट में कानूनी बहस और सेलिब्रिटी विज्ञापन उत्तरदायित्व पर नई चर्चा खड़ी कर दी है।
सलमान के वकील ने कहा—यह मामला उपभोक्ता आयोग के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता
गुरुवार की सुनवाई के दौरान सलमान खान की ओर से पेश हुए वकील आशीष दुबे ने कोर्ट में दो महत्वपूर्ण तर्क रखे—
यह मामला उपभोक्ता आयोग (Consumer Forum) के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।
सलमान खान न तो पान मसाला बनाते हैं, और न ही बेचते हैं, इसलिए उन्हें इस केस में पार्टी बनाना उचित नहीं है।
उन्होंने साफ कहा कि सलमान ने जिस राजश्री इलायची का विज्ञापन किया है, वह पान मसाला की श्रेणी में नहीं आती, और इसलिए शिकायतकर्ता का आरोप आधारहीन है।
वकील दुबे के मुताबिक, “इस तरह की शिकायतें सेलिब्रिटीज को अनावश्यक रूप से निशाना बनाती हैं, जबकि वे केवल ब्रांड के निर्देशों के अनुसार विज्ञापन करते हैं।”
शिकायतकर्ता बोले—सलमान के दस्तखत असली नहीं लगते, कोर्ट में मौजूदगी की मांग
शिकायतकर्ता इंदर मोहन सिंह हनी, जो एक जाने-माने वकील और बीजेपी नेता हैं, ने सलमान के जवाब पर आपत्ति जताई है।
उन्होंने दावा किया कि—
सलमान खान के जवाब पर मौजूद हस्ताक्षर उन्हें “संदिग्ध” लगते हैं
इसलिए कोर्ट को सलमान की व्यक्तिगत उपस्थिति दर्ज करानी चाहिए
उनके दस्तखत की फोरेंसिक जांच भी की जानी चाहिए
अब इस मामले की अगली सुनवाई 9 दिसंबर को तय की गई है, और उम्मीद है कि आने वाली सुनवाई में मामला और दिलचस्प मोड़ लेगा।
क्या है पूरा विवाद? शिकायतकर्ता का बड़ा आरोप—‘युवाओं को गुमराह करने वाला विज्ञापन’
शिकायतकर्ता इंदर मोहन सिंह हनी ने कोटा कंज्यूमर कोर्ट में दर्ज शिकायत में कहा था कि—
सलमान खान राजश्री कंपनी के एक माउथ फ्रेशनर का विज्ञापन कर रहे हैं
लेकिन विज्ञापन को इस तरह पेश किया जा रहा है, मानो वह केसर वाला पान मसाला हो
यह युवा पीढ़ी को गुमराह करने वाला “भ्रामक दावा” है
उनके अनुसार, राजश्री पान मसाला के विज्ञापन को केसर वाली इलायची और केसर वाला पान मसाला बताना पूरी तरह गलत है, क्योंकि—
“केसर की कीमत लगभग 4 लाख रुपए प्रति किलो है, जो 5 रुपए वाले उत्पाद में असली केसर के इस्तेमाल को असंभव बनाती है।”
हनी का कहना है कि ऐसे दावे युवाओं को पान मसाला खाने के लिए प्रेरित करते हैं, जबकि यह मुंह के कैंसर का बड़ा कारण है।
शिकायत में उन्होंने यह भी कहा था—
“दुनिया के कई देशों में सेलिब्रिटी कोल्ड ड्रिंक तक प्रमोट नहीं करते, लेकिन भारत में सेलेब्रिटी तंबाकू से जुड़े उत्पादों का भी विज्ञापन करते हैं। सलमान एक रोल मॉडल हैं, इसलिए उनके विज्ञापन का प्रभाव अधिक होता है।”
कोर्ट ने सलमान खान को भेजा था नोटिस, जवाब मांगने के बाद तेज हुई बहस
कोटा कंज्यूमर कोर्ट ने शिकायत को गंभीर मानते हुए सलमान खान को नोटिस भेजा और उनका पक्ष मांगा था।
सलमान के जवाब के बाद अब मामला कानूनी रूप से और गहराई में जा चुका है।
कई कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला आने वाले समय में—
सेलिब्रिटी विज्ञापनों की जिम्मेदारी
प्रोडक्ट कैटेगरी की पारदर्शिता
न्यूट्रल बनाम भ्रामक प्रचार
इन मुद्दों पर बड़े स्तर की कानूनी व्याख्या को जन्म दे सकता है।
क्या यह मामला बड़े उद्योग पर असर डाल सकता है? विज्ञापन जगत की नज़रें इस केस पर
भारत का पान मसाला और माउथ फ्रेशनर उद्योग कई हजार करोड़ का है, और इसमें फिल्म सितारों का प्रभाव हमेशा एक महत्त्वपूर्ण कारक रहा है।
सलमान खान जैसे बड़े स्टार के खिलाफ ऐसी शिकायत का असर—
ब्रांडों की विज्ञापन रणनीति
सेलिब्रिटी कॉन्ट्रैक्ट
उपभोक्ता संरक्षण कानून
पर सीधा पड़ सकता है।
कई मार्केट विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कोर्ट ने विज्ञापन को भ्रामक मान लिया, तो कई कंपनियों और सेलेब्रिटीज़ को अपने एंडोर्समेंट मॉडल को बदलना पड़ सकता है।
अब अगली सुनवाई 9 दिसंबर—सलमान का बयान, शिकायतकर्ता की आपत्तियाँ और कानूनी बहस जारी
अब निगाहें 9 दिसंबर की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां—
सलमान के दस्तखत की जांच पर बहस
“भ्रामक विज्ञापन” की परिभाषा
राजश्री इलायची किस प्रोडक्ट कैटेगरी में आती है
और क्या उपभोक्ता अदालत इसे सुनने का अधिकार रखती है
जैसे सवालों पर विस्तृत सुनवाई होगी।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला केवल एक विज्ञापन विवाद नहीं, बल्कि “सेलिब्रिटी उत्तरदायित्व” (Celebrity Accountability) पर एक बड़े फैसले का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।

