Iran: Ayatollah Khamenei की सत्ता डगमगाई, रूस भागने की खुफिया तैयारी, सड़कों पर GenZ और शासन के भविष्य पर संकट
Iran protests crisis अब सिर्फ सड़कों पर नारेबाज़ी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सीधे ईरान की सत्ता की नींव को हिला रहा है। देश में जारी उग्र विरोध प्रदर्शनों के बीच ईरान के सर्वोच्च नेता Ayatollah Khamenei को लेकर एक चौंकाने वाला दावा सामने आया है। खुफिया रिपोर्ट के अनुसार, यदि हालात काबू से बाहर होते हैं तो खामेनेई देश छोड़कर रूस जाने की तैयारी कर चुके हैं।
🔴 खुफिया रिपोर्ट का दावा: रूस के लिए तैयार प्लान-B
ब्रिटेन के प्रतिष्ठित अखबार द टाइम्स को मिली एक खुफिया रिपोर्ट में कहा गया है कि 86 वर्षीय खामेनेई अपने बेटे और संभावित उत्तराधिकारी मुजतबा खामेनेई समेत लगभग 20 लोगों के छोटे समूह के साथ राजधानी तेहरान छोड़ सकते हैं। यह कदम तभी उठाया जाएगा, जब प्रदर्शन नियंत्रण से पूरी तरह बाहर हो जाएं।
यह दावा Iran protests crisis को एक नए और बेहद गंभीर स्तर पर ले जाता है, जहां पहली बार सुप्रीम लीडर के देश छोड़ने की संभावनाओं पर खुलकर चर्चा हो रही है।
🔴 आठ दिन से जलता ईरान, 78 शहरों तक फैला आक्रोश
ईरान में खामेनेई विरोधी प्रदर्शन लगातार आठवें दिन भी थमे नहीं हैं। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, अब तक 78 शहरों में 222 से अधिक स्थानों पर विरोध प्रदर्शन हो चुके हैं। इन घटनाओं में कम से कम 20 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जिनमें तीन बच्चे भी शामिल हैं। इसके अलावा 44 नाबालिगों को हिरासत में लिया गया है।
Iran protests crisis की यह तस्वीर साफ दिखाती है कि गुस्सा केवल सीमित वर्ग तक नहीं, बल्कि पूरे समाज में फैल चुका है।
🔴 28 दिसंबर से शुरू हुई चिंगारी, अब आंदोलन में बदली
इन प्रदर्शनों की शुरुआत 28 दिसंबर को हुई थी, जब तेहरान के व्यापारियों ने आर्थिक हालात के खिलाफ आवाज़ उठाई। कुछ ही दिनों में इस आंदोलन में हजारों GenZ युवाओं की एंट्री हो गई, जिन्होंने सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
🔴 देश छोड़ने से पहले सुरक्षित की गई संपत्ति?
खुफिया रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि खामेनेई ने संभावित पलायन से पहले विदेशों में संपत्तियां और कैश सुरक्षित कर लिया है। बताया गया है कि वह कई चैरिटेबल फाउंडेशनों के जरिए अरबों डॉलर की संपत्ति नियंत्रित करते हैं। इनमें ‘सेताद’ नामक संस्था सबसे प्रमुख है, जिसकी वैल्यू पहले भी कई अरब डॉलर आंकी जा चुकी है।
सूत्रों के मुताबिक, शासन से जुड़े कई वरिष्ठ नेताओं के रिश्तेदार पहले से ही अमेरिका, कनाडा और खाड़ी देशों में रह रहे हैं।
🔴 आर्थिक बदहाली: गुस्से की असली वजह
Iran protests crisis के पीछे सबसे बड़ा कारण देश की चरमराती अर्थव्यवस्था मानी जा रही है। दिसंबर 2025 में ईरानी मुद्रा रियाल गिरकर करीब 1.45 मिलियन प्रति अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गई, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है।
साल की शुरुआत से रियाल की कीमत लगभग आधी हो चुकी है। खाद्य वस्तुओं की कीमतों में 72% और दवाओं की कीमतों में 50% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। आम नागरिकों के लिए जीवनयापन बेहद मुश्किल होता जा रहा है।
🔴 2026 बजट और टैक्स बम
सरकार द्वारा 2026 के बजट में 62% टैक्स बढ़ाने के प्रस्ताव ने आग में घी डालने का काम किया। मध्यम वर्ग और युवा आबादी इसे सीधे तौर पर अपने भविष्य पर हमला मान रही है।
🔴 अमेरिका की खुली चेतावनी
पिछले सप्ताह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को चेतावनी दी थी कि यदि प्रदर्शनकारियों पर हिंसक कार्रवाई की गई, तो अमेरिका कड़ी प्रतिक्रिया देगा। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि अगर ईरान ने पहले की तरह लोगों को मारना शुरू किया, तो उसे भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।
🔴 मानवाधिकार संगठनों के गंभीर आरोप
अमेरिका स्थित HRAI और ओस्लो स्थित हेंगाव ने आरोप लगाया है कि ईरानी सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर अंधाधुंध फायरिंग की। रिपोर्टों के मुताबिक, बच्चों को भी नहीं बख्शा गया।
वहीं, ईरान की सरकारी फर्स न्यूज एजेंसी का दावा है कि इन प्रदर्शनों में 250 पुलिसकर्मी और 45 बसीज बल के सदस्य घायल हुए हैं।
🔴 ‘एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस’ भी कमजोर
Iran protests crisis ऐसे समय पर उभरा है, जब ईरान के नेतृत्व वाला तथाकथित ‘एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस’ भी दबाव में है। गाजा में हमास को भारी नुकसान, लेबनान में हिजबुल्ला के शीर्ष नेताओं की मौत, दिसंबर 2024 में सीरिया की सत्ता से बदलाव और यमन में हूती विद्रोहियों पर हमले—इन सभी घटनाओं ने ईरान की क्षेत्रीय ताकत को कमजोर किया है।
🔴 भारत की एडवाइजरी
भारत सरकार ने ईरान में हिंसक हालात को देखते हुए अपने नागरिकों को गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी है। विदेश मंत्रालय ने ईरान में रह रहे भारतीय नागरिकों से दूतावास में जल्द रजिस्ट्रेशन कराने को कहा है।
🔴 खामेनेई: 35 साल की सत्ता, अब सबसे बड़ी चुनौती
अयातुल्लाह अली खामेनेई 1989 से ईरान की सर्वोच्च सत्ता पर काबिज हैं। 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद वह 1981 में राष्ट्रपति बने और 8 साल तक इस पद पर रहे। खुमैनी की मृत्यु के बाद उन्हें सुप्रीम लीडर बनाया गया, जिसके लिए कानून में संशोधन तक करना पड़ा।

