Muzaffarnagar में आत्मनिर्भर भारत की बड़ी पहल: प्रजापति समाज को मिलेंगे बिजली से चलने वाले चाक, हस्तशिल्प को नई रफ्तार
केंद्र सरकार की आत्मनिर्भर भारत परिकल्पना को ज़मीन पर उतारने की एक अहम पहल सामने आई है। उत्तर प्रदेश के Muzaffarnagar में पारंपरिक हस्तशिल्प से जुड़े प्रजापति समाज के कारीगरों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में ठोस कदम उठाया जा रहा है। इस पहल के तहत वस्त्र मंत्रालय द्वारा बिजली से चलने वाले चाक (इलेक्ट्रिक पॉटरी व्हील) वितरित किए जाएंगे, जिससे कारीगरों के श्रम, समय और उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय सुधार होने की उम्मीद है।
आत्मनिर्भर भारत की सोच और ज़मीनी क्रियान्वयन
सर्व धर्म शक्ति संगठन के दिल्ली एवं उत्तर प्रदेश प्रभारी आचार्य सूर्यांश ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आत्मनिर्भर भारत केवल एक नारा नहीं, बल्कि नरेन्द्र मोदी की दूरदर्शी सोच का व्यावहारिक रूप है। इसी सोच के अनुरूप केंद्र सरकार देश के पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को आधुनिक संसाधन उपलब्ध करा रही है, ताकि वे वैश्विक बाज़ार में भी प्रतिस्पर्धा कर सकें।
आचार्य सूर्यांश ने बताया कि प्रजापति समाज पीढ़ियों से मिट्टी के बर्तन, दीपक, सजावटी सामग्री और घरेलू उपयोग के उत्पाद बनाता आ रहा है। आधुनिक तकनीक के अभाव में इन कारीगरों को अधिक समय और श्रम लगाना पड़ता था, जिससे उनकी आमदनी सीमित रह जाती थी।
पत्रकार वार्ता में योजना की विस्तृत जानकारी
रूडकी रोड स्थित एक रेस्टोरेंट में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान आचार्य सूर्यांश और सर्व धर्म शक्ति संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ज्ञानेन्द्र भारतीय ने योजना की पूरी रूपरेखा साझा की। उन्होंने बताया कि वस्त्र मंत्रालय द्वारा संचालित हस्तशिल्प प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत मुजफ्फरनगर में प्रजापति समाज के 50 कारीगरों को बिजली से चलने वाले चाक-किट दिए जाएंगे।
इन किटों के माध्यम से कारीगर कम समय में अधिक और बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पाद तैयार कर सकेंगे। इससे न केवल उनकी आय बढ़ेगी, बल्कि पारंपरिक शिल्प को आधुनिक बाज़ार की मांग के अनुरूप ढालने में भी मदद मिलेगी।
कार्यक्रम का स्थान, समय और आयोजन
Muzaffarnagar handicraft scheme के तहत यह चाक वितरण कार्यक्रम 7 जनवरी को आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम का आयोजन रूडकी रोड स्थित गुरु रामराम राय पब्लिक स्कूल के निकट सुदेश पैलेस में किया जाएगा। दोपहर सवा दो बजे से शुरू होने वाले इस कार्यक्रम में वस्त्र मंत्रालय के निदेशक अशोक गुप्ता मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे और लाभार्थियों को चाक-किट वितरित करेंगे।
आयोजकों के अनुसार, कार्यक्रम में स्थानीय प्रशासन, समाज के गणमान्य लोग और बड़ी संख्या में कारीगर भी मौजूद रहेंगे।
कारीगरों के जीवन में बदलाव की उम्मीद
इस योजना से जुड़े कारीगरों का मानना है कि बिजली से चलने वाले चाक उनके काम को पूरी तरह बदल देंगे। जहां पहले एक बर्तन बनाने में अधिक समय लगता था, वहीं अब उत्पादन तेज़ होगा और डिज़ाइन में भी एकरूपता आएगी। इससे बाज़ार में उनके उत्पादों की मांग बढ़ने की संभावना है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी योजनाएं ग्रामीण और अर्ध-शहरी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाती हैं। Muzaffarnagar handicraft scheme जैसे प्रयास स्थानीय स्तर पर रोज़गार सृजन और पलायन रोकने में भी सहायक हो सकते हैं।
आगामी धार्मिक एवं सामाजिक आयोजन की घोषणा
पत्रकार वार्ता के दौरान आचार्य सूर्यांश ने एक अन्य महत्वपूर्ण घोषणा भी की। उन्होंने बताया कि आगामी 2 मार्च को नई मंडी रामलीला भवन में मां बगलामुखी यज्ञ का आयोजन किया जाएगा। इस धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है, जिससे सामाजिक एकता और सांस्कृतिक चेतना को भी बल मिलेगा।
प्रेसवार्ता में मौजूद प्रमुख चेहरे
इस अवसर पर अतुल विश्वकर्मा, भूपेन्द्र त्यागी सहित संगठन से जुड़े अन्य पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी मौजूद रहे। सभी ने योजना को समाज के लिए लाभकारी बताते हुए केंद्र सरकार और वस्त्र मंत्रालय के प्रयासों की सराहना की।

