Yemen में आग और अलगाव की जंग: सऊदी एयरस्ट्राइक में STC के 7 लड़ाके मारे गए, रूस-चीन के बाद अब UAE भी घेरे में
Yemen STC attack ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि यमन का गृह युद्ध अब सिर्फ हूती विद्रोहियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देश के भीतर अलगाववादी ताकतें और क्षेत्रीय शक्तियां आमने-सामने आ चुकी हैं। शुक्रवार को यमन के दक्षिणी प्रांत हद्रामौत में सऊदी अरब की हवाई कार्रवाई में सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC) के कम से कम 7 लड़ाकों की मौत हो गई, जबकि 20 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। इस हमले के वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर तेजी से वायरल हो रहे हैं।
🔴 STC के ठिकानों पर सीधा हमला, इलाके में दहशत
यह एयरस्ट्राइक हद्रामौत में STC के एक अहम ठिकाने को निशाना बनाकर की गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, धमाकों की आवाज दूर-दूर तक सुनी गई और आसपास के इलाकों में अफरा-तफरी मच गई। हमले के बाद STC समर्थकों में भारी आक्रोश देखा गया, जबकि यमन सरकार ने इसे “संप्रभुता बहाल करने की कार्रवाई” बताया।
🔴 यमन सरकार का दावा: अहम सैन्य बेस वापस कब्जे में
हमले के साथ-साथ यमन सरकार ने यह भी दावा किया है कि उसने सैन्य कार्रवाई के जरिए STC से एक महत्वपूर्ण मिलिट्री बेस वापस अपने नियंत्रण में ले लिया है। हद्रामौत के गवर्नर सालेम अल-खानबाशी ने स्पष्ट कहा कि सुरक्षाबल केवल उन्हीं सैन्य ठिकानों को वापस ले रहे हैं, जिन पर STC ने अवैध कब्जा कर रखा था।
उन्होंने STC के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई का संकेत देते हुए कहा कि राज्य की सत्ता को चुनौती देने वाले किसी भी गुट को बख्शा नहीं जाएगा।
🔴 हद्रामौत में सेना की तैनाती, हालात बेहद तनावपूर्ण
यमन सरकार ने हद्रामौत में अतिरिक्त सैन्य बल तैनात करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, कई इलाकों में चेकपॉइंट बढ़ा दिए गए हैं और सुरक्षा बलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। आशंका जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में यहां और झड़पें हो सकती हैं।
🔴 मुकल्ला पोर्ट पर सऊदी हमला: असली मोड़ यहीं से आया
इस पूरे घटनाक्रम से पहले मंगलवार को सऊदी अरब ने यमन के मुकल्ला पोर्ट पर भी हवाई हमला किया था। सऊदी अरब का आरोप था कि संयुक्त अरब अमीरात के फुजैरा पोर्ट से आए दो जहाजों से मुकल्ला में हथियार और सैन्य वाहन उतारे जा रहे थे।
इन जहाजों के ट्रैकिंग सिस्टम बंद बताए गए, जिससे सऊदी को शक हुआ कि यह सप्लाई STC जैसे अलगाववादी गुट को दी जा रही है। सऊदी वायुसेना ने इसे शांति और स्थिरता के लिए खतरा बताते हुए सीमित लेकिन सटीक हमला किया।
🔴 यमन सरकार का बड़ा फैसला: UAE से डिफेंस डील रद्द
मुकल्ला पोर्ट पर हमले के बाद यमन सरकार ने UAE के साथ रक्षा समझौता रद्द करने का ऐलान कर दिया। इसके साथ ही हालात काबू में करने के लिए—
72 घंटे की हवाई, थल और समुद्री नाकाबंदी
और 90 दिनों के लिए आपातकाल
लागू करने का फैसला किया गया। यह कदम यमन सरकार और UAE के रिश्तों में आई गंभीर दरार को दिखाता है।
🔴 STC कौन है और क्यों खतरनाक माना जा रहा है
सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC) एक सशस्त्र अलगाववादी संगठन है, जिसे UAE का समर्थन प्राप्त है। इसका लक्ष्य यमन को फिर से उत्तर और दक्षिण यमन में बांटना और दक्षिणी यमन में अलग सरकार बनाना है।
यमन 1990 से पहले दो हिस्सों में बंटा हुआ था। एकीकरण के बाद भी दक्षिण में अलगाव की भावना बनी रही, जिसे STC ने हथियारबंद संघर्ष में बदल दिया।
🔴 पिछले एक महीने में STC का बड़ा सैन्य विस्तार
पिछले एक महीने में STC ने बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान चलाए। उसने—
हद्रामौत
अल-मह्रा
और अन्य तेल व गैस-समृद्ध क्षेत्रों
पर कब्जे का दावा किया। इसके चलते यमन सरकार की सुरक्षा बलों और कई स्थानीय कबीलों को पीछे हटना पड़ा। दिसंबर के मध्य तक STC ने कई अहम ऊर्जा क्षेत्रों पर नियंत्रण की बात कही और अबयान प्रांत में नए सैन्य अभियान की घोषणा की।
🔴 सऊदी की चेतावनी और फिर सीधा हमला
15 दिसंबर को STC ने अबयान के पहाड़ी इलाकों में बड़ा हमला किया। इसके जवाब में सऊदी अरब ने हद्रामौत के वादी नहाब इलाके में चेतावनी के तौर पर हवाई हमले किए। सऊदी ने साफ कहा था कि अगर STC पीछे नहीं हटा, तो और कड़ी कार्रवाई होगी। मुकल्ला पोर्ट और ताजा एयरस्ट्राइक उसी चेतावनी की अगली कड़ी मानी जा रही है।
🔴 यमन में सक्रिय 4 बड़े सशस्त्र गुट
1️⃣ हूती विद्रोही (अंसार अल्लाह) – ईरान समर्थित, यमन सरकार के खिलाफ।
2️⃣ यमनी नेशनल रेजिस्टेंस फोर्सेज – अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन, सऊदी और UAE समर्थित।
3️⃣ हदरामी एलीट फोर्सेज – UAE समर्थित, अल-कायदा के खिलाफ अभियान।
4️⃣ सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC) – दक्षिणी यमन की आजादी की मांग, UAE समर्थित।
🔴 सऊदी अरब और UAE के रिश्तों में क्यों आई खटास
यमन युद्ध की शुरुआत में सऊदी अरब और UAE साथ थे। 2015 में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के खिलाफ सऊदी के नेतृत्व में गठबंधन बना। लेकिन समय के साथ UAE ने यमन में अपनी अलग रणनीति अपनानी शुरू कर दी।
विशेषज्ञों के मुताबिक, UAE की दिलचस्पी यमन के बंदरगाहों, समुद्री रास्तों और रणनीतिक तटीय इलाकों में है। कतर की हमद बिन खलीफा यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर सुल्तान बरकत के अनुसार,
“UAE बंदरगाहों को विकसित नहीं, बल्कि क्षेत्रीय वर्चस्व बनाए रखना चाहता है, ताकि जेबेल अली पोर्ट सबसे अहम बना रहे।”
🔴 2014 से जारी गृह युद्ध, देश तबाही के कगार पर
यमन में गृह युद्ध 2014 में शुरू हुआ था, जब हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना पर कब्जा कर लिया। 2015 में सऊदी के नेतृत्व में सैन्य गठबंधन ने हस्तक्षेप किया। इसके बाद से अब तक—
हजारों लोगों की मौत
देश की 80% आबादी मानवीय सहायता पर निर्भर
हो चुकी है। शिया-सुन्नी विभाजन, क्षेत्रीय राजनीति और तेल-गैस संसाधनों की लड़ाई ने यमन को लंबे संघर्ष में झोंक दिया।

