Budaun Mentha Factory Death Case: सील फैक्ट्री में 3 गार्डों की रहस्यमयी मौत, बदायूं में फैला हड़कंप
News-Desk
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Budaun, Budaun news, Factory Death, Farmers Union, industrial safety, mentha factory, Police Investigation, Sealed Factory, UP CrimeBudaun Mentha Factory Death की यह घटना उत्तर प्रदेश में औद्योगिक सुरक्षा और प्रशासनिक लापरवाही का एक भयावह उदाहरण बनती जा रही है। बदायूं जिले के उझानी रोड स्थित कूड़ा नरसिंहपुर गांव में मौजूद मेंथा फैक्ट्री एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह और भी ज्यादा डरावनी है। सील की गई इस फैक्ट्री के अंदर तीन सुरक्षा गार्डों के शव मिलने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। परिजनों और किसान यूनियन ने इसे सीधी हत्या करार दिया है, जबकि प्रशासन अब जांच और कार्रवाई की बात कर रहा है।
🟥 बदायूं की कुख्यात मेंथा फैक्ट्री फिर चर्चा में
Budaun Mentha Factory Death से पहले यह फैक्ट्री पहले ही एक बड़े हादसे की गवाह बन चुकी थी। 21 मई 2025 को इसी फैक्ट्री में भीषण आग लगी थी, जिसकी लपटें कई दिनों तक बुझ नहीं पाई थीं। उस हादसे में करीब 100 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था और एक व्यक्ति की मौत की पुष्टि भी प्रशासन ने की थी। इसके बाद फैक्ट्री को सील कर दिया गया था, लेकिन आरोप है कि इसके बावजूद इसे चोरी-छिपे फिर से चालू कर दिया गया।
🟥 सुबह-सुबह तीन लाशों से मचा हड़कंप
Budaun Mentha Factory Death की ताजा घटना शुक्रवार सुबह सामने आई, जब फैक्ट्री के एक कमरे से तीन सुरक्षा गार्डों के शव बरामद किए गए। शव एक ही कमरे में पड़े हुए थे, जिससे हत्या की आशंका और भी गहरी हो गई है। मृतकों की पहचान जुगेंद्र, विवेक और भानू के रूप में हुई है। तीनों बदायूं जिले के ही निवासी थे और फैक्ट्री में सुरक्षा गार्ड के रूप में कार्यरत थे।
जैसे ही यह खबर बाहर फैली, गांव और आसपास के इलाके में हड़कंप मच गया। फैक्ट्री के बाहर लोगों की भीड़ जुट गई और देखते ही देखते माहौल तनावपूर्ण हो गया।
🟥 परिजनों का आरोप: सील फैक्ट्री में साजिशन हत्या
मृतकों के परिजनों का आरोप है कि Budaun Mentha Factory Death कोई हादसा नहीं बल्कि सोची-समझी साजिश है। उनका कहना है कि फैक्ट्री सील होने के बावजूद अवैध रूप से चल रही थी और सुरक्षा गार्डों को इसके बारे में बहुत कुछ पता था। इसी वजह से उन्हें रास्ते से हटाया गया।
परिजनों ने सीधे तौर पर फैक्ट्री मालिक मनोज गोयल पर हत्या का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि सत्ता से जुड़े लोगों के संरक्षण में यह फैक्ट्री चल रही थी और जब गार्डों ने इसका विरोध किया या सच जान लिया, तो उन्हें मार दिया गया।
🟥 किसान यूनियन के साथ धरना, शव उठाने से इनकार
Budaun Mentha Factory Death के बाद मृतकों के परिजन किसान यूनियन के साथ फैक्ट्री गेट पर धरने पर बैठ गए हैं। उन्होंने पुलिस को शव उठाने नहीं दिए हैं। अब तक पुलिस केवल एक शव को ही किसी तरह निकालकर बदायूं भेज पाई है, जबकि दो शव अभी भी उसी कमरे में रखे हुए हैं।
परिजनों की मांग है कि जब तक उनकी शर्तें पूरी नहीं होंगी, वे शव नहीं उठाने देंगे। उन्होंने हर मृतक के परिवार को 50 लाख रुपये मुआवजा और फैक्ट्री मालिकों पर हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।
🟥 किसान यूनियन का बड़ा आरोप
किसान यूनियन के नेता अतुल तोमर ने Budaun Mentha Factory Death पर तीखा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यह फैक्ट्री पहले भी कई विवादों में रही है और आग की घटना के बाद भी इसे सील करने के बावजूद दोबारा चलाया गया। यह सब राजनीतिक संरक्षण के बिना संभव नहीं है।
उनका कहना है कि अगर समय रहते प्रशासन ने कार्रवाई की होती तो आज तीन परिवार उजड़ने से बच सकते थे।
🟥 पुलिस का बयान और कार्रवाई का भरोसा
इस पूरे मामले पर सीओ उझानी देवेंद्र कुमार ने कहा कि Budaun Mentha Factory Death को गंभीरता से लिया गया है। परिजनों की शिकायत पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया जा रहा है। फैक्ट्री को फिर से सील किया जाएगा और यह भी जांच होगी कि इसे दोबारा कैसे शुरू किया गया।
पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और निष्पक्ष जांच की जाएगी।
🟥 प्रशासनिक लापरवाही या संगठित अपराध
Budaun Mentha Factory Death केवल तीन लोगों की मौत नहीं, बल्कि एक बड़े सिस्टम फेल्योर की कहानी बनता जा रहा है। जिस फैक्ट्री को आग के बाद बंद कर दिया गया था, वह कैसे दोबारा चलने लगी, यह अपने आप में बड़ा सवाल है। सुरक्षा गार्डों की मौत इस बात की ओर इशारा करती है कि फैक्ट्री के भीतर कुछ बेहद गंभीर और गैरकानूनी गतिविधियां चल रही थीं।

