गाजा युद्ध पर अमेरिका-इजराइल में तीखी बयानबाज़ी: हथियार सप्लाई रोकने का आरोप, Netanyahu बनाम बाइडेन प्रशासन, वैश्विक राजनीति में नया मोड़
Gaza war Netanyahu Biden controversy एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और मध्य-पूर्व की राजनीति के केंद्र में आ गया है। इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि गाजा में हमास के खिलाफ चल रही जंग के दौरान अमेरिकी हथियार और गोला-बारूद की सप्लाई रोके जाने से इजराइली सैनिकों की जान गई। यह बयान केवल दो देशों के बीच बयानबाज़ी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उसने इजराइल-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी, सैन्य सहयोग और वैश्विक मंच पर भरोसे के रिश्ते को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
🔴 प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोपों की बौछार
मंगलवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में नेतन्याहू ने कहा कि जंग के दौरान इजराइल के पास जरूरी गोला-बारूद की भारी कमी हो गई थी, क्योंकि अमेरिका की ओर से हथियारों और सैन्य सामग्री की आपूर्ति रोक दी गई थी। उन्होंने यह नहीं बताया कि इस वजह से कितने सैनिकों की मौत हुई, लेकिन इतना जरूर कहा कि कुछ जानें बचाई जा सकती थीं।
नेतन्याहू ने सीधे तौर पर जो बाइडेन का नाम नहीं लिया, लेकिन यह संकेत दिया कि जब तक अमेरिका में डोनाल्ड ट्रम्प राष्ट्रपति नहीं बने, तब तक यह रोक जारी रही। उनके मुताबिक, ट्रम्प के सत्ता में आते ही इजराइल को फिर से हथियार मिलने लगे।
🔴 सैन्य रणनीति और ‘घर-घर लड़ाई’ का दावा
इजराइली पीएम का कहना है कि गोला-बारूद की कमी के कारण सैनिकों को अधिक जोखिम भरे तरीके से लड़ना पड़ा। उन्होंने दावा किया कि कई बार सैनिकों को भारी हथियारों के समर्थन के बिना घरों में घुसकर हमास के ठिकानों पर कार्रवाई करनी पड़ी, जिससे जान का खतरा और बढ़ गया।
नेतन्याहू ने कहा कि युद्ध में मौतें दुर्भाग्यपूर्ण लेकिन आम बात हैं, मगर यदि संसाधनों की कमी के कारण जान जाए, तो यह एक ऐसी स्थिति है जिसे भविष्य में किसी भी हाल में दोहराया नहीं जाना चाहिए।
🔴 अमेरिकी सहायता पर निर्भरता कम करने का ऐलान
नेतन्याहू ने इस विवाद के बीच एक बड़ा रणनीतिक संकेत देते हुए कहा कि इजराइल अगले दशक में विदेशी सैन्य सहायता पर निर्भरता कम करना चाहता है। उनका लक्ष्य एक मजबूत और स्वतंत्र घरेलू हथियार उद्योग विकसित करना है, ताकि किसी भी परिस्थिति में इजराइल को हथियार या गोला-बारूद की कमी न झेलनी पड़े।
उन्होंने कहा कि वे इजराइल-अमेरिका संबंधों को केवल सहायता तक सीमित नहीं रखना चाहते, बल्कि इसे एक व्यापक साझेदारी में बदलना चाहते हैं, जिसमें इजराइल के भीतर रक्षा और तकनीकी विकास को बढ़ावा दिया जाए। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यह मॉडल भारत और जर्मनी जैसे अन्य सहयोगी देशों तक भी बढ़ाया जा सकता है।
🔴 अमेरिका की प्रतिक्रिया: बाइडेन के सहयोगियों का पलटवार
नेतन्याहू के आरोपों के बाद अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के शीर्ष सहयोगी एमोस होचस्टीन ने उनके बयान को झूठा बताया। उन्होंने कहा कि नेतन्याहू न तो सच बोल रहे हैं और न ही उस राष्ट्रपति के प्रति सम्मान दिखा रहे हैं, जिसने कठिन समय में इजराइल की मदद की।
बाइडेन के एक अन्य वरिष्ठ सहयोगी ब्रेट मैकगर्क ने भी कहा कि नेतन्याहू का दावा तथ्यात्मक रूप से गलत है। उनके मुताबिक, अमेरिका ने इजराइल को लगातार सैन्य सहायता दी और किसी भी तरह की व्यापक रोक नहीं लगाई गई थी।
🔴 अमेरिका से इजराइल को मिलने वाली सैन्य सहायता का आंकड़ा
वॉर पावर इजराइल की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका हर साल इजराइल को लगभग 3.8 अरब डॉलर (करीब 32,000 करोड़ रुपये) की सैन्य सहायता देता है। यह सहायता मुख्य रूप से फॉरेन मिलिट्री फाइनेंसिंग (FMF) कार्यक्रम के तहत दी जाती है।
इसमें से करीब 3.3 अरब डॉलर सामान्य हथियार और सैन्य उपकरण खरीदने के लिए और 500 मिलियन डॉलर मिसाइल डिफेंस सिस्टम के लिए निर्धारित होते हैं। यह व्यवस्था 2016 में साइन हुए 10 साल के समझौते के तहत है, जो 2019 से 2028 तक लागू है और हर साल अमेरिकी कांग्रेस से अनुमोदित होती है।
🔴 गाजा युद्ध के बाद अतिरिक्त मदद
अक्टूबर 2023 में गाजा युद्ध शुरू होने के बाद अमेरिका ने इजराइल को अतिरिक्त सैन्य सहायता भी दी। 2023 से 2025 के बीच कुल 21.7 अरब डॉलर से अधिक की मदद दी गई, जिसमें 2024 में 8.7 अरब डॉलर का विशेष पैकेज शामिल था।
2025 में भी करीब 3.8 अरब डॉलर की वार्षिक सहायता जारी रही, और मार्च 2025 में ट्रम्प प्रशासन ने इमरजेंसी अथॉरिटी के तहत 4 अरब डॉलर की फास्ट-ट्रैक सहायता दी। कुल मिलाकर, अक्टूबर 2023 से अब तक इजराइल को 17 से 22 अरब डॉलर या उससे अधिक की सैन्य सहायता मिल चुकी है।
🔴 इजराइल की सैन्य ताकत और वैश्विक रैंकिंग
जनवरी 2026 तक ग्लोबल फायर पावर की रैंकिंग के अनुसार, इजराइल की सेना दुनिया के 145 देशों में 15वें स्थान पर है। इसका पावर इंडेक्स स्कोर 0.2661 है, जो इसकी तकनीक, प्रशिक्षण और रणनीतिक क्षमता को दर्शाता है।
अमेरिका इस सूची में पहले स्थान पर है। विशेषज्ञों का मानना है कि इजराइल की सैन्य ताकत केवल हथियारों की संख्या से नहीं, बल्कि उसकी तकनीकी बढ़त, खुफिया नेटवर्क और रणनीतिक योजना से भी मापी जाती है।
🔴 गाजा युद्ध: दो साल की तबाही और मानवीय संकट
7 अक्टूबर 2023 को हमास ने इजराइल में घुसपैठ कर करीब 251 लोगों को बंधक बना लिया था। इसके जवाब में इजराइल ने गाजा में बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान शुरू किया।
दो साल से अधिक समय बीतने के बाद गाजा का बड़ा हिस्सा खंडहर में बदल चुका है। रिपोर्टों के मुताबिक, गाजा की लगभग 98% खेती की जमीन बंजर हो चुकी है और सिर्फ 232 हेक्टेयर जमीन ही उपजाऊ बची है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यहां खेती को फिर से पटरी पर लाने में करीब 25 साल लग सकते हैं।
🔴 बेघर आबादी और मलबे का पहाड़
गाजा के करीब 23 लाख लोगों में से 90% से अधिक बेघर हो चुके हैं। वे तंबुओं में, बिना पर्याप्त पानी, बिजली और स्वास्थ्य सुविधाओं के जीवन गुजार रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, गाजा में जमा 510 लाख टन मलबा हटाने में करीब 10 साल और 1.2 ट्रिलियन डॉलर का खर्च आ सकता है।
80% से ज्यादा इमारतें तबाह हो चुकी हैं, जिससे 4.5 ट्रिलियन डॉलर से अधिक का आर्थिक नुकसान हुआ है।
🔴 मानव क्षति के भयावह आंकड़े
यूएन एजेंसियों के अनुसार, अब तक 67,000 से ज्यादा फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं, जिनमें लगभग 18,430 बच्चे शामिल हैं। करीब 39,384 बच्चे ऐसे हैं, जिनके माता या पिता में से किसी एक की मौत हो चुकी है, जबकि 17,000 बच्चे दोनों माता-पिता खो चुके हैं।
राहत एजेंसियों का कहना है कि गाजा अब एक शहर नहीं, बल्कि जीवित बचे लोगों का विशाल शिविर बन चुका है।
🔴 कूटनीति, सहायता और साझेदारी का भविष्य
Gaza war Netanyahu Biden controversy ने इजराइल-अमेरिका रिश्तों को एक नए मोड़ पर ला खड़ा किया है। जहां एक ओर नेतन्याहू विदेशी सहायता पर निर्भरता कम करने और घरेलू हथियार उद्योग को मजबूत करने की बात कर रहे हैं, वहीं अमेरिका अपने समर्थन और रणनीतिक साझेदारी को लेकर अपना पक्ष रख रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह विवाद केवल बयानबाज़ी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मध्य-पूर्व की राजनीति, सैन्य सहयोग और वैश्विक शक्ति संतुलन पर इसका गहरा असर पड़ेगा।

