उत्तर प्रदेश

UP Smart Prepaid Meter पर बड़ी राहत: यूपी के बिजली उपभोक्ताओं को लौटेंगे 127 करोड़ रुपये, आयोग का बड़ा आदेश

UP Smart Prepaid Meter Refund को लेकर उत्तर प्रदेश के लाखों बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है। उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने स्पष्ट आदेश जारी करते हुए कहा है कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर के नाम पर उपभोक्ताओं से वसूली गई अतिरिक्त राशि उन्हें वापस की जाए। आयोग ने निर्देश दिया है कि 1 अप्रैल के बाद उपभोक्ताओं से वसूले गए लगभग 127 करोड़ रुपये बिजली बिलों में समायोजित कर लौटाए जाएं

यह फैसला बिजली उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि पिछले कुछ समय से स्मार्ट मीटर कनेक्शन के दौरान अतिरिक्त शुल्क वसूले जाने को लेकर शिकायतें सामने आ रही थीं।


उपभोक्ताओं की याचिका पर आयोग का बड़ा फैसला

UP Smart Prepaid Meter Refund से जुड़ा यह आदेश उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार और सदस्य संजय कुमार सिंह की पीठ ने सुनवाई के दौरान दिया।

यह मामला राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद द्वारा दायर की गई याचिका के बाद आयोग के सामने आया था। परिषद ने आरोप लगाया था कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने के नाम पर बिजली वितरण कंपनियों द्वारा उपभोक्ताओं से निर्धारित राशि से अधिक पैसे वसूले गए हैं।

आयोग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विस्तृत सुनवाई की और उपभोक्ताओं के पक्ष में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए।


बिजली बिल में समायोजित कर लौटाई जाएगी राशि

आयोग के आदेश के अनुसार UP Smart Prepaid Meter Refund के तहत वसूली गई अतिरिक्त रकम सीधे उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में समायोजित की जाएगी।

इसका मतलब है कि जिन उपभोक्ताओं से अतिरिक्त राशि ली गई है, उन्हें आगामी बिजली बिलों में उतनी राशि की राहत मिलेगी। इस फैसले से प्रदेश के लाखों उपभोक्ताओं को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।


नए कनेक्शन के दौरान वसूली गई थी अतिरिक्त रकम

सुनवाई के दौरान यह जानकारी सामने आई कि बिजली वितरण कंपनियों ने नए बिजली कनेक्शन जारी करते समय निर्धारित शुल्क से अधिक राशि वसूली थी।

बताया गया कि सिंगल फेज कनेक्शन के लिए उपभोक्ताओं से 6016 रुपये लिए गए, जबकि इसमें करीब 3216 रुपये अतिरिक्त थे।

इसी तरह थ्री फेज कनेक्शन के लिए उपभोक्ताओं से 11341 रुपये वसूले गए, जिसमें लगभग 7241 रुपये अतिरिक्त शामिल थे।

इस अतिरिक्त वसूली को उपभोक्ता परिषद ने नियमों के खिलाफ बताया था।


तीन लाख से ज्यादा नए कनेक्शन में वसूली गई अतिरिक्त राशि

UP Smart Prepaid Meter Refund मामले में यह भी सामने आया कि 10 सितंबर 2025 से 31 दिसंबर 2025 के बीच बिजली विभाग ने कुल 353357 नए बिजली कनेक्शन जारी किए थे।

इन्हीं कनेक्शनों के दौरान उपभोक्ताओं से अतिरिक्त शुल्क लिया गया, जिससे कुल राशि करीब 127 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।

आयोग ने अब इस पूरी रकम को उपभोक्ताओं को वापस करने का निर्देश दिया है।


अगली सुनवाई 11 अगस्त को होगी

आयोग ने इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख भी तय कर दी है। 11 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई में पावर कॉर्पोरेशन के निदेशक (वाणिज्य) को व्यक्तिगत रूप से आयोग के सामने उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है।

इस दौरान आयोग यह भी समीक्षा करेगा कि आदेश के अनुसार उपभोक्ताओं को राशि लौटाने की प्रक्रिया किस प्रकार लागू की जा रही है।


उपभोक्ता परिषद ने जताया आभार

UP Smart Prepaid Meter Refund आदेश के बाद राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने आयोग का आभार व्यक्त किया।

उन्होंने कहा कि यह फैसला प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के हित में एक महत्वपूर्ण कदम है। परिषद लंबे समय से इस मुद्दे को उठा रही थी और अब आयोग के आदेश से उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी।


स्मार्ट मीटर योजना पर भी बढ़ी चर्चा

स्मार्ट प्रीपेड मीटर योजना को बिजली व्यवस्था को आधुनिक बनाने के उद्देश्य से लागू किया जा रहा है। इस योजना का उद्देश्य बिजली खपत को पारदर्शी बनाना और बिलिंग व्यवस्था को बेहतर करना है।

हालांकि कई स्थानों पर उपभोक्ताओं ने अतिरिक्त शुल्क वसूले जाने और अन्य तकनीकी समस्याओं को लेकर शिकायतें भी दर्ज कराई थीं।

आयोग के इस फैसले के बाद स्मार्ट मीटर से जुड़े नियमों और शुल्क व्यवस्था पर भी व्यापक चर्चा शुरू हो गई है।


प्रदेश के लाखों उपभोक्ताओं को मिलेगी राहत

UP Smart Prepaid Meter Refund के इस आदेश को बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है। बिजली बिलों में समायोजन के माध्यम से अतिरिक्त वसूली गई राशि वापस मिलने से उपभोक्ताओं को आर्थिक फायदा होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से बिजली वितरण कंपनियों को भी भविष्य में नियमों का सख्ती से पालन करने की चेतावनी मिलेगी।


उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग के इस फैसले से प्रदेश के लाखों बिजली उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है। स्मार्ट प्रीपेड मीटर के नाम पर वसूली गई अतिरिक्त राशि को बिजली बिलों में समायोजित कर लौटाने का आदेश उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है और अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि पावर कॉर्पोरेशन इस आदेश को कितनी तेजी और पारदर्शिता के साथ लागू करता है।

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