ईरान संकट और होर्मुज तनाव के बीच Vladimir Putin की संभावित अमेरिका यात्रा, G20 शिखर सम्मेलन बना नई वैश्विक कूटनीति का मंच
ईरान पर अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई के बाद वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नए समीकरण बनने के संकेत मिलने लगे हैं। होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से तेल और गैस की आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है, जिसका असर एशिया से लेकर यूरोप तक महसूस किया जा रहा है। इसी बदलते वैश्विक परिदृश्य के बीच रूस के राष्ट्रपति Vladimir Putin की संभावित अमेरिका यात्रा ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति को नया मोड़ दे दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह यात्रा होती है तो यह यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिम और रूस के बीच संवाद बहाली की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है।
G20 शिखर सम्मेलन बना वैश्विक कूटनीतिक गतिविधियों का केंद्र
संकेत मिल रहे हैं कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इस वर्ष दिसंबर में मियामी में प्रस्तावित G20 शिखर सम्मेलन में शामिल हो सकते हैं। सम्मेलन की मेजबानी इस बार अमेरिका कर रहा है और रूस को औपचारिक रूप से आमंत्रित किया गया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की ओर से निमंत्रण मिलने के बाद मॉस्को ने इस प्रस्ताव पर विचार शुरू कर दिया है। हालांकि पुतिन की व्यक्तिगत उपस्थिति को लेकर अंतिम निर्णय अभी बाकी बताया जा रहा है।
क्रेमलिन ने दिए संकेत, लेकिन अंतिम निर्णय अभी शेष
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि रूस इस सम्मेलन को अत्यंत महत्वपूर्ण मंच के रूप में देखता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पुतिन स्वयं सम्मेलन में भाग ले सकते हैं या उनकी जगह कोई अन्य वरिष्ठ प्रतिनिधि भी रूस का प्रतिनिधित्व कर सकता है।
रूस का मानना है कि मौजूदा वैश्विक संकटों के बीच G20 जैसे बहुपक्षीय मंच संवाद और समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
यूक्रेन युद्ध के बाद सीमित रही पुतिन की अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति
गौरतलब है कि व्लादिमीर पुतिन ने आखिरी बार 2019 में आयोजित G20 शिखर सम्मेलन में भाग लिया था। इसके बाद कोविड-19 महामारी और वर्ष 2022 में यूक्रेन पर रूस की सैन्य कार्रवाई के कारण पश्चिमी देशों के साथ संबंधों में गंभीर तनाव पैदा हो गया।
इस तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर रूस की भागीदारी पर भी पड़ा और कई वैश्विक आयोजनों में उनकी उपस्थिति सीमित हो गई।
रूस को G8 से बाहर करना बताया गया गलती
इस बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस को G8 समूह से बाहर किए जाने को एक बड़ी कूटनीतिक भूल बताया है। उनका कहना है कि वैश्विक समस्याओं का समाधान संवाद और सहयोग के माध्यम से ही संभव है।
हालांकि उन्होंने यह भी संकेत दिया कि पुतिन के सम्मेलन में शामिल होने को लेकर अभी निश्चित रूप से कुछ कहना जल्दबाजी होगी।
G7 मंच को रूस ने बताया अप्रासंगिक
रूस के उप विदेश मंत्री अलेक्जेंडर पैनकिन ने पुष्टि की है कि रूस को उच्च स्तर पर भागीदारी के लिए आमंत्रित किया गया है। वहीं क्रेमलिन ने दोहराया कि G7 मंच अब रूस के लिए प्रासंगिक नहीं रह गया है और वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में इसकी भूमिका सीमित हो चुकी है।
विश्लेषकों का मानना है कि रूस अब बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था में G20 जैसे मंचों को अधिक महत्व दे रहा है।
होर्मुज स्ट्रेट संकट से ऊर्जा बाजार में बढ़ी अस्थिरता
ईरान क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव और होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित होने के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है। यह जलमार्ग दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
एशिया और यूरोप के कई देशों में तेल और गैस की कीमतों को लेकर चिंता बढ़ रही है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव की स्थिति बन सकती है।
वैश्विक शक्ति संतुलन में नए समीकरण बनने की संभावना
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पुतिन G20 शिखर सम्मेलन में शामिल होते हैं तो यह रूस और अमेरिका के बीच संवाद की नई शुरुआत का संकेत हो सकता है। यूक्रेन युद्ध के बाद दोनों देशों के संबंधों में आई दूरी को कम करने की दिशा में यह कदम अहम माना जा सकता है।
इसके अलावा पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच यह मुलाकात वैश्विक शक्ति संतुलन को भी प्रभावित कर सकती है।
अमेरिकी प्रशासन की ओर से औपचारिक निमंत्रण प्रक्रिया जारी
अमेरिकी प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार रूस G20 का सदस्य होने के नाते सभी मंत्रिस्तरीय बैठकों और नेताओं के शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया जाएगा। हालांकि औपचारिक निमंत्रण प्रक्रिया को लेकर अभी अंतिम पुष्टि नहीं की गई है।
क्रेमलिन की ओर से भी यह स्पष्ट किया गया है कि किसी भी स्थिति में सम्मेलन में रूस का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाएगा।
G20 मंच पर संभावित संवाद से वैश्विक तनाव कम होने की उम्मीद
विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय संकटों के बीच G20 जैसे मंच वैश्विक संवाद के लिए महत्वपूर्ण अवसर प्रदान कर सकते हैं। यदि अमेरिका और रूस के बीच उच्च स्तर पर बातचीत होती है तो इसका असर ऊर्जा संकट, यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया की स्थिति पर भी पड़ सकता है।

