उत्तर प्रदेश

Ghaziabad में पेंट फैक्ट्री के बाहर भीषण आग से मचा हड़कंप, केमिकल ड्रमों में लगी आग ने बढ़ाई दहशत

Ghaziabad के मेरठ रोड स्थित दुहाई स्टेशन के पास शुक्रवार दोपहर उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब मैनापुर मोरटा इलाके में स्थित एक पेंट फैक्ट्री के बाहरी हिस्से में अचानक भीषण आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही मिनटों में इलाके में धुएं का गुबार छा गया और सड़क किनारे खड़े लोगों में दहशत फैल गई। घटना के बाद आसपास के दुकानदारों और राहगीरों में भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई।

बताया जा रहा है कि आग फैक्ट्री के बाहर रखे खाली केमिकल ड्रमों और ज्वलनशील कंटेनरों में लगी, जिसने देखते ही देखते विकराल रूप ले लिया। आग की ऊंची-ऊंची लपटें दूर से दिखाई देने लगीं। राहत की बात यह रही कि समय रहते दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई और बड़ी दुर्घटना होने से बचा लिया गया।


दुहाई स्टेशन के पास धुएं का गुबार देखकर सहमे लोग

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दोपहर के समय अचानक फैक्ट्री परिसर के बाहर धुआं उठता दिखाई दिया। शुरुआत में लोगों को लगा कि शायद कचरे में आग लगी है, लेकिन कुछ ही देर में केमिकल ड्रमों ने आग पकड़ ली और लपटें तेजी से फैलने लगीं। देखते ही देखते सड़क किनारे रखा ज्वलनशील सामान भी आग की चपेट में आ गया।

स्थानीय लोगों ने बताया कि आग लगते ही इलाके में तेज बदबू और जहरीला धुआं फैलने लगा, जिससे लोगों को सांस लेने में दिक्कत महसूस होने लगी। कई राहगीरों ने तुरंत वहां से दूरी बना ली। कुछ लोगों ने घटना का वीडियो भी बनाया, जो बाद में सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगा।


फैक्ट्री बंद होने से टला बड़ा हादसा

जानकारी के अनुसार जिस समय आग लगी, उस दौरान फैक्ट्री बंद थी और कर्मचारी मौजूद नहीं थे। यही वजह रही कि किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। हालांकि फैक्ट्री के बाहर बड़ी संख्या में खाली केमिकल ड्रम, प्लास्टिक कंटेनर और अन्य ज्वलनशील सामग्री रखी हुई थी, जिसने आग को तेजी से फैलाने में अहम भूमिका निभाई।

प्राथमिक जांच में सामने आया है कि संभवतः किसी ड्रम में केमिकल लीकेज होने या अत्यधिक गर्मी की वजह से आग भड़की। चूंकि इलाके में तापमान लगातार बढ़ रहा है, इसलिए ज्वलनशील पदार्थों के संपर्क में आने से आग तेजी से फैल गई।


दमकल विभाग की 4 गाड़ियां मौके पर पहुंचीं, 30 मिनट चला रेस्क्यू ऑपरेशन

आग की सूचना मिलते ही फायर स्टेशन कंट्रोल रूम हरकत में आ गया। घंटाघर समेत आसपास के अन्य फायर स्टेशनों से तत्काल दमकल विभाग की चार गाड़ियों को घटनास्थल के लिए रवाना किया गया। दमकल कर्मियों ने मौके पर पहुंचते ही आग बुझाने का अभियान शुरू कर दिया।

सीएफओ राहुल पाल ने बताया कि आग केमिकल ड्रमों तक पहुंच चुकी थी, जिससे स्थिति काफी गंभीर हो गई थी। सामान्य पानी से आग बुझाना जोखिम भरा हो सकता था, इसलिए फोम टेंडर का इस्तेमाल किया गया। दमकल विभाग की टीम ने करीब 30 मिनट की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह नियंत्रण पा लिया।

उन्होंने बताया कि अगर आग कुछ और देर तक फैलती रहती तो आसपास स्थित दूसरी फैक्ट्रियों, दुकानों और गोदामों तक भी पहुंच सकती थी, जिससे बड़ा औद्योगिक हादसा हो सकता था।


सूखी घास और कचरे ने आग को और फैलाया

घटना स्थल के आसपास मौजूद सूखी घास, प्लास्टिक कचरा और अन्य ज्वलनशील सामग्री ने भी आग को तेजी से फैलाने में योगदान दिया। आग लगते ही सड़क किनारे का पूरा हिस्सा धुएं और लपटों से घिर गया। कुछ समय के लिए मेरठ रोड पर वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित रही।

स्थानीय नागरिकों ने आरोप लगाया कि कई फैक्ट्रियों के बाहर खुले में केमिकल ड्रम और कचरा रखा जाता है, जिससे ऐसी घटनाओं का खतरा लगातार बना रहता है। लोगों ने प्रशासन से औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा मानकों की सख्ती से जांच कराने की मांग की है।


गाजियाबाद के औद्योगिक इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

इस घटना के बाद एक बार फिर गाजियाबाद के औद्योगिक क्षेत्रों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि केमिकल और पेंट फैक्ट्रियों में ज्वलनशील पदार्थों के भंडारण के लिए विशेष सुरक्षा मानकों का पालन बेहद जरूरी होता है।

अगर फैक्ट्री परिसर के बाहर खुले में ड्रम और केमिकल कंटेनर रखे जाएं, तो गर्मी के मौसम में आग लगने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। आग लगने की घटनाएं न केवल फैक्ट्री कर्मचारियों बल्कि आसपास रहने वाले लोगों के लिए भी बड़ा खतरा बन सकती हैं।

औद्योगिक सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित फायर ऑडिट, केमिकल स्टोरेज की निगरानी और इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम को मजबूत बनाना अब बेहद जरूरी हो गया है।


जांच में जुटे अधिकारी, आग लगने के कारणों की होगी विस्तृत पड़ताल

फिलहाल दमकल विभाग और स्थानीय प्रशासन आग लगने के सटीक कारणों की जांच में जुट गया है। अधिकारियों का कहना है कि यह पता लगाया जा रहा है कि कहीं सुरक्षा मानकों में लापरवाही तो नहीं बरती गई थी।

प्रशासन द्वारा आसपास के सीसीटीवी फुटेज और फैक्ट्री परिसर की स्थिति का भी निरीक्षण किया जा रहा है। प्रारंभिक तौर पर किसी साजिश की आशंका नहीं जताई गई है, लेकिन तकनीकी जांच के बाद ही वास्तविक कारण स्पष्ट हो पाएगा।


गर्मी बढ़ते ही बढ़ रहा आग लगने का खतरा, प्रशासन ने जारी की सावधानी की अपील

विशेषज्ञों का कहना है कि भीषण गर्मी और हीटवेव के दौरान केमिकल, प्लास्टिक और ज्वलनशील पदार्थों में आग लगने का खतरा काफी बढ़ जाता है। ऐसे में फैक्ट्री संचालकों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता है।

दमकल विभाग ने लोगों से अपील की है कि ज्वलनशील सामग्री को खुले में न रखें और आग लगने की स्थिति में तुरंत फायर कंट्रोल रूम को सूचना दें। साथ ही औद्योगिक क्षेत्रों में फायर सेफ्टी उपकरणों को हमेशा सक्रिय स्थिति में रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।


गाजियाबाद के दुहाई इलाके में पेंट फैक्ट्री के बाहर लगी आग ने एक बार फिर औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था और केमिकल स्टोरेज को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राहत की बात यह रही कि दमकल विभाग की तत्परता से समय रहते आग पर काबू पा लिया गया और कोई जनहानि नहीं हुई। हालांकि इस घटना ने यह साफ कर दिया है कि बढ़ती गर्मी के बीच फैक्ट्री परिसरों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।

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