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Muzaffarnagar के सिद्धपीठ शनि धाम में उमड़ा आस्था का सैलाब, शनि जयंती और वट अमावस्या पर भक्तों ने मांगी सुख-समृद्धि की मन्नतें

Muzaffarnagar के चरथावल मोड़ स्थित सिद्ध पीठ श्री शनि धाम मंदिर में शनि जयंती, वट अमावस्या और शनिचरी अमावस्या के पावन अवसर पर श्रद्धा, भक्ति और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। भक्तों ने भगवान शनिदेव की पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि, परिवार की रक्षा और जीवन में शांति की कामना की।

मंदिर परिसर को इस विशेष अवसर पर बेहद आकर्षक ढंग से सजाया गया था। रंग-बिरंगी रोशनी, फूलों की सजावट और धार्मिक भजनों से पूरा वातावरण भक्तिमय बना हुआ था। मंदिर के बाहर सड़क तक श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भगवान शनिदेव के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।


सुंदरकांड पाठ से हुई कार्यक्रम की शुरुआत

कार्यक्रम की शुरुआत प्रातःकाल सुंदरकांड पाठ के साथ हुई। मानव कल्याण परिषद के प्रेम प्रकाश अरोड़ा और उनकी टीम द्वारा सामूहिक रूप से सुंदरकांड का पाठ किया गया, जिसने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।

भक्तजन भक्ति गीतों और हनुमान चालीसा के साथ भगवान शनिदेव का गुणगान करते नजर आए। धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था।


31 यजमानों ने किया विशेष अभिषेक, घी-नील-दूध और शहद से कराया स्नान

इस विशेष आयोजन में मुख्य यजमान के रूप में सुनील गोयल डेरी वाले उपस्थित रहे। धार्मिक कार्यक्रम के दौरान 31 यजमानों ने सामूहिक रूप से भगवान शनिदेव का विशेष अभिषेक किया।

भगवान शनिदेव को घी, नील, दूध, बूरा और शहद से स्नान कराया गया। इसके बाद श्रद्धालुओं ने तेल अर्पित कर पूजा-अर्चना की। मान्यता है कि शनिदेव को तेल अर्पित करने से शनि दोषों से राहत मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

पूरे अनुष्ठान के दौरान मंदिर परिसर “जय शनिदेव” के जयकारों से गूंजता रहा। श्रद्धालुओं ने पूरे विधि-विधान से पूजा संपन्न कर अपने परिवार और समाज की खुशहाली की कामना की।


महा आरती और छप्पन भोग ने बनाया माहौल भक्तिमय

विशेष पूजा-अर्चना के बाद मंदिर में भव्य महा आरती आयोजित की गई। आरती के दौरान सैकड़ों श्रद्धालु एक साथ दीप जलाकर भगवान शनिदेव की स्तुति करते दिखाई दिए। मंदिर परिसर में मौजूद भक्तों ने घंटों और शंखनाद के बीच आरती में भाग लिया।

इसके बाद भगवान शनिदेव को छप्पन भोग का प्रसाद अर्पित किया गया। प्रसाद में विभिन्न प्रकार के मिष्ठान, फल और पारंपरिक व्यंजन शामिल थे। धार्मिक आयोजन के बाद विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।


13 वर्षों बाद बना दुर्लभ संयोग, गुरुजी ने बताया विशेष महत्व

मंदिर परिसर में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए सिद्ध पीठ वाले गुरुजी Pandit Sanjay Kumar ने बताया कि लगभग 13 वर्षों बाद ऐसा दुर्लभ संयोग बना है, जब शनि जयंती, शनिचरी अमावस्या और वट अमावस्या एक ही दिन शनिवार को पड़ी हैं।

उन्होंने कहा कि धार्मिक दृष्टि से यह अत्यंत शुभ और प्रभावशाली योग माना जाता है। उनका कहना था कि इस विशेष संयोग का लाभ भगवान शनिदेव के भक्तों को आध्यात्मिक और पारिवारिक रूप से मिलेगा।

उन्होंने विशेष रूप से सुहागन महिलाओं से वट अमावस्या पर व्रत और पूजा-अर्चना करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए वट वृक्ष की पूजा कर भगवान शनिदेव से आशीर्वाद मांगती हैं।


धार्मिक अनुष्ठानों में विद्वान पंडितों ने निभाई भूमिका

शनि जयंती के अवसर पर आयोजित सभी धार्मिक अनुष्ठानों और पूजन कार्यक्रमों को पंडित केशवानंद, पंडित संजय कुमार मिश्रा, पंडित संतोष मिश्रा और शिव मिश्रा द्वारा विधिवत संपन्न कराया गया।

पूरे कार्यक्रम के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक विधानों का विशेष ध्यान रखा गया। श्रद्धालुओं ने भी पूरे श्रद्धाभाव के साथ पूजा में भाग लेकर धार्मिक परंपराओं का पालन किया।


सेवा कार्यों में युवाओं और समिति सदस्यों का रहा विशेष योगदान

कार्यक्रम के सफल आयोजन में मंदिर प्रबंध समिति और सेवा कार्यकर्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही। प्रबंध समिति की ओर से ललित मोहन शर्मा, शरद कपूर, नरेंद्र पवार, मुकेश चौहान, लक्ष्मी नारायण शर्मा, संदीप मित्तल, शैलेंद्र विश्वकर्मा और विपिन ढींगरा सहित कई सदस्यों ने व्यवस्थाओं को संभाला।

वहीं सेवा कार्यों में आशीष, अनमोल, सतीश, राकेश कुमार और नीतू भारद्वाज का उल्लेखनीय योगदान रहा। श्रद्धालुओं के लिए पेयजल, प्रसाद वितरण और लाइन व्यवस्था को लेकर विशेष इंतजाम किए गए थे।


मंदिर परिसर में देर शाम तक चलता रहा श्रद्धालुओं का आगमन

शनि जयंती और वट अमावस्या के अवसर पर सुबह से लेकर देर शाम तक श्रद्धालुओं का आगमन लगातार जारी रहा। कई श्रद्धालु परिवार सहित मंदिर पहुंचे और शनिदेव के दर्शन कर विशेष पूजा कराई।

मंदिर परिसर में सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्वयंसेवकों की टीम लगातार सक्रिय रही। धार्मिक भजनों और मंत्रोच्चार से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।


शनि जयंती का धार्मिक महत्व, क्यों विशेष माना जाता है यह दिन

हिंदू धर्म में शनि जयंती का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान शनिदेव का जन्म हुआ था। श्रद्धालु इस दिन उपवास रखकर शनिदेव की पूजा करते हैं और शनि दोषों से मुक्ति की कामना करते हैं।

वहीं वट अमावस्या सुहागन महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। इस दिन महिलाएं वट वृक्ष की पूजा कर अखंड सौभाग्य और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करती हैं।


Muzaffarnagar के सिद्ध पीठ श्री शनि धाम मंदिर में आयोजित शनि जयंती और वट अमावस्या का यह धार्मिक आयोजन श्रद्धा, आस्था और सामाजिक एकता का अद्भुत उदाहरण बनकर सामने आया। हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी, विशेष पूजा-अर्चना, सुंदरकांड पाठ और विशाल भंडारे ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय वातावरण से भर दिया। 13 वर्षों बाद बने इस दुर्लभ धार्मिक संयोग को लेकर भक्तों में विशेष उत्साह देखने को मिला और लोगों ने भगवान शनिदेव से सुख-समृद्धि एवं परिवार की खुशहाली की कामना की।

 

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