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फ्रांस में पूर्व बैंक मैनेजर को 25 साल की जेल: गर्लफ्रेंड को 7 साल तक हिंसा, Sexual Exploitation और देह व्यापार के लिए किया मजबूर

फ्रांस में महिलाओं के खिलाफ हिंसा और Sexual Exploitation से जुड़े एक बेहद सनसनीखेज मामले में अदालत ने 51 वर्षीय पूर्व बैंक मैनेजर गिलौम बुची को 25 साल की सजा सुनाई है। आरोपी पर अपनी पार्टनर को कई वर्षों तक मानसिक, शारीरिक और यौन प्रताड़ना देने, उसे जबरन देह व्यापार में धकेलने और हिंसक परिस्थितियों में रखने के गंभीर आरोप साबित हुए।

करीब सात वर्षों तक चले इस कथित उत्पीड़न की सुनवाई ने पूरे फ्रांस को झकझोर कर रख दिया। अदालत में पीड़िता 42 वर्षीय लेटेसिया आर ने जो बयान दिए, उन्होंने समाज, कानून व्यवस्था और महिला सुरक्षा को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

चार घंटे से अधिक चली बहस के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी मानते हुए 25 साल जेल की सजा सुनाई। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आरोपी कम से कम अपनी दो-तिहाई सजा पूरी करने के बाद ही पैरोल के लिए आवेदन कर सकेगा।


‘सेक्स गेम’ के बहाने शुरू हुआ नियंत्रण, फिर बना हिंसा और शोषण का जाल

पीड़िता लेटेसिया आर ने अदालत में बताया कि शुरुआत में आरोपी ने “सेक्स गेम” और निजी रिश्तों की आड़ लेकर धीरे-धीरे उन पर मानसिक नियंत्रण स्थापित करना शुरू किया। शुरुआत में उन्हें लगा कि यह आपसी सहमति और निजी पसंद का हिस्सा है, लेकिन समय के साथ हालात बेहद खतरनाक और हिंसक होते चले गए।

पीड़िता के अनुसार आरोपी उन्हें अपने दोस्तों, सहकर्मियों और अजनबियों के साथ यौन संबंध बनाने के लिए मजबूर करता था। इतना ही नहीं, वह ग्राहकों की सूची तैयार करवाता और पैसों का बड़ा हिस्सा खुद रखता था।

लेटेसिया ने अदालत में कहा कि वह “487 पुरुषों के बाद गिनती करना बंद कर चुकी थीं।” उन्होंने बताया कि कई लोगों से उन्हें बार-बार मिलना पड़ता था और यह सब भय, दबाव और हिंसा के माहौल में होता था।


हाईवे और रेलवे स्टेशन के पास अजनबियों से मिलने को किया मजबूर

पीड़िता ने बताया कि यह सिलसिला 2015 में क्रिसमस के समय शुरू हुआ था। आरोपी ने पहली बार उन्हें हाईवे के पास एक सर्विस स्टेशन पर दूसरे व्यक्ति के साथ संबंध बनाने के लिए मजबूर किया।

इसके बाद उन्हें रेलवे स्टेशन, हाईवे और सुनसान इलाकों में अलग-अलग पुरुषों से मिलने भेजा जाता था। लेटेसिया के अनुसार कई बार एक दिन में 14 लोगों तक से मिलने के लिए मजबूर किया गया।

उन्होंने अदालत में कहा कि शुरुआत में उन्हें लगा था कि यदि कोई स्थिति असहज होगी तो वे इनकार कर पाएंगी, लेकिन जैसे-जैसे समय बीता, हिंसा और धमकियां बढ़ती गईं।


इनकार करने पर मारपीट, गला दबाना और जान से मारने की धमकी

मामले की सुनवाई के दौरान सामने आया कि आरोपी केवल मानसिक दबाव ही नहीं बनाता था, बल्कि शारीरिक हिंसा का भी सहारा लेता था।

पीड़िता ने बताया कि जब भी वह किसी बात से इनकार करती थीं तो आरोपी उन्हें मुक्कों और लातों से पीटता था। अदालत में प्रस्तुत रिकॉर्डिंग्स और संदेशों में आरोपी द्वारा जान से मारने की धमकियां देने के सबूत भी सामने आए।

सरकारी वकीलों ने कोर्ट में ऐसे वॉइस रिकॉर्डिंग और संदेश पेश किए, जिनसे यह स्पष्ट हुआ कि महिला भय और दबाव में यह सब सहने को मजबूर थी।


बेटी के जन्म के अगले दिन भी बनाया गया शोषण का शिकार

इस मामले का सबसे दर्दनाक पहलू वह घटना रही, जिसमें पीड़िता ने बताया कि 2017 में बेटी के जन्म के बाद अस्पताल से छुट्टी मिलने के अगले ही दिन उन्हें एक ट्रक ड्राइवर के साथ संबंध बनाने के लिए मजबूर किया गया।

लेटेसिया चार बच्चों की मां हैं। हालांकि अदालत में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि उनके कितने बच्चे उस दौरान आरोपी के साथ रह रहे थे।

पीड़िता के बयान ने अदालत में मौजूद लोगों को भावुक कर दिया। कई मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इस घटना को “मानवता को शर्मसार करने वाला मामला” बताया।


अदालत में सामने आए बेहद क्रूर अत्याचारों के आरोप

सुनवाई के दौरान आरोपी गिलौम बुची ने कई गंभीर और विकृत गतिविधियों को स्वीकार किया, जिनमें गला दबाना, शरीर जलाना और अन्य अमानवीय यौन व्यवहार शामिल थे। हालांकि उसने दावा किया कि यह सब “आपसी सहमति” से हो रहा था।

लेकिन अभियोजन पक्ष ने अदालत में जो सबूत पेश किए, उन्होंने आरोपी के दावों को कमजोर कर दिया। एक ऑडियो रिकॉर्डिंग में पीड़िता की चीखें और रोने की आवाजें सुनाई दीं, जबकि कथित रूप से एक ग्राहक उसे बेल्ट, लकड़ी के तख्ते और छड़ी से मार रहा था।

जांचकर्ताओं के मुताबिक जिस लकड़ी के पैडल का इस्तेमाल किया गया था, उस पर खून के निशान भी पाए गए। अदालत में पीड़िता के सूजे हुए चेहरे और चोटों की तस्वीरें भी दिखाई गईं।


महिला अधिकारों की बहस के केंद्र में आया मामला

यह मामला फ्रांस में महिलाओं की सुरक्षा, यौन हिंसा और न्याय प्रणाली को लेकर नई बहस का कारण बन गया है। कई महिला अधिकार संगठनों ने कहा कि यह मामला दिखाता है कि किस तरह मानसिक नियंत्रण और भय का इस्तेमाल कर लंबे समय तक किसी व्यक्ति का शोषण किया जा सकता है।

पीड़िता ने मुकदमे की बंद कमरे में सुनवाई की मांग ठुकरा दी। उन्होंने कहा कि उन्हें अपनी कहानी सार्वजनिक करने की प्रेरणा फ्रांस के चर्चित गिसेल पेलिकॉट मामले से मिली।

गिसेल पेलिकॉट वही महिला हैं, जिनके पति पर आरोप था कि उसने नशीला पदार्थ देकर अजनबियों से उनका दुष्कर्म करवाया। वह मामला 2024 में दुनिया भर में सुर्खियों में रहा था और बाद में गिसेल महिला अधिकारों की प्रतीक बन गईं।


दूसरे आरोपियों पर कार्रवाई नहीं होने पर उठे सवाल

इस मामले में एक बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि उन अन्य पुरुषों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई, जो कथित रूप से पीड़िता के शोषण में शामिल थे।

पीड़िता के वकील फिलिप-आनरी ओनेगर के अनुसार सभी लोगों की पहचान करना बेहद जटिल और लंबी प्रक्रिया थी। उनका कहना था कि अगर हर आरोपी को शामिल किया जाता तो मुकदमा वर्षों तक खिंच सकता था और मुख्य आरोपी को हिरासत से बाहर आने का मौका मिल सकता था।

हालांकि महिला अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि जांच एजेंसियों को अन्य आरोपियों की पहचान के लिए भी पूरी कोशिश करनी चाहिए थी।


फ्रांस में बढ़ रही घरेलू और यौन हिंसा पर नई चर्चा

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल एक आपराधिक घटना नहीं बल्कि घरेलू हिंसा, मानसिक नियंत्रण और यौन शोषण के जटिल रूपों को समझने का भी उदाहरण है।

कई मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि लंबे समय तक हिंसा और धमकी का सामना करने वाले पीड़ित अक्सर मानसिक रूप से इतने दबाव में आ जाते हैं कि वे विरोध करने की स्थिति में नहीं रह पाते।

फ्रांस में हाल के वर्षों में महिलाओं के खिलाफ अपराधों को लेकर कानून और जागरूकता दोनों स्तरों पर काफी चर्चा बढ़ी है। इस मामले ने एक बार फिर समाज को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि मानसिक और यौन शोषण के मामलों में पीड़ितों को किस तरह सहायता और सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए।


फ्रांस की अदालत में सुनाया गया यह फैसला केवल एक आरोपी को दी गई सजा भर नहीं माना जा रहा, बल्कि यह महिलाओं के खिलाफ हिंसा और मानसिक नियंत्रण जैसे गंभीर मुद्दों पर समाज के लिए बड़ा संदेश भी बनकर सामने आया है। पीड़िता लेटेसिया आर की खुलकर सामने आने की हिम्मत ने इस संवेदनशील मामले को अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय बना दिया है। वहीं यह मामला न्याय व्यवस्था, महिला सुरक्षा और मानवाधिकारों को लेकर कई नए सवाल भी छोड़ गया है।

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