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‘ट्रम्पवाद दुनिया को पीछे धकेल रहा’, इतिहासकार Yuval Noah Harari का बड़ा हमला; नेतन्याहू पर भी लगाए गंभीर आरोप

दुनिया के चर्चित इतिहासकार, विचारक और लेखक Yuval Noah Harari ने वैश्विक राजनीति, राष्ट्रवाद, युद्ध और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर कई तीखी और गंभीर टिप्पणियां की हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए गए एक विस्तृत इंटरव्यू में हरारी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की नीतियों की खुलकर आलोचना की।

हरारी ने कहा कि दुनिया तेजी से ऐसी राजनीति की ओर बढ़ रही है जहां सहयोग और मानवता की जगह ताकत, दबदबा और भय को महत्व दिया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यही सोच आगे बढ़ती रही, तो इंसानी सभ्यता को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

उन्होंने विशेष रूप से ट्रम्पवाद और दक्षिणपंथी राष्ट्रवादी राजनीति को लेकर चिंता जताई और कहा कि यह सोच दुनिया को जोड़ने के बजाय बांट रही है।


नेतन्याहू पर हरारी का बड़ा हमला, बोले- इजराइल को अंदर से बांट दिया

इंटरव्यू के दौरान युवाल नोआ हरारी ने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर बेहद कड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा कि इजराइल के इतिहास में शायद ही कोई ऐसा नेता हुआ हो जिसने समाज को नेतन्याहू जितना भीतर से विभाजित किया हो।

हरारी के मुताबिक नेतन्याहू की राजनीति ने इजराइल के लोगों को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा कर दिया है। उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र के लिए बाहरी दुश्मनों से ज्यादा खतरनाक अंदरूनी विभाजन होता है।

हरारी का मानना है कि राष्ट्रवाद का उद्देश्य लोगों को जोड़ना होना चाहिए, लेकिन आधुनिक राजनीतिक ध्रुवीकरण समाज को तोड़ने का काम कर रहा है। उन्होंने इजराइल का उदाहरण देते हुए कहा कि जब राजनीति नफरत और विभाजन पर आधारित हो जाती है, तो लोकतंत्र कमजोर पड़ने लगता है।


‘ट्रम्पवाद ताकत की राजनीति को बढ़ावा देता है’

युवाल नोआ हरारी ने अमेरिकी राजनीति और ट्रम्पवाद पर भी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि ट्रम्प और उनके जैसे नेताओं की सोच यह है कि कमजोर देशों को हमेशा ताकतवर देशों के सामने झुक जाना चाहिए। उनके अनुसार यह सोच न केवल अनैतिक है बल्कि बेहद खतरनाक और मूर्खतापूर्ण भी है।

हरारी ने कहा कि अगर दुनिया केवल ताकत और सैन्य दबदबे के आधार पर चलेगी, तो हर देश हथियारों की दौड़ में शामिल हो जाएगा। इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था, सामाजिक विकास और मानवीय सहयोग को गहरा नुकसान पहुंचेगा।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि इस सोच के मुताबिक अगर कोई शक्तिशाली देश किसी कमजोर देश से कोई क्षेत्र मांगता है, तो कमजोर देश को संघर्ष से बचने के लिए उसे मान लेना चाहिए। हरारी ने कहा कि ऐसी मानसिकता दुनिया में स्थायी शांति नहीं बल्कि स्थायी भय पैदा करती है।


‘मानव सभ्यता की सबसे बड़ी ताकत सहयोग है’

‘सेपियंस’ और ‘होमो डियस’ जैसी विश्वप्रसिद्ध किताबों के लेखक युवाल नोआ हरारी ने कहा कि इंसानों की असली ताकत उनकी शारीरिक शक्ति नहीं बल्कि सहयोग करने की क्षमता है।

उन्होंने कहा कि अकेला इंसान न तो जंगल के खतरनाक जानवरों से लड़ सकता है और न ही विशाल सभ्यताएं बना सकता है। लेकिन करोड़ों लोग मिलकर कानून, विज्ञान, तकनीक, अर्थव्यवस्था और समाज का निर्माण कर सकते हैं।

हरारी ने कहा कि मानव इतिहास की सबसे बड़ी उपलब्धि यह नहीं है कि इंसान लड़ना जानता है, बल्कि यह है कि इंसान बड़े पैमाने पर एक-दूसरे पर भरोसा करना सीख गया।

उनके मुताबिक अगर केवल ताकत ही सबसे महत्वपूर्ण होती, तो आज भी इंसान छोटे-छोटे शिकारी समूहों में जीवन बिता रहा होता।


हरारी बोले- डर और हिंसा से लंबे समय तक सभ्यता नहीं चलती

हरारी ने कहा कि किसी भी बड़े समाज को केवल डर और हिंसा के सहारे लंबे समय तक नहीं चलाया जा सकता। समाज को टिकाए रखने के लिए साझा विश्वास, सहयोग और सामाजिक जिम्मेदारी जरूरी होती है।

उन्होंने कहा कि आधुनिक राष्ट्र इसलिए मजबूत बने क्योंकि लोगों ने अपने व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर सामूहिक व्यवस्था को स्वीकार किया। लोग टैक्स देते हैं, कानून मानते हैं और समाज के कमजोर वर्गों की मदद करते हैं, क्योंकि उन्हें राष्ट्र के विचार पर भरोसा होता है।

हरारी ने कहा कि जब राजनीति लोगों के बीच भरोसे को कमजोर करने लगती है, तब समाज धीरे-धीरे टूटने लगता है।


राष्ट्रवाद पर हरारी की अलग सोच, बोले- यह नफरत नहीं अपनापन है

राष्ट्रवाद को लेकर भी युवाल नोआ हरारी ने एक संतुलित दृष्टिकोण रखा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रवाद अपने मूल रूप में नफरत नहीं बल्कि अपनापन और साझा जिम्मेदारी की भावना है।

हरारी के अनुसार राष्ट्रवाद का असली अर्थ यह है कि करोड़ों अनजान लोग भी एक-दूसरे के लिए त्याग करने को तैयार रहते हैं। यही कारण है कि लोग अपने देश के लिए टैक्स देते हैं, सेना में सेवा करते हैं और संकट के समय एक-दूसरे का साथ देते हैं।

उन्होंने कहा कि भारत, चीन, अमेरिका या इजराइल जैसे बड़े देशों में रहने वाले अधिकांश लोग एक-दूसरे को व्यक्तिगत रूप से नहीं जानते, फिर भी वे एक राष्ट्रीय पहचान के जरिए जुड़े रहते हैं।

हालांकि हरारी ने चेतावनी दी कि जब राष्ट्रवाद नफरत और ध्रुवीकरण में बदल जाता है, तब यह समाज के लिए खतरनाक बन सकता है।


‘आज के कई राष्ट्रवादी अपने ही समाज को बांट रहे’

हरारी ने कहा कि आज दुनिया में कई ऐसे नेता हैं जो खुद को राष्ट्रवाद का सबसे बड़ा समर्थक बताते हैं, लेकिन वास्तव में वे अपने ही समाज में विभाजन पैदा कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि बाहरी दुश्मनों से ज्यादा खतरनाक वह राजनीति होती है जो नागरिकों को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा कर दे। उनके मुताबिक किसी भी राष्ट्र की असली ताकत उसकी आंतरिक एकता होती है, न कि केवल उसकी सैन्य शक्ति।


AI को बताया आने वाले समय का सबसे बड़ा खतरा

इंटरव्यू के दौरान युवाल नोआ हरारी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि AI आने वाले समय में परमाणु हथियारों से भी बड़ा खतरा साबित हो सकता है।

हरारी ने कहा कि परमाणु बम केवल एक हथियार होता है, जबकि AI खुद फैसले लेने और इंसानों को प्रभावित करने की क्षमता विकसित कर रहा है।

उन्होंने चेतावनी दी कि AI इंसानों की भावनाओं की नकल करना सीख रहा है। वह प्यार, सहानुभूति और दोस्ती जैसी चीजों को प्रदर्शित कर सकता है, जबकि वास्तव में उसके पास कोई वास्तविक भावना नहीं होती।

हरारी के अनुसार भविष्य में बच्चे और युवा इंसानों से ज्यादा AI आधारित साथियों के साथ समय बिताने लग सकते हैं, जिससे असली मानवीय रिश्ते कमजोर हो सकते हैं।


‘अगर AI को कानूनी ताकत मिली तो इंसान नियंत्रण खो सकता है’

हरारी ने यह भी कहा कि आने वाले वर्षों में अगर AI आधारित सिस्टम्स को कंपनियों या संस्थाओं जैसी कानूनी शक्तियां मिलने लगीं, तो इंसान उनके ऊपर नियंत्रण खो सकता है।

उन्होंने चेतावनी दी कि तकनीक की रफ्तार इतनी तेज है कि सरकारें और समाज अभी उसके प्रभावों को पूरी तरह समझ भी नहीं पाए हैं। ऐसे में AI को नियंत्रित करने के लिए वैश्विक स्तर पर सहयोग और नियमों की आवश्यकता होगी।


दुनिया की राजनीति पर हरारी की टिप्पणी क्यों हो रही चर्चा में

युवाल नोआ हरारी की टिप्पणियां इसलिए भी चर्चा में हैं क्योंकि वे दुनिया के सबसे प्रभावशाली विचारकों और लेखकों में गिने जाते हैं। उनकी किताबें ‘Sapiens’, ‘Homo Deus’ और ‘21 Lessons for the 21st Century’ दुनिया भर में करोड़ों प्रतियां बेच चुकी हैं।

वे इजराइल की हिब्रू यूनिवर्सिटी में इतिहास के प्रोफेसर हैं और मानव इतिहास, युद्ध, तकनीक और भविष्य की राजनीति पर उनके विचारों को गंभीरता से सुना जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रम्पवाद, राष्ट्रवाद और AI पर हरारी की टिप्पणियां आने वाले समय की वैश्विक बहसों को और तेज कर सकती हैं।


युवाल नोआ हरारी के ताजा बयान ऐसे समय सामने आए हैं जब दुनिया राजनीतिक ध्रुवीकरण, युद्ध, तकनीकी बदलाव और AI क्रांति के दौर से गुजर रही है। सहयोग बनाम ताकत, राष्ट्रवाद बनाम विभाजन और तकनीक बनाम मानव नियंत्रण जैसी बहसें अब केवल अकादमिक मुद्दे नहीं रह गई हैं, बल्कि वैश्विक राजनीति और समाज के भविष्य को तय करने वाले सवाल बन चुकी हैं। हरारी की चेतावनियां इस बात की ओर इशारा करती हैं कि आने वाले वर्षों में दुनिया को केवल आर्थिक या सैन्य शक्ति नहीं, बल्कि संतुलन, सहयोग और मानवीय मूल्यों की भी सबसे ज्यादा जरूरत होगी।

 

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