Hardoi में गंगा नदी बनी काल: भैंस चराने गए दो मासूम गहरे पानी में डूबे, 4 घंटे बाद मिले शव?












Hardoi की एक हृदयविदारक घटना ने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया। हरदोई जिले के अरवल थाना क्षेत्र में गंगा नदी में नहाने और भैंस चराने गए दो मासूम बच्चों की डूबने से मौत हो गई। चार घंटे तक चले रेस्क्यू अभियान के बाद दोनों बच्चों के शव बरामद किए गए। घटना के बाद परिवारों में कोहराम मच गया, जबकि पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।
बताया जा रहा है कि दोनों बच्चे शनिवार शाम अपने गांव के पास गंगा नदी किनारे गए थे। किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही देर में यह सामान्य दिन एक बड़े हादसे में बदल जाएगा।
भैंस चराने गए थे बच्चे, अचानक गहरे पानी में चले गए
जानकारी के अनुसार दहेलिया गांव निवासी 10 वर्षीय कृष्णा पुत्र बृजपाल और 8 वर्षीय ध्रुव पुत्र रामशंकर शनिवार शाम भैंस चराने के लिए गांव के नजदीक गंगा नदी के किनारे पहुंचे थे।
परिजनों और ग्रामीणों के अनुसार दोनों बच्चे अक्सर गांव के आसपास ही पशु चराने जाते थे। इसी दौरान वे नदी के पास पहुंच गए। माना जा रहा है कि नहाने या पानी के किनारे खेलने के दौरान उनका संतुलन बिगड़ गया और वे गहरे पानी में चले गए।
नदी में पानी की गहराई अधिक होने के कारण दोनों बच्चे खुद को संभाल नहीं सके और देखते ही देखते पानी में समा गए।
ग्रामीणों ने शुरू की तलाश, मौके पर पहुंची पुलिस
जब काफी देर तक दोनों बच्चे दिखाई नहीं दिए तो आसपास मौजूद लोगों को चिंता हुई। ग्रामीणों ने उनकी तलाश शुरू की, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंच गए। नदी किनारे बड़ी संख्या में ग्रामीण भी एकत्र हो गए। बच्चों के परिजन बदहवास हालत में घटनास्थल पर पहुंच गए और अपने बच्चों की तलाश के लिए गुहार लगाने लगे।
मौके का माहौल बेहद भावुक हो गया था। परिवार के सदस्य लगातार बच्चों के सुरक्षित मिलने की उम्मीद लगाए हुए थे।
चार घंटे तक चला रेस्क्यू ऑपरेशन
घटना की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय गोताखोरों को तुरंत बुलाया गया। गोताखोरों ने नदी में उतरकर बच्चों की तलाश शुरू की।
गंगा नदी में तेज बहाव और अधिक गहराई के कारण खोज अभियान आसान नहीं था। गोताखोर लगातार कई घंटे तक नदी में तलाश करते रहे। स्थानीय प्रशासन और ग्रामीण भी अभियान में सहयोग करते रहे।
करीब चार घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद दोनों बच्चों के शव नदी से बरामद किए गए। शव मिलने की सूचना मिलते ही परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।
मासूमों की मौत से गांव में छाया शोक
कृष्णा और ध्रुव की मौत की खबर पूरे गांव में फैलते ही शोक का माहौल बन गया। दोनों बच्चे स्थानीय स्कूल में पढ़ाई करते थे। कृष्णा कक्षा पांच का छात्र था, जबकि ध्रुव कक्षा चार में पढ़ता था।
ग्रामीणों ने बताया कि दोनों बच्चे बेहद चंचल और मिलनसार स्वभाव के थे। उनकी असमय मौत ने पूरे गांव को झकझोर दिया है।
गांव में हर तरफ सिर्फ इसी घटना की चर्चा होती रही। पड़ोसी और रिश्तेदार परिवारों को सांत्वना देने के लिए उनके घर पहुंचते रहे।
नायब तहसीलदार ने लिया घटनास्थल का जायजा
घटना की जानकारी मिलने के बाद नायब तहसीलदार राजेश पटेल भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने घटनास्थल का निरीक्षण किया और परिजनों से पूरी घटना की जानकारी ली।
अधिकारियों ने परिवारों को हर संभव प्रशासनिक सहायता का भरोसा दिलाया। साथ ही घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जानकारी जुटाई गई।
पोस्टमार्टम के लिए भेजे गए शव
पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए दोनों बच्चों के शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
अधिकारियों का कहना है कि आवश्यक कार्रवाई पूरी की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद औपचारिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।
नदी किनारे बच्चों की सुरक्षा को लेकर फिर उठे सवाल
इस हादसे ने एक बार फिर नदी और तालाबों के आसपास बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर बच्चे पशु चराने या खेलने के दौरान जलस्रोतों के पास पहुंच जाते हैं, जहां थोड़ी सी असावधानी भी जानलेवा साबित हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नदी किनारे चेतावनी संकेत, खतरनाक क्षेत्रों की पहचान और बच्चों को जल सुरक्षा के प्रति जागरूक करना बेहद जरूरी है। गर्मी के मौसम में नदियों और जलाशयों के आसपास अतिरिक्त सतर्कता की आवश्यकता होती है।
परिजनों पर टूटा दुखों का पहाड़
एक ही गांव के दो मासूम बच्चों की मौत ने दोनों परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। जिन घरों में कुछ घंटे पहले बच्चों की किलकारियां गूंज रही थीं, वहां अब मातम पसरा हुआ है।
परिजनों का कहना है कि उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि भैंस चराने गए बच्चे वापस कभी घर नहीं लौटेंगे। गांव के बुजुर्गों और स्थानीय लोगों ने परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की है।






