Gilgit-Baltistan चुनाव पर भारत का सख्त रुख: ‘अवैध कब्जे वाले क्षेत्र में मतदान पूरी तरह अस्वीकार्य’, विदेश मंत्रालय का बड़ा बयान












Gilgit-Baltistan Elections 2026 को लेकर भारत ने एक बार फिर अपना स्पष्ट और सख्त रुख सामने रखा है। पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र में 7 जून को प्रस्तावित विधानसभा चुनावों पर भारत ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को जारी अपने आधिकारिक बयान में कहा कि जिस क्षेत्र पर पाकिस्तान ने अवैध और जबरन कब्जा कर रखा है, वहां किसी भी प्रकार की राजनीतिक प्रक्रिया या चुनाव कराना पूरी तरह अस्वीकार्य है।
भारत ने दोहराया कि पूरा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख, जिसमें गिलगित-बाल्टिस्तान भी शामिल है, देश का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। ऐसे में पाकिस्तान को वहां चुनाव कराने या किसी भी तरह की प्रशासनिक गतिविधि चलाने का कोई अधिकार नहीं है।
विदेश मंत्रालय का स्पष्ट संदेश: चुनाव जमीनी सच्चाई नहीं बदल सकते
विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि पाकिस्तान द्वारा बार-बार आयोजित किए जाने वाले चुनाव या अन्य राजनीतिक गतिविधियां उस क्षेत्र की वास्तविक स्थिति को नहीं बदल सकतीं। भारत का मानना है कि गिलगित-बाल्टिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले अन्य क्षेत्रों पर उसका दावा ऐतिहासिक, संवैधानिक और कानूनी रूप से कायम है।
बयान में यह भी कहा गया कि भारत ऐसे सभी प्रयासों को अस्वीकार करता है, जिनके माध्यम से पाकिस्तान इन क्षेत्रों में अपने नियंत्रण को वैध ठहराने की कोशिश करता है।
यह कोई पहला अवसर नहीं है जब भारत ने गिलगित-बाल्टिस्तान या पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में आयोजित होने वाली राजनीतिक गतिविधियों पर आपत्ति जताई हो। अतीत में भी हर चुनाव और प्रशासनिक बदलाव के दौरान भारत ने इसी प्रकार अपना विरोध दर्ज कराया है।
7 जून को 24 सीटों पर मतदान, 10 जिलों में चुनावी गतिविधियां तेज
गिलगित-बाल्टिस्तान में रविवार 7 जून को विधानसभा चुनाव के लिए मतदान कराया जाएगा। चुनाव के तहत 10 जिलों में कुल 24 सीटों पर वोट डाले जाएंगे।
यह क्षेत्र भौगोलिक रूप से रणनीतिक महत्व रखता है और भारत इसे अपने केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख का हिस्सा मानता है। हालांकि वर्तमान में यह पाकिस्तान के नियंत्रण में है, जिसके कारण इस क्षेत्र की राजनीतिक गतिविधियां हमेशा भारत-पाकिस्तान संबंधों के संदर्भ में चर्चा का विषय बनी रहती हैं।
चुनाव से पहले क्षेत्र में विभिन्न राजनीतिक दलों ने प्रचार अभियान चलाए हैं और स्थानीय स्तर पर चुनावी गतिविधियां तेज हो गई हैं।
साढ़े पांच साल बाद हो रहे हैं विधानसभा चुनाव
गिलगित-बाल्टिस्तान में पिछला विधानसभा चुनाव नवंबर 2020 में आयोजित किया गया था। उस चुनाव में पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने महत्वपूर्ण सफलता हासिल की थी और क्षेत्र में सरकार बनाई थी।
विधानसभा का कार्यकाल पांच वर्ष का होता है। इस आधार पर 2020 में चुनी गई विधानसभा का कार्यकाल नवंबर 2025 में समाप्त हो गया था। नियमों के अनुसार उसके बाद नए चुनाव होने चाहिए थे, लेकिन विभिन्न कारणों से मतदान निर्धारित समय पर नहीं हो पाया।
पाकिस्तानी प्रशासन ने चुनाव टलने के पीछे मौसम और प्रशासनिक परिस्थितियों को प्रमुख कारण बताया था।
भारी बर्फबारी और मौसम बना चुनाव टलने की वजह
गिलगित-बाल्टिस्तान का अधिकांश हिस्सा पर्वतीय क्षेत्रों में स्थित है। यहां सर्दियों के दौरान भारी बर्फबारी होती है, जिससे कई इलाकों में आवागमन प्रभावित हो जाता है।
स्थानीय प्रशासन के अनुसार कठोर मौसम और बुनियादी ढांचे से जुड़ी चुनौतियों के कारण चुनावी तैयारियां समय पर पूरी नहीं हो सकीं। इसी वजह से चुनाव को स्थगित कर दिया गया था और बाद में 7 जून 2026 की तारीख तय की गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियां प्रशासनिक और चुनावी प्रक्रियाओं को अक्सर प्रभावित करती रही हैं।
गिलगित-बाल्टिस्तान और PoK की प्रशासनिक व्यवस्था में क्या है अंतर?
गिलगित-बाल्टिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) की प्रशासनिक संरचना एक जैसी नहीं रही है। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर, जिसे पाकिस्तान “आजाद जम्मू-कश्मीर” कहता है, का अपना अलग संविधान, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और विधानसभा है।
हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि वहां भी कई महत्वपूर्ण निर्णयों पर इस्लामाबाद का प्रभाव बना रहता है।
दूसरी ओर गिलगित-बाल्टिस्तान को लंबे समय तक सीधे पाकिस्तान की संघीय सरकार द्वारा संचालित किया जाता रहा। दशकों तक इस क्षेत्र को न तो प्रांत का दर्जा मिला और न ही पाकिस्तान की संसद में पूर्ण प्रतिनिधित्व प्राप्त हुआ।
2009 और 2018 के बाद बदली प्रशासनिक संरचना
वर्ष 2009 में पाकिस्तान ने गिलगित-बाल्टिस्तान एम्पावरमेंट एंड सेल्फ-गवर्नेंस ऑर्डर लागू किया। इसके बाद पहली बार यहां विधानसभा चुनाव हुए और स्थानीय शासन व्यवस्था को कुछ अधिकार दिए गए।
हालांकि उस समय भी महत्वपूर्ण शक्तियां पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के पास केंद्रित थीं।
इसके बाद 2018 में गिलगित-बाल्टिस्तान ऑर्डर 2018 लागू किया गया, जिसके तहत स्थानीय विधानसभा और मुख्यमंत्री को अपेक्षाकृत अधिक अधिकार प्रदान किए गए।
7 जून 2026 को होने वाला चुनाव इसी 2018 के प्रशासनिक ढांचे के तहत दूसरा विधानसभा चुनाव माना जा रहा है।
गिलगित-बाल्टिस्तान के बाद PoK में भी होंगे चुनाव
गिलगित-बाल्टिस्तान चुनावों के बाद पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में 27 जुलाई 2026 को विधानसभा चुनाव कराए जाने हैं।
PoK विधानसभा में कुल 53 सीटें हैं, जिनमें 45 सीटों पर प्रत्यक्ष चुनाव होते हैं जबकि 8 सीटें महिलाओं, तकनीकी विशेषज्ञों और धार्मिक विद्वानों के लिए आरक्षित हैं।
यहां भी विधानसभा का कार्यकाल पांच वर्ष का होता है और राजनीतिक परिस्थितियां अक्सर राष्ट्रीय राजनीति से प्रभावित होती रही हैं।
2021 के चुनाव और उसके बाद का राजनीतिक घटनाक्रम
2021 में हुए PoK विधानसभा चुनावों में इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने 45 में से 25 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी। इसके बाद सरदार अब्दुल कय्यूम नियाजी प्रधानमंत्री बने थे।
हालांकि 2022 में पाकिस्तान की राष्ट्रीय राजनीति में बड़े बदलाव आए, जिनका प्रभाव PoK की राजनीति पर भी पड़ा। नियाजी ने पद छोड़ दिया और बाद में सरदार तनवीर इलियास को प्रधानमंत्री बनाया गया।
अप्रैल 2023 में अदालत द्वारा अयोग्य घोषित किए जाने के बाद उन्हें पद छोड़ना पड़ा। इसके बाद चौधरी अनवरुल हक ने नेतृत्व संभाला और बाद में विभिन्न दलों के समर्थन से सरकार चलती रही।
महंगाई और बिजली संकट को लेकर हुए बड़े प्रदर्शन
पिछले कुछ वर्षों में PoK क्षेत्र में महंगाई, बिजली दरों और आटे की कीमतों को लेकर व्यापक विरोध प्रदर्शन देखने को मिले। वर्ष 2024 के दौरान कई शहरों में प्रदर्शन हिंसक रूप ले बैठे थे।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पाकिस्तान की संघीय सरकार को राहत पैकेज और सब्सिडी की घोषणा करनी पड़ी थी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों में आर्थिक मुद्दे भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में आज भी आरक्षित हैं 24 सीटें
2019 में जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन के बाद लागू परिसीमन व्यवस्था के तहत जम्मू-कश्मीर विधानसभा में कुल 24 सीटें पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों के लिए आरक्षित रखी गई हैं।
इनमें गिलगित-बाल्टिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से संबंधित सीटें शामिल हैं। चूंकि इन क्षेत्रों पर वर्तमान में पाकिस्तान का नियंत्रण है, इसलिए इन सीटों पर चुनाव नहीं कराए जाते और इन्हें रिक्त रखा जाता है।
भारत का आधिकारिक रुख यही है कि ये क्षेत्र उसके अभिन्न हिस्से हैं और भविष्य में परिस्थितियां बदलने पर इन सीटों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाएगा।


