शुकतीर्थ बना पर्यावरण संरक्षण का केंद्र: गंगा तट पर 1100 पौधे, अभयारण्य क्षेत्र में 16 हजार वृक्षारोपण, 5 लाख पौधों से हरित हुआ Muzaffarnagar









Muzaffarnagar शुकतीर्थ क्षेत्र ने पर्यावरण संरक्षण, वन संवर्धन, जैव विविधता सुरक्षा और जन-जागरूकता के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उदाहरण प्रस्तुत किया। जीवनदायिनी और मोक्षदायिनी मां गंगा के पावन तट पर आयोजित वृहद कार्यक्रम में वृक्षारोपण, स्वच्छता अभियान, पर्यावरण जागरूकता रैली, वैदिक यज्ञ, वेटलैंड संरक्षण संवाद और वन्यजीव संरक्षण जैसी अनेक गतिविधियों का आयोजन किया गया।
यह कार्यक्रम भारत सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार की पर्यावरणीय प्राथमिकताओं के अनुरूप तथा प्रधानमंत्री की प्रेरणादायी पहल “एक पेड़ मां के नाम” अभियान की भावना को साकार करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया। पूरे दिन चले इस अभियान में संत समाज, जनप्रतिनिधि, विद्यार्थी, स्वयंसेवी संगठन, ग्रामीण समुदाय और पर्यावरण प्रेमियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
गंगा तट पर 1100 पौधों का रोपण, प्रकृति और मातृशक्ति को समर्पित अभियान
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 6 बजे गंगा तट पर विशाल वृक्षारोपण अभियान के साथ हुआ। गंगा के दोनों किनारों पर कुल 1100 पौधों का रोपण किया गया।
इस अभियान का उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं बल्कि गंगा तट के पर्यावरणीय संतुलन को मजबूत करना, मिट्टी कटाव रोकना, जैव विविधता को बढ़ावा देना और आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित विरासत तैयार करना था।
कार्यक्रम में मौजूद संतों और पर्यावरणविदों ने कहा कि गंगा केवल एक नदी नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति, आस्था और जीवन का आधार है। ऐसे में गंगा तटों का संरक्षण और हरित विकास समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुका है।
जलालपुर बेहद में 16 हजार वृक्षों का रोपण, अभयारण्य क्षेत्र में हरियाली का विस्तार
Tree Plantation Shukratal अभियान के तहत जलालपुर बेहद वृक्षारोपण स्थल पर एक साथ 16 हजार पौधे लगाए गए। यह अभियान वन विभाग के निर्धारित लक्ष्य का प्रमुख हिस्सा रहा।
प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी प्रभाग मुजफ्फरनगर के अनुसार विश्व पर्यावरण दिवस पर पूरे जनपद में 5 लाख से अधिक पौधों का रोपण किया गया। वन विभाग का लक्ष्य 18 हजार पौधों का था, जिसमें से 16 हजार पौधे अभयारण्य क्षेत्र में लगाए गए।
विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े स्तर पर वृक्षारोपण न केवल वायु गुणवत्ता सुधारने में मदद करता है बल्कि वन्यजीवों के लिए सुरक्षित आवास भी उपलब्ध कराता है।
गंगा तट पर चला विशेष स्वच्छता अभियान, प्लास्टिक और कचरे के खिलाफ कार्रवाई
वृक्षारोपण कार्यक्रम के बाद गंगा तट के दोनों किनारों पर विशेष स्वच्छता अभियान चलाया गया। इस दौरान प्लास्टिक, पॉलिथीन, बोतलें, धार्मिक अवशेष और अन्य अपशिष्ट सामग्री को एकत्रित किया गया।
अभियान का मुख्य उद्देश्य गंगा नदी को प्रदूषण मुक्त बनाना और लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करना था। स्वयंसेवकों और स्थानीय नागरिकों ने इसमें सक्रिय भागीदारी निभाई।
पर्यावरण विशेषज्ञों ने बताया कि नदियों में प्लास्टिक कचरा जलीय जीवों और पारिस्थितिकी तंत्र के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। ऐसे अभियानों से लोगों में जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है।
सुखदेव आश्रम में वैदिक यज्ञ और हवन से दिया गया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
शुकतीर्थ स्थित सुखदेव आश्रम में पर्यावरण शुद्धि और विश्व कल्याण की कामना से वैदिक यज्ञ एवं हवन का आयोजन किया गया।
संत-महात्माओं ने भारतीय संस्कृति में प्रकृति के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हमारी परंपराओं में पर्यावरण संरक्षण को सदैव सर्वोच्च स्थान दिया गया है। यज्ञ और हवन के माध्यम से लोगों को प्रकृति के साथ संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा दी गई।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों ने भाग लिया तथा पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया।
ओंकारानंद जी ने दिखाई हरी झंडी, निकली विशाल पर्यावरण जागरूकता रैली
कार्यक्रम के अगले चरण में शुकतीर्थ क्षेत्र में विशाल पर्यावरण जागरूकता रैली का आयोजन किया गया। संत समाज के पूज्य महाराज ओंकारानंद जी ने हरी झंडी दिखाकर रैली को रवाना किया।
रैली में विद्यालयों, गुरुकुलों, स्वयंसेवी संस्थाओं, ग्रामीणों और गणमान्य नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। रैली के दौरान वृक्ष संरक्षण, जल संरक्षण, प्लास्टिक उन्मूलन और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े संदेश जन-जन तक पहुंचाए गए।
बच्चों और युवाओं द्वारा तैयार किए गए पोस्टर और नारों ने लोगों का विशेष ध्यान आकर्षित किया।
सिंगल यूज प्लास्टिक पर विशेष परिचर्चा, जिला पंचायत अध्यक्ष ने की अध्यक्षता
प्रातः 10 बजे मोरना विकास खंड क्षेत्र में अभयारण्य क्षेत्र के अंतर्गत सिंगल यूज प्लास्टिक और अन्य प्लास्टिक उत्पादों के उपयोग एवं बिक्री को हतोत्साहित करने के लिए विशेष परिचर्चा आयोजित की गई।
बैठक की अध्यक्षता जिला पंचायत अध्यक्ष वीरपाल निर्वाल ने की। इसमें ग्राम प्रधानों, दुकानदारों, स्वयं सहायता समूहों, पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने भाग लिया।
बैठक में प्लास्टिक प्रदूषण के दुष्प्रभाव, वन्यजीवों पर उसके प्रभाव, जल स्रोतों को होने वाले नुकसान तथा उसके विकल्पों पर विस्तृत चर्चा की गई। कार्यक्रम में ब्लॉक अध्यक्ष अमित राठी सहित अभयारण्य क्षेत्र के अनेक ग्राम प्रधान उपस्थित रहे।
सोलानी नदी पर वृक्षारोपण, कछुओं और मगरमच्छों के संरक्षण पर विशेष पहल
बैठक के बाद जिला पंचायत अध्यक्ष वीरपाल निर्वाल द्वारा सोलानी नदी तट पर वृक्षारोपण किया गया। इसके साथ ही नदी में पाए जाने वाले कछुओं और मगरमच्छों के प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा के लिए विशेष संरक्षण गतिविधियां शुरू की गईं।
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि आवारा पशुओं, मानवीय हस्तक्षेप और अन्य संभावित खतरों से इन जलीय जीवों के आवासों की रक्षा करना अत्यंत आवश्यक है।
यह पहल न केवल वन्यजीव संरक्षण बल्कि नदी पारिस्थितिकी तंत्र को सुरक्षित रखने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
वेटलैंड संरक्षण पर विशेष संवाद, ग्रामीणों को बताया गया आद्र्रभूमियों का महत्व
कार्यक्रम के अंतिम चरण में गंगा तट से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित चैरावाला तालाब और बिमलाखेड़ी तालाब को वेटलैंड के रूप में अधिसूचित किए जाने के उपलक्ष्य में विशेष संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया।
इस अवसर पर वेटलैंड अधिसूचना का वाचन किया गया और ग्रामीणों को आद्र्रभूमियों के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि वेटलैंड भूजल पुनर्भरण, जैव विविधता संरक्षण, बाढ़ नियंत्रण और जलवायु संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि विमलखेड़ी मौजा की ग्राम प्रधान श्रीमती आबिदा परवीन को वेटलैंड संरक्षण के क्षेत्र में विशेष कार्यों के लिए लखनऊ में मुख्यमंत्री द्वारा प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जा चुका है।
‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान बना जनभागीदारी का प्रतीक
पूरे कार्यक्रम में प्रधानमंत्री की प्रेरणादायी पहल “एक पेड़ मां के नाम” अभियान की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई दी। लोगों को यह संदेश दिया गया कि प्रत्येक व्यक्ति अपनी माता के सम्मान में एक पौधा अवश्य लगाए और उसके संरक्षण की जिम्मेदारी भी निभाए।
वन विभाग के अधिकारियों ने कहा कि यह अभियान केवल पौधारोपण कार्यक्रम नहीं बल्कि भावनात्मक और सामाजिक स्तर पर पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का प्रयास है।
पर्यावरण संरक्षण के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ समापन
कार्यक्रम के समापन अवसर पर उपस्थित जनसमुदाय ने नदियों, वनों, आद्र्रभूमियों और वन्यजीवों के संरक्षण की सामूहिक शपथ ली।
क्षेत्रीय वन अधिकारी रविकांत वशिष्ठ ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण दिवस का मूल उद्देश्य लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करना और प्रकृति के सभी घटकों को सुरक्षित, संरक्षित एवं विकसित रखना है।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण किसी एक विभाग का कार्य नहीं बल्कि समाज के हर नागरिक की साझा जिम्मेदारी है। यदि सभी लोग अपनी भूमिका निभाएं तो आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, सुरक्षित और हरित भविष्य सुनिश्चित किया जा सकता है।











