उत्तर प्रदेश

World Vitiligo Day पर छलके जज्बात: मथुरा में विटिलिगो वॉरियर्स की आपबीती सुन नम हुईं आंखें, आत्मविश्वास और सम्मान का दिया संदेश

मथुरा भगवान श्रीकृष्ण की पावन नगरी मथुरा में World Vitiligo Day के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम ने केवल एक सामाजिक आयोजन का रूप नहीं लिया, बल्कि यह संवेदनाओं, आत्मविश्वास, सम्मान और जागरूकता का ऐसा मंच बना, जिसने उपस्थित लोगों के मन को गहराई तक झकझोर दिया। विटिलिगो सपोर्ट इंडिया द्वारा आयोजित विटिलिगो वॉरियर्स सम्मान समारोह एवं कवि सम्मेलन में जब विटिलिगो से जुड़े लोगों ने अपने जीवन के संघर्ष, सामाजिक उपेक्षा और साहस की सच्ची कहानियां साझा कीं, तो सभागार में मौजूद अनेक लोगों की आंखें नम हो गईं।

कार्यक्रम का मुख्य संदेश स्पष्ट था कि विटिलिगो किसी व्यक्ति की पहचान, प्रतिभा या सफलता को सीमित नहीं करता, बल्कि समाज की सोच में सकारात्मक बदलाव लाने की आवश्यकता है। आयोजन ने यह भी संदेश दिया कि सही सहयोग, मानसिक मजबूती और सामाजिक स्वीकार्यता के साथ विटिलिगो से प्रभावित लोग भी हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू सकते हैं।


‘आपबीती’ सत्र बना कार्यक्रम का सबसे भावुक पल

कार्यक्रम का सबसे प्रभावशाली और भावनात्मक सत्र “आपबीती” रहा। इस दौरान विटिलिगो से जुड़े लोगों ने अपने जीवन की वास्तविक घटनाएं साझा कीं। कई वक्ताओं ने बताया कि बीमारी से अधिक उन्हें समाज की संकीर्ण सोच और भेदभाव ने मानसिक रूप से प्रभावित किया, लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का रास्ता चुना।

सभागार में मौजूद लोगों ने इन अनुभवों को गंभीरता से सुना और कई अवसरों पर वातावरण भावुक हो गया।


संस्थापक रविन्द्र जायसवाल ने साझा किया संघर्ष से सेवा तक का सफर

विटिलिगो सपोर्ट इंडिया के संस्थापक रविन्द्र जायसवाल ने संस्था की स्थापना के पीछे की प्रेरणा और अपनी व्यक्तिगत जीवन यात्रा साझा की। उन्होंने बताया कि पिछले लगभग 15 महीनों में उन्हें देश और विदेश से सैकड़ों लोगों की कहानियां सुनने का अवसर मिला, जिनमें दर्द, संघर्ष, सामाजिक भेदभाव और आत्मविश्वास की मिसालें शामिल थीं।

उन्होंने कहा कि विटिलिगो केवल त्वचा का परिवर्तन है, लेकिन समाज की सोच कई बार इससे भी बड़ा घाव दे देती है। संस्था का उद्देश्य ऐसे लोगों को मानसिक सहारा देना, उन्हें जोड़ना और समाज में जागरूकता फैलाना है।


केन्या की मां और भारतीय सैनिक की कहानी ने झकझोरा

रविन्द्र जायसवाल ने अपने संबोधन में दो प्रेरणादायक लेकिन भावुक घटनाओं का उल्लेख किया।

उन्होंने केन्या की एक ऐसी मां की कहानी साझा की, जो अपने विटिलिगो से प्रभावित बच्चे की देखभाल करने के साथ-साथ पारिवारिक उपेक्षा का सामना करते हुए भी साहसपूर्वक जीवन जी रही है।

इसके बाद उन्होंने एक भारतीय सैनिक की कहानी सुनाई, जो देश की सीमाओं पर निर्भीक होकर राष्ट्र की सुरक्षा करता है, लेकिन घर लौटने पर विटिलिगो के कारण सामाजिक भेदभाव और उपेक्षा का सामना करता है। उन्होंने कहा कि यह कहानी इस बात का प्रतीक है कि कई बार सबसे कठिन लड़ाई समाज की मानसिकता से होती है।


वंदना चौधरी ने साझा किया व्यक्तिगत संघर्ष

दिल्ली से आईं सुप्रसिद्ध कवयित्री वंदना चौधरी ने अपनी जीवन यात्रा साझा करते हुए बताया कि अपनों से मिलने वाला मानसिक दर्द सबसे अधिक पीड़ादायक होता है।

उन्होंने विशेष रूप से अपने पति का उल्लेख करते हुए कहा कि कठिन समय में उनके अटूट सहयोग और विश्वास ने उन्हें कभी टूटने नहीं दिया। उसी आत्मबल के कारण वे आज आत्मविश्वास के साथ समाज के बीच अपनी पहचान बना सकी हैं।

उनके संबोधन ने विशेष रूप से महिलाओं और युवाओं को सकारात्मक सोच के साथ जीवन जीने का संदेश दिया।


सकारात्मक सोच सबसे बड़ी ताकत: सुनील चौधरी

मथुरा निवासी सुनील चौधरी ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि वे आज भी उपचार की प्रक्रिया से गुजर रहे हैं और सकारात्मक सोच को अपनी सबसे बड़ी शक्ति मानते हैं।

उन्होंने कहा कि जीवन में परिस्थितियां कैसी भी हों, यदि आत्मविश्वास बना रहे तो हर चुनौती का सामना किया जा सकता है।


पारुल गुप्ता ने दिया समाज को जागरूकता का संदेश

कार्यक्रम का संचालन कर रहीं पारुल गुप्ता ने भी अपने जीवन के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि सामाजिक चुनौतियों और मानसिक संघर्षों का सामना करने के बाद आज वे विटिलिगो से जुड़े लोगों को जागरूक करने और उनका मनोबल बढ़ाने का कार्य कर रही हैं।

उन्होंने विश्व विटिलिगो दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विटिलिगो केवल त्वचा की स्थिति है, यह किसी व्यक्ति की क्षमता, योग्यता या सफलता को कभी प्रभावित नहीं करती।

उन्होंने देश और दुनिया के कई ऐसे प्रसिद्ध व्यक्तित्वों का उल्लेख किया जिन्होंने विटिलिगो के साथ भी उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कीं। इनमें माइकल जैक्सन, विनी हार्लो, संतोष गंगवार और गौतम सिंघानिया जैसे नाम शामिल रहे।


झारखंड के राज्यपाल का संदेश भी पढ़कर सुनाया गया

कार्यक्रम के दौरान झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार द्वारा भेजा गया शुभकामना संदेश भी पढ़कर सुनाया गया।

अपने संदेश में उन्होंने विटिलिगो सपोर्ट इंडिया द्वारा समाज में जागरूकता फैलाने और विटिलिगो से जुड़े लोगों का मनोबल बढ़ाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। साथ ही उन्होंने अपने व्यक्तिगत अनुभव भी साझा किए और संस्था के कार्यों की प्रशंसा की।


संस्था की उपलब्धियों और उद्देश्य पर डॉ. कपिल बंसल ने डाली रोशनी

संस्था के सचिव डॉ. कपिल बंसल ने विटिलिगो सपोर्ट इंडिया की स्थापना, उद्देश्य और पिछले एक वर्ष के दौरान संचालित विभिन्न जागरूकता अभियानों की जानकारी दी।

उन्होंने संस्था से जुड़े पदाधिकारियों और सदस्यों का परिचय कराते हुए कहा कि संगठन का लक्ष्य केवल जागरूकता फैलाना ही नहीं, बल्कि विटिलिगो से प्रभावित लोगों को एक मजबूत सामाजिक और भावनात्मक मंच उपलब्ध कराना भी है।


डॉ. भुवन बंसल बोले- काउंसलिंग उपचार की पहली सीढ़ी

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. भुवन बंसल (एमडी, होम्योपैथी, गोल्ड मेडलिस्ट) ने कहा कि वर्तमान समय में विटिलिगो का पूर्ण उपचार उपलब्ध नहीं है, लेकिन समय पर सही चिकित्सा परामर्श, मानसिक सहयोग और प्रभावी काउंसलिंग के माध्यम से मरीजों का आत्मविश्वास बनाए रखा जा सकता है।

उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि किसी भी उपचार की शुरुआत मरीज की मानसिक स्थिति को मजबूत बनाने से होनी चाहिए। सकारात्मक सोच और परिवार का सहयोग उपचार प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।


विटिलिगो वॉरियर्स का हुआ सम्मान

कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार श्रीप्रकाश शुक्ला ने विटिलिगो वॉरियर्स को सम्मानित किया। सभी प्रतिभागियों को सम्मानस्वरूप पटका पहनाकर उनके साहस, आत्मविश्वास और समाज में सकारात्मक योगदान की सराहना की गई।

सम्मानित होने वालों में रविन्द्र जायसवाल, प्रीति गुप्ता, पारुल गुप्ता, वंदना चौधरी, शंकर लाल पंजवानी, वरुण भारद्वाज, सुनील चौधरी और डॉ. सलीम अहमद सहित अनेक प्रतिभागी शामिल रहे।


कवि सम्मेलन ने बांधा समां

सम्मान समारोह के बाद आयोजित कवि सम्मेलन में आगरा से आए प्रसिद्ध कवि डॉ. सलीम अहमद एटवी ने संचालन किया।

दिल्ली की कवयित्री वंदना चौधरी, मथुरा के डॉ. उदयवीर सिंह, आगरा के संजय कुमार तथा राजेश शर्मा ने अपनी कविताओं, ग़ज़लों और शायरियों से कार्यक्रम में साहित्यिक गरिमा जोड़ दी। उनकी प्रस्तुतियों ने न केवल श्रोताओं का मनोरंजन किया बल्कि जीवन में सकारात्मक सोच और आत्मबल का संदेश भी दिया।

कार्यक्रम के समापन पर सभी कवियों और साहित्यकारों को सम्मान-पत्र देकर सम्मानित किया गया।


अगले वर्ष 500 से अधिक विटिलिगो साथियों को जोड़ने का लक्ष्य

कार्यक्रम के अंत में संस्था के उपाध्यक्ष मोहम्मद ज़ाहिद ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि संस्था के पहले आयोजन में केवल छह लोगों ने भाग लिया था, जबकि इस वर्ष 60 से अधिक प्रतिभागियों की सहभागिता रही।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वर्ष 2027 तक संस्था का लक्ष्य 500 से 600 विटिलिगो साथियों को एक मंच पर जोड़कर जागरूकता अभियान को और अधिक व्यापक बनाना है।

उन्होंने कहा कि समाज में बदलाव तभी आएगा जब लोग विटिलिगो को बीमारी नहीं बल्कि सामान्य त्वचा संबंधी स्थिति के रूप में स्वीकार करेंगे और प्रभावित लोगों के साथ समान व्यवहार करेंगे।


 

मथुरा में आयोजित विश्व विटिलिगो दिवस समारोह केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि सामाजिक जागरूकता, संवेदनशीलता और आत्मविश्वास का सशक्त अभियान बनकर उभरा। विटिलिगो वॉरियर्स की जीवन यात्राओं ने यह संदेश दिया कि किसी व्यक्ति की पहचान उसके व्यक्तित्व, प्रतिभा और साहस से होती है, न कि उसकी त्वचा के रंग से। संस्था द्वारा सम्मान, संवाद और जागरूकता के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन की जो पहल की जा रही है, वह आने वाले वर्षों में विटिलिगो से जुड़े हजारों लोगों के जीवन में नई उम्मीद और आत्मबल का संचार कर सकती है।

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