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Ali Khamenei का पार्थिव शरीर कोम पहुंचा, तेहरान की सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब; बदले के नारों और ईरानी नेताओं की चेतावनी से बढ़ा तनाव

ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला Ali Khamenei  का पार्थिव शरीर सोमवार शाम राजधानी तेहरान से पवित्र शहर कोम पहुंच गया। ईरान के सरकारी टेलीविजन के मुताबिक, खामेनेई के पार्थिव शरीर को हेलिकॉप्टर के जरिए कोम लाया गया, जहां मंगलवार को अंतिम यात्रा और धार्मिक रस्मों का आयोजन किया जाएगा।

खामेनेई के निधन के बाद ईरान में लगातार तीसरे दिन भी शोक और भारी जनसमूह का दृश्य देखने को मिला। राजधानी तेहरान की सड़कों पर लाखों लोग अंतिम यात्रा में शामिल हुए और खामेनेई तथा उनके परिवार के दिवंगत सदस्यों के ताबूतों पर फूल बरसाकर श्रद्धांजलि अर्पित की।

खामेनेई का पार्थिव शरीर कोम पहुंचने के साथ ही अंतिम संस्कार की प्रक्रिया अब अगले महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश कर गई है। कोम में धार्मिक रस्मों और अंतिम यात्रा के बाद उनके पार्थिव शरीर को गृह नगर मशहद ले जाया जाएगा, जहां गुरुवार को इमाम रजा दरगाह परिसर में उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।

ईरान में एक ओर लाखों लोग शोक व्यक्त कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अंतिम यात्रा के दौरान बदले की मांग, ईरानी नेताओं की चेतावनियों और इजराइल के साथ तेज होती बयानबाजी ने पश्चिम एशिया में तनाव को और बढ़ा दिया है।


हेलिकॉप्टर से तेहरान से कोम लाया गया पार्थिव शरीर

ईरान के सरकारी मीडिया के अनुसार सोमवार शाम अयातुल्ला अली खामेनेई के पार्थिव शरीर को हेलिकॉप्टर से तेहरान से कोम पहुंचाया गया।

कोम ईरान के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक शहरों में शामिल है। शिया इस्लाम के प्रमुख धार्मिक केंद्र के रूप में इसकी वैश्विक पहचान है। खामेनेई के जीवन में भी इस शहर का विशेष महत्व रहा है।

उन्होंने कोम में धार्मिक शिक्षा हासिल की थी और बाद में ईरान के सबसे प्रभावशाली धार्मिक और राजनीतिक नेताओं में शामिल हुए।

यही कारण है कि उनकी अंतिम यात्रा के कार्यक्रम में कोम को विशेष स्थान दिया गया है।


कोम में होंगी विशेष धार्मिक रस्में

खामेनेई के पार्थिव शरीर के कोम पहुंचने के बाद मंगलवार को वहां विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

इस दौरान बड़ी संख्या में धार्मिक नेता, शिया धर्मगुरु, सरकारी अधिकारी और आम नागरिक अंतिम यात्रा में शामिल हो सकते हैं।

ईरानी प्रशासन की ओर से भारी भीड़ को देखते हुए व्यापक सुरक्षा और यातायात व्यवस्था किए जाने की तैयारी है।

कोम में होने वाले कार्यक्रम के बाद पार्थिव शरीर को मशहद ले जाया जाएगा।


गुरुवार को मशहद में किया जाएगा सुपुर्द-ए-खाक

अंतिम संस्कार कार्यक्रम के अनुसार कोम में धार्मिक रस्मों के बाद खामेनेई के पार्थिव शरीर को उनके गृह नगर मशहद ले जाया जाएगा।

गुरुवार को मशहद स्थित प्रसिद्ध इमाम रजा दरगाह परिसर में उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।

मशहद शिया मुसलमानों के सबसे पवित्र धार्मिक स्थलों में शामिल है। यहां स्थित इमाम रजा दरगाह में हर वर्ष दुनिया भर से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं।

खामेनेई के अंतिम संस्कार के अवसर पर मशहद में भी विशाल जनसमूह जुटने की संभावना जताई जा रही है।


तेहरान में तीसरे दिन भी सड़कों पर उमड़े लाखों लोग

इससे पहले राजधानी तेहरान में लगातार तीसरे दिन भी खामेनेई की अंतिम यात्रा में लाखों लोगों ने हिस्सा लिया।

ईरानी मीडिया के अनुसार सड़कों पर इतनी भारी भीड़ उमड़ी कि ताबूत लेकर चल रहे वाहन की गति कई स्थानों पर बेहद धीमी हो गई।

आजादी स्ट्रीट पर भारी जनसमूह के कारण वाहन को कुछ समय के लिए रोकना भी पड़ा।

सड़कों पर मौजूद लोग खामेनेई की तस्वीरें, ईरान के झंडे और धार्मिक प्रतीक लेकर अंतिम यात्रा में शामिल हुए।


ताबूतों पर फूल बरसाकर दी गई श्रद्धांजलि

अंतिम यात्रा के दौरान लोगों ने खामेनेई और उनके परिवार के दिवंगत सदस्यों के ताबूतों पर फूल बरसाकर श्रद्धांजलि अर्पित की।

राजधानी की सड़कों पर शोक और भावनात्मक माहौल दिखाई दिया।

कई लोग हाथों में खामेनेई की तस्वीरें लिए हुए थे, जबकि बड़ी संख्या में समर्थक धार्मिक और राजनीतिक नारे लगाते दिखाई दिए।

इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था भी बेहद कड़ी रखी गई।


भारी भीड़ के कारण धीमा पड़ा अंतिम यात्रा का वाहन

तेहरान में अंतिम यात्रा के दौरान उमड़ी भारी भीड़ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ताबूत लेकर चल रहा वाहन कई स्थानों पर बेहद धीमी गति से आगे बढ़ पाया।

आजादी स्ट्रीट पर स्थिति ऐसी हो गई कि वाहन को कुछ समय के लिए रोकना पड़ा।

अंतिम यात्रा के मार्ग पर मौजूद हजारों लोग वाहन के नजदीक पहुंचने का प्रयास करते दिखाई दिए।

सुरक्षा बलों और स्वयंसेवकों ने भीड़ को नियंत्रित करने और अंतिम यात्रा को आगे बढ़ाने के लिए व्यापक व्यवस्थाएं कीं।


अंतिम यात्रा में गूंजे बदले के नारे

खामेनेई की अंतिम यात्रा के दौरान शोक के साथ आक्रोश भी दिखाई दिया।

कई समर्थक लाल झंडे लेकर पहुंचे और खामेनेई की हत्या का बदला लेने की मांग करते हुए नारे लगाए।

अंतिम यात्रा के दौरान ‘या लथारत अल-खामेनेई’ के नारे भी सुनाई दिए।

समर्थकों की ओर से लगाए गए इन नारों ने संकेत दिया कि खामेनेई की मौत के बाद ईरान में आक्रोश और प्रतिशोध की मांग तेज हो रही है।


राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने दिया बड़ा संदेश

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने खामेनेई की अंतिम यात्रा को लेकर महत्वपूर्ण बयान दिया।

उन्होंने कहा कि अंतिम यात्रा में लोगों की विशाल भागीदारी खामेनेई के रास्ते पर आगे बढ़ने के संकल्प को प्रदर्शित करती है।

राष्ट्रपति के इस बयान को ईरान की भावी राजनीतिक दिशा के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

खामेनेई लंबे समय तक ईरान की राजनीति, धार्मिक व्यवस्था, रक्षा नीति और विदेश नीति के सबसे प्रभावशाली केंद्र रहे।

ऐसे में उनके निधन के बाद ईरान की अगली रणनीति पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।


सेना प्रमुख अमीर हातमी की चेतावनी से बढ़ी हलचल

ईरान के सेना प्रमुख अमीर हातमी ने भी खामेनेई की मौत को लेकर सख्त चेतावनी दी है।

उन्होंने कहा कि हत्या के जिम्मेदार लोगों का पीछा नहीं छोड़ा जाएगा।

ईरानी सैन्य नेतृत्व की इस चेतावनी को क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विशेषज्ञों की नजर अब इस बात पर है कि ईरान आने वाले दिनों में किस प्रकार की रणनीतिक प्रतिक्रिया देता है।


इजराइल और ईरान के बीच बयानबाजी हुई तेज

खामेनेई की अंतिम यात्रा के बीच इजराइल और ईरान के बीच बयानबाजी भी तेज हो गई है।

इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अंतिम यात्रा में उमड़ी भीड़ को लेकर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सड़कों पर दिखाई दे रहा जनसमूह पूरे ईरान की आवाज का प्रतिनिधित्व नहीं करता।

उनके इस बयान के बाद दोनों देशों के बीच पहले से जारी तनाव और अधिक गहरा होता दिखाई दे रहा है।

ईरानी नेताओं की ओर से लगातार कड़े बयान दिए जा रहे हैं, जबकि इजराइल भी पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है।


इराक के शिया नेता ने लोगों से की अंतिम यात्रा में शामिल होने की अपील

इराक के प्रमुख शिया नेता अम्मार अल-हकीम ने भी लोगों से खामेनेई की अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की।

खामेनेई का प्रभाव केवल ईरान तक सीमित नहीं था। पश्चिम एशिया के विभिन्न शिया संगठनों और राजनीतिक समूहों पर भी उनका व्यापक प्रभाव माना जाता रहा है।

यही कारण है कि उनकी मौत के बाद पूरे पश्चिम एशिया में राजनीतिक और धार्मिक हलचल दिखाई दे रही है।


खामेनेई के निधन के बाद ईरान के सामने बड़ी राजनीतिक चुनौती

अयातुल्ला अली खामेनेई दशकों तक ईरान के सर्वोच्च राजनीतिक और धार्मिक नेता रहे।

ईरान की आंतरिक राजनीति से लेकर विदेश नीति और सैन्य रणनीति तक उनके निर्णयों का व्यापक प्रभाव रहा।

उनके निधन के बाद ईरान के सामने सबसे बड़ी चुनौती सत्ता के संतुलन और भविष्य की राजनीतिक दिशा को लेकर है।

पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में ईरान का नेतृत्व किस प्रकार आगे बढ़ता है।


कोम से मशहद तक अंतिम यात्रा पर दुनिया की नजर

तेहरान के बाद अब कोम और फिर मशहद में होने वाले अंतिम संस्कार कार्यक्रमों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी हुई है।

भारी जनसमूह को देखते हुए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए जा रहे हैं।

कोम में धार्मिक रस्मों के बाद खामेनेई के पार्थिव शरीर को मशहद ले जाया जाएगा, जहां गुरुवार को अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी होगी।

इस दौरान ईरान के शीर्ष राजनीतिक, सैन्य और धार्मिक नेताओं के शामिल होने की संभावना है।


पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच बेहद अहम घटनाक्रम

खामेनेई की मौत ऐसे समय हुई है जब पश्चिम एशिया पहले से ही गंभीर राजनीतिक और सैन्य तनाव का सामना कर रहा है।

ईरान और इजराइल के बीच जारी बयानबाजी, ईरानी नेताओं की चेतावनियां और अंतिम यात्रा में बदले की मांग ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है।

दुनिया के कई देश पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान द्वारा आने वाले दिनों में उठाए जाने वाले कदम पश्चिम एशिया की राजनीति और सुरक्षा स्थिति पर दूरगामी प्रभाव डाल सकते हैं।


तेहरान में लाखों लोगों की मौजूदगी के बीच निकली अंतिम यात्रा के बाद अयातुल्ला अली खामेनेई का पार्थिव शरीर अब कोम पहुंच चुका है, जहां धार्मिक रस्मों के बाद उसे मशहद ले जाया जाएगा। शोक में डूबे ईरान में अंतिम यात्रा के दौरान गूंजे बदले के नारे, राष्ट्रपति मसूद पजशकियान और सेना प्रमुख अमीर हातमी के सख्त संदेश तथा इजराइल के साथ बढ़ती बयानबाजी ने पूरे घटनाक्रम को वैश्विक राजनीति के केंद्र में ला दिया है। अब दुनिया की नजर खामेनेई के अंतिम संस्कार के साथ-साथ ईरान के अगले राजनीतिक और रणनीतिक कदम पर टिकी हुई है।

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