91 साल के हुए Dalai Lama: धर्मशाला में गूंजा शांति और करुणा का संदेश, पीएम मोदी ने दी बधाई; त्सुगलाखंग में उमड़ा अनुयायियों का सैलाब
विश्व प्रसिद्ध बौद्ध धर्मगुरु Dalai Lama सोमवार को 91 वर्ष के हो गए। उनके जन्मदिन के अवसर पर हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला स्थित मुख्य तिब्बती मंदिर त्सुगलाखंग प्रांगण में भव्य समारोह आयोजित किया गया। शांति, अहिंसा, करुणा और मानवता का संदेश देने वाले दलाई लामा के जन्मदिन को लेकर धर्मशाला में उत्सव जैसा माहौल दिखाई दिया।
केंद्रीय तिब्बती प्रशासन (सीटीए) और स्थानीय तिब्बती समुदाय की ओर से आयोजित कार्यक्रम में देश-विदेश से पहुंचे सैकड़ों बौद्ध अनुयायियों, पर्यटकों और स्थानीय भारतीय नागरिकों ने हिस्सा लिया। पारंपरिक तिब्बती संस्कृति, विशेष प्रार्थना, संगीत और आध्यात्मिक वातावरण के बीच दलाई लामा की लंबी आयु और बेहतर स्वास्थ्य की कामना की गई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी दलाई लामा को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए उनके शांति, सद्भाव और वैश्विक कल्याण के संदेश की सराहना की।
त्सुगलाखंग प्रांगण में भव्य समारोह, देश-विदेश से पहुंचे अनुयायी
धर्मशाला स्थित दलाई लामा के अस्थायी निवास के मुख्य तिब्बती मंदिर त्सुगलाखंग में सुबह से ही उत्साह का माहौल दिखाई दिया। दलाई लामा के अनुयायी, बौद्ध भिक्षु, स्थानीय नागरिक और विभिन्न देशों से पहुंचे पर्यटक समारोह में शामिल हुए।
दलाई लामा के प्रति सम्मान और आस्था व्यक्त करने के लिए बड़ी संख्या में लोग कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे। समारोह में तिब्बती परंपराओं और भारतीय संस्कृति के समन्वय की झलक भी दिखाई दी।
दलाई लामा का जन्मदिन तिब्बती समुदाय के लिए केवल उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि उनके शांति, अहिंसा और करुणा के संदेश को याद करने का महत्वपूर्ण दिन भी माना जाता है।
राष्ट्रगान और विशेष प्रार्थना के साथ हुई कार्यक्रम की शुरुआत
जन्मदिन समारोह की औपचारिक शुरुआत भारत और तिब्बत के राष्ट्रगान के साथ की गई। इसके बाद दलाई लामा के बेहतर स्वास्थ्य और लंबी आयु की कामना करते हुए विशेष प्रार्थना सभा आयोजित की गई।
कार्यक्रम में उपस्थित बौद्ध भिक्षुओं और अनुयायियों ने सामूहिक प्रार्थना में भाग लिया। इसके बाद जन्मदिन का केक काटा गया और उपस्थित लोगों ने दलाई लामा के दीर्घ एवं स्वस्थ जीवन की कामना की।
समारोह के दौरान पूरे त्सुगलाखंग परिसर में आध्यात्मिक और उत्सवपूर्ण वातावरण दिखाई दिया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दी जन्मदिन की शुभकामनाएं
दलाई लामा के जन्मदिन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उन्हें शुभकामनाएं दीं। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर संदेश जारी कर उनके लंबे और स्वस्थ जीवन की कामना की।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में कहा कि दलाई लामा का शांति और सद्भाव का संदेश दुनिया भर के लोगों के लिए मार्गदर्शक शक्ति रहा है। उन्होंने दलाई लामा की नैतिक और आध्यात्मिक शक्ति तथा वैश्विक कल्याण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता की भी सराहना की।
प्रधानमंत्री की शुभकामनाओं ने दलाई लामा के जन्मदिन समारोह को राष्ट्रीय स्तर पर भी विशेष बना दिया।
6 जुलाई 1935 को तिब्बत में हुआ था जन्म
दलाई लामा का जन्म 6 जुलाई 1935 को पूर्वोत्तर तिब्बत के ताकत्सेर गांव में हुआ था। बेहद कम उम्र में ही उन्हें तिब्बती बौद्ध परंपरा के अनुसार 14वें दलाई लामा के रूप में मान्यता दी गई।
उनका जीवन तिब्बत, बौद्ध धर्म, विश्व शांति और अहिंसा के संदेश से जुड़ा रहा है। दशकों से वह पूरी दुनिया में करुणा, धार्मिक सद्भाव और मानवीय मूल्यों की आवश्यकता पर जोर देते रहे हैं।
1959 में भारत आए, धर्मशाला को बनाया निवास स्थान
वर्ष 1959 में तिब्बत की परिस्थितियों के बाद दलाई लामा भारत आए। इसके बाद हिमाचल प्रदेश का धर्मशाला शहर उनका प्रमुख निवास स्थान बना।
तब से धर्मशाला दुनिया भर के तिब्बती समुदाय और बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित हुआ है।
दलाई लामा ने भारत में रहते हुए दुनिया भर में शांति, अहिंसा और धार्मिक सद्भाव का संदेश दिया। उनके विचारों और शिक्षाओं से प्रभावित होकर विभिन्न देशों से बड़ी संख्या में लोग हर वर्ष धर्मशाला पहुंचते हैं।
1989 में मिला था नोबेल शांति पुरस्कार
विश्व शांति और अहिंसा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए दलाई लामा को वर्ष 1989 में प्रतिष्ठित नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
दलाई लामा लगातार इस बात पर जोर देते रहे हैं कि हिंसा किसी भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकती। संवाद, करुणा, सहिष्णुता और आपसी समझ के माध्यम से ही दुनिया में स्थायी शांति स्थापित की जा सकती है।
उनकी इसी सोच ने उन्हें दुनिया के सबसे प्रभावशाली आध्यात्मिक नेताओं में शामिल किया है।
डीसी हेमराज बैरवा रहे मुख्य अतिथि
धर्मशाला में आयोजित जन्मदिन समारोह में कांगड़ा के उपायुक्त हेमराज बैरवा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
उन्होंने राज्य सरकार की ओर से दलाई लामा को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं और उनके शांति एवं मानवता के संदेश की सराहना की।
हेमराज बैरवा ने कहा कि दलाई लामा केवल वैश्विक आध्यात्मिक गुरु नहीं हैं, बल्कि संघर्ष और विभाजन से प्रभावित आधुनिक विश्व में शांति, करुणा और सार्वभौमिक उत्तरदायित्व के जीवंत प्रतीक हैं।
‘असली सुख भौतिकता में नहीं, दयालु हृदय और क्षमा में है’
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि ने दलाई लामा की शिक्षाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वास्तविक सुख केवल भौतिक संसाधनों से हासिल नहीं किया जा सकता।
दयालु हृदय, दूसरों के प्रति करुणा और क्षमा की भावना ही व्यक्ति को वास्तविक आंतरिक शांति प्रदान कर सकती है।
उन्होंने कहा कि आज जब दुनिया के कई हिस्से संघर्ष, हिंसा और तनाव का सामना कर रहे हैं, तब दलाई लामा का शांति और करुणा का संदेश पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।
धर्मशाला की पहचान से गहराई से जुड़ा है तिब्बती समुदाय
कार्यक्रम में तिब्बती समुदाय के धर्मशाला और आसपास के क्षेत्रों के विकास में योगदान की भी चर्चा की गई।
डीसी हेमराज बैरवा ने कहा कि तिब्बती समुदाय ने क्षेत्र के पर्यटन और अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
दलाई लामा के धर्मशाला में निवास के कारण यह शहर दुनिया के प्रमुख आध्यात्मिक और पर्यटन स्थलों में शामिल हो गया है। हर वर्ष दुनिया के विभिन्न हिस्सों से हजारों पर्यटक और अनुयायी यहां पहुंचते हैं।
तिब्बती कलाकारों की प्रस्तुतियों ने बांधा समां
जन्मदिन समारोह के दौरान तिब्बती स्कूलों के विद्यार्थियों और तिब्बती प्रदर्शन कला संस्थान के कलाकारों ने पारंपरिक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए।
रंग-बिरंगी पारंपरिक वेशभूषा, तिब्बती संगीत और नृत्य प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को विशेष आकर्षण प्रदान किया।
समारोह में मौजूद लोगों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का उत्साह के साथ स्वागत किया।
निर्वासित तिब्बती संसद और काशाग के संदेश पढ़े गए
समारोह के दौरान निर्वासित तिब्बती संसद के उपाध्यक्ष खेनपो सोनम टेनफेल और कार्यवाहक सिक्योंग त्सेग्याल चुक्या द्रानी ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।
इस दौरान संसद और काशाग यानी तिब्बती कैबिनेट के आधिकारिक संदेश पढ़े गए। संदेशों में दलाई लामा के योगदान, उनके आध्यात्मिक नेतृत्व और तिब्बती समुदाय के लिए उनके महत्व का उल्लेख किया गया।
उत्कृष्ट सेवाओं के लिए कर्मचारियों को किया गया सम्मानित
जन्मदिन समारोह के दौरान केंद्रीय तिब्बती प्रशासन के कई सिविल सेवकों को उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए सम्मानित भी किया गया।
कार्यक्रम में प्रशासनिक सेवाओं और सामाजिक योगदान के महत्व को रेखांकित करते हुए बेहतर कार्य करने वाले कर्मचारियों की सराहना की गई।
शांति, अहिंसा और करुणा की वैश्विक आवाज हैं दलाई लामा
दलाई लामा का जीवन कई दशकों से शांति और अहिंसा के संदेश को समर्पित रहा है। उन्होंने दुनिया के विभिन्न देशों की यात्रा कर धार्मिक सद्भाव, मानवीय मूल्यों और वैश्विक जिम्मेदारी की आवश्यकता पर जोर दिया है।
उनका मानना है कि मनुष्य की पहचान उसके धर्म, देश या भाषा से पहले एक इंसान के रूप में है। इसी सोच के कारण उनके अनुयायी केवल बौद्ध समुदाय तक सीमित नहीं हैं।
दुनिया के विभिन्न धर्मों और संस्कृतियों से जुड़े लोग भी उनके विचारों से प्रभावित रहे हैं।
आधुनिक दुनिया में और बढ़ी दलाई लामा के संदेश की प्रासंगिकता
आज दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध, हिंसा, राजनीतिक तनाव और सामाजिक विभाजन की स्थिति बनी हुई है। ऐसे समय में दलाई लामा का संवाद और करुणा के माध्यम से समस्याओं के समाधान का संदेश महत्वपूर्ण माना जाता है।
वह लगातार लोगों को मानसिक शांति, सहिष्णुता और एक-दूसरे के प्रति सम्मान की भावना विकसित करने के लिए प्रेरित करते रहे हैं।
दलाई लामा का कहना रहा है कि वैश्विक समस्याओं का समाधान केवल राजनीतिक या आर्थिक स्तर पर संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए मानवीय सोच और आपसी विश्वास को मजबूत करना भी आवश्यक है।
दलाई लामा और भारत का दशकों पुराना गहरा संबंध
दलाई लामा और भारत का संबंध छह दशक से भी अधिक पुराना है। वर्ष 1959 में भारत आने के बाद से उन्होंने धर्मशाला को अपना निवास स्थान बनाया।
भारत में रहते हुए उन्होंने बौद्ध दर्शन, शांति और अहिंसा के संदेश को दुनिया के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचाया।
धर्मशाला आज तिब्बती संस्कृति और बौद्ध धर्म के प्रमुख वैश्विक केंद्रों में शामिल है। दलाई लामा की उपस्थिति ने इस हिमालयी शहर को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
देश-विदेश से उमड़ी शुभकामनाएं
91वें जन्मदिन के अवसर पर दलाई लामा को भारत सहित दुनिया के विभिन्न हिस्सों से शुभकामनाएं मिलीं।
राजनीतिक नेताओं, धार्मिक गुरुओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और उनके अनुयायियों ने उनके स्वस्थ और लंबे जीवन की कामना की।
धर्मशाला में आयोजित समारोह ने एक बार फिर दलाई लामा के वैश्विक प्रभाव और उनके शांति संदेश की व्यापक स्वीकार्यता को प्रदर्शित किया।

