Allahabad High Court का बड़ा फैसला: भदोही में बजपेयी ढाबे की कुर्की रद्द, कहा- अपराध में नाम होना संपत्ति जब्त करने के लिए काफी नहीं
प्रयागराज। Allahabad High Court ने भदोही में गैंगस्टर एक्ट के तहत बजपेयी ढाबे को कुर्क करने के जिलाधिकारी के आदेश को रद्द कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज होना या अपराध में उसकी कथित संलिप्तता अपने आप में उसकी संपत्ति कुर्क करने का पर्याप्त आधार नहीं है। इसके लिए ठोस सामग्री होना जरूरी है, जिससे यह साबित हो सके कि संबंधित संपत्ति गैंगस्टर एक्ट के दायरे में आने वाले अपराधों से अर्जित की गई है।
हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी को संबंधित संपत्ति तत्काल अपीलकर्ता को वापस सौंपने का निर्देश दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति वाणी रंजन अग्रवाल की एकल पीठ ने राकेश बजपेयी की आपराधिक अपील स्वीकार करते हुए दिया। अदालत ने ढाबे की कुर्की के साथ-साथ विशेष न्यायालय द्वारा कुर्की की पुष्टि करने वाले आदेश को भी रद्द कर दिया।
डीएम के 14 जून 2024 के आदेश को दी गई थी चुनौती
मामले में राकेश बजपेयी ने जिलाधिकारी की ओर से 14 जून 2024 को जारी ढाबे की कुर्की के आदेश को चुनौती दी थी। इसके बाद विशेष न्यायालय ने 9 जुलाई 2024 को कुर्की की पुष्टि कर दी थी। अपील में इन दोनों आदेशों को चुनौती देते हुए कहा गया कि संपत्ति को अपराध से अर्जित धन से बनाए जाने के आरोप के समर्थन में पर्याप्त आधार नहीं था।
हाईकोर्ट ने मामले में प्रस्तुत सामग्री और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार किया। अदालत के सामने मुख्य सवाल यह था कि क्या केवल आपराधिक मामले में कथित संलिप्तता के आधार पर ढाबे को गैंगस्टर एक्ट के तहत कुर्क किया जा सकता है, या इसके लिए संपत्ति और कथित अपराध से अर्जित धन के बीच संबंध स्थापित करना भी जरूरी है।
अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम और गैंगस्टर एक्ट के मामले के बाद हुई थी कुर्की
मामले के अनुसार, भदोही जिले के गोपीगंज थाना क्षेत्र के विट्ठलपुर गांव में स्थित बजपेयी ढाबे को अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम और गैंगस्टर एक्ट के तहत दर्ज मामले के बाद कुर्क किया गया था। पुलिस ने ढाबे के निर्माण की अनुमानित लागत करीब 75 लाख रुपये बताई थी। आरोप था कि ढाबे का निर्माण अवैध गतिविधियों से अर्जित धन से किया गया है।
राकेश बजपेयी ने इन आरोपों का विरोध करते हुए कहा था कि ढाबा पैतृक जमीन पर उनके और उनके भाइयों के सहयोग से बनाया गया था। उनका पक्ष था कि संपत्ति को अवैध गतिविधियों से अर्जित धन से बनाए जाने के आरोप को साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं। इस तरह मामला केवल संपत्ति की कुर्की तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह भी जांच के दायरे में आया कि संपत्ति के निर्माण में इस्तेमाल धन के स्रोत को लेकर क्या प्रमाण प्रस्तुत किए गए थे।
75 लाख रुपये की कीमत तय करने के समर्थन में दस्तावेज नहीं मिले
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी उल्लेख किया कि ढाबे की कीमत 75 लाख रुपये निर्धारित करने के समर्थन में लेखपाल की कोई रिपोर्ट या अन्य मूल्यांकन संबंधी दस्तावेज पेश नहीं किए गए थे। संपत्ति की अनुमानित लागत का उल्लेख किए जाने के बावजूद उसके मूल्यांकन के आधार को प्रमाणित करने वाली सामग्री का अभाव अदालत के विचार में महत्वपूर्ण रहा।
अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर सका कि ढाबे के निर्माण में लगी धनराशि अवैध गतिविधियों से अर्जित की गई थी। यानी संपत्ति के अस्तित्व और उसकी अनुमानित कीमत का उल्लेख करना पर्याप्त नहीं था; यह स्थापित करना भी जरूरी था कि उसके निर्माण में इस्तेमाल धन कथित अपराध से आया था।
गैंगस्टर एक्ट की धारा 14 पर हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि गैंगस्टर एक्ट की धारा 14 के तहत संपत्ति कुर्क करने के लिए जिलाधिकारी के पास यह मानने का ठोस आधार होना चाहिए कि संबंधित संपत्ति गैंगस्टर की ओर से अपराध से अर्जित की गई है। संपत्ति की कुर्की के लिए अपराध में कथित संलिप्तता और संपत्ति के अर्जन के बीच संबंध स्थापित होना जरूरी है।
अदालत के अनुसार, किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज होने मात्र से यह नहीं माना जा सकता कि उसकी हर संपत्ति अपराध से अर्जित की गई है। यदि संपत्ति वैध आय से हासिल की गई है, तो केवल आपराधिक मामले के आधार पर उसे कुर्क नहीं किया जा सकता। कुर्की की कार्रवाई के लिए संबंधित कानून के तहत आवश्यक आधार और उसका समर्थन करने वाली सामग्री होनी चाहिए।
इस टिप्पणी का महत्व इसलिए है क्योंकि संपत्ति कुर्क करने जैसी कार्रवाई में प्रशासनिक आदेश के साथ उसके पीछे मौजूद तथ्यात्मक आधार भी महत्वपूर्ण होता है। आरोपों और संपत्ति के स्रोत के बीच संबंध स्थापित किए बिना केवल आपराधिक मामले का हवाला देना पर्याप्त नहीं माना जा सकता।
ढाबा तत्काल लौटाने का आदेश, कुर्की की पुष्टि भी रद्द
मामले में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर हाईकोर्ट ने राकेश बजपेयी की आपराधिक अपील स्वीकार कर ली। अदालत ने जिलाधिकारी के 14 जून 2024 के कुर्की आदेश और विशेष न्यायालय के 9 जुलाई 2024 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें कुर्की की पुष्टि की गई थी। इसके साथ ही जिलाधिकारी को संबंधित संपत्ति तत्काल अपीलकर्ता को वापस सौंपने का निर्देश दिया गया।
फैसले में अदालत ने संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई के लिए आवश्यक कानूनी आधार पर जोर दिया। आदेश का केंद्र यह था कि गैंगस्टर एक्ट के तहत कुर्की करते समय कथित अपराध और संबंधित संपत्ति के अर्जन के बीच संबंध साबित करने वाली सामग्री होनी चाहिए।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भदोही के बजपेयी ढाबे की कुर्की रद्द करते हुए स्पष्ट किया कि गैंगस्टर एक्ट के तहत संपत्ति जब्त करने के लिए केवल आपराधिक मामले में नाम होना पर्याप्त नहीं है। प्रशासन को यह दिखाने के लिए ठोस आधार प्रस्तुत करना होगा कि संपत्ति अपराध से अर्जित धन से बनाई गई है। अदालत ने कुर्की के दोनों आदेश रद्द कर ढाबा तत्काल अपीलकर्ता को वापस सौंपने का निर्देश दिया।

