बजट:कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया
मुजफ्फरनगर। मोदी सरकार के बजट में कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया है। बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि एग्री इन्फ्रास्ट्रक्चर में निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए दस हजार नए किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) बनाए जाएंगे। और बुनियादी सुविधाओं पर अगले ५ सालों में ५ लाख करोड़ खर्च होंगे। हर मद के लिए आवंटित राशि वह राशि है जो फरवरी २०१९ में अंतरिम बजट के रूप में पेश की गई थी। सरकार कृषि क्षेत्र के बुनियादी ढांचे में जबरदस्त निवेश करेगी। कृषि पर पिछले वर्ष संशोधित बजट ८६६०२ करोड़ से बढ़ाकर इस वर्ष १५१५१८ करोड़ किया है।सरकार किसानों की जिंदगी में बदलाव लाने वाले प्राइवेट इंटरप्रिन्योरशिप को भी सपोर्ट करेगी। अर्थात किसानों की उगाई गई फसलों में मूल्यवर्धन के लिए प्राइवेट आंट्रप्रन्योरशिप को बढ़ावा दिया जायेगा।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यह भी कहा है कि ईज ऑफ डुईंग बिजनेस और ईज ऑफ लिविंग किसानों के लिए भी लागू होगा। बजट में खाद्यानों, दलहनों, तिलहनों, फलों और सब्जियों की स्व-पर्याप्तता और निर्यात पर विशेष रूप से जोर दिया गया है। लेकिन डीजल पर कर लगा कर किसान की लागत और बढ़ा दी है। वित्त मंत्री ने कहा कि हमारा लक्ष्घ्य है कि साल २०२४ तक गांव के हर घर तक जल पहुंचा जाए। इसमें हर घर में टंकी से पानी पहुंचाया जाएगा। पीएम सड़क योजना के तहत आवंटित किए जाने वाले ८०,२५० करोड़ रुपये के निवेश से गांवों में १,२५,००० किलोमीटर लंबी सड़कें बनाई जायेगीं।
वर्ष २०२२ तक सभी गांव की सभी फैमिली को बिजली और एलपीजी गैस की सुविधा दी जाएगी। प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत १.५ करोड़ मकान बने, २०१९-२० से २०२१-२२ के बीच १.९५ करोड़ मकान बनाने का लक्ष्य है। वित्त मंत्री ने कहा कि अभी तक २६ लाख घरों का निर्माण पूरा हो चुका है, २४ लाख को घर दिया जा चुका है। हमारा लक्ष्य २०२२ तक हर किसी को घर देने का है। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत २०१९-२० से २०२१-२२ तक पात्रता रखने वाले लाभार्थियों को यह आवास की सुविधा मिलेगी। यह अच्छा कदम है। जनधन खाताधारक महिलाओं को ५००० रुपये ओवरड्राफ्ट की सुविधा दी जाएगी और स्वयं सहायता समूह की हर वेरीफाइड महिलाओं के लिए अलग से एक लाख रुपये के मुद्रा लोन की व्यवस्था की जाएगी। कृषि से संबधित ग्रामीण उद्योग में ७५ हजार नये उद्यमी तैयार करने की योजना की घोषणा की गई है।
किसान सम्मान निधि स्कीम की राशि में ६००० के बजाय ८००० सलाना करने की उम्मीद थी, जिसका बजट में जिक्र नहीं है। वैसे भाजपा के दोबारा सत्ता में आते ही किसान सम्मान निधि स्कीम का विस्तार १४.५ करोड़ परिवारों तक कर दिया था। भाजपा ने लोकसभा चुनाव के दौरान रैलियों कहा था कि दोबारा सत्ता में आने पर किसान क्रेडिट कार्ड पर १ लाख तक का लोन बिना ब्याज दिया जाएगा। इसका भी बजट में कोई जिक्र नहीं क्या गया है। किसानों की खुदकशी, फसल के दाम, एमएसपी, कृषि मजदूर खेती की लागत जैसी बातों पर चर्चा नहीं की गई है। बजट में कोल्ड स्टोर, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, सिंचाई योजना, किसान क्रेडिट कार्ड, कृषि ऋण, सूखा के साथ जैविक खेती के बारे में कुछ नहीं किया गया है।वैसे कृषि सिंचाई पर बजट पिछले वर्ष के बजट ८२५१ करोड़ से बढ़ाकर इस वर्ष ९६८२ करोड़ किया है। डेयरी कार्यों को बढ़ावा दिया जाएगा। और दूध खरीदने और बेचने के लिए नई सुविधा देंगे।
सरकार ने डेयरी उद्योग को बढ़ावा देने की बात तो की है, लेकिन इसके लिए क्या योजना है इसके बारे में कुछ नहीं बताया है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में सुधार किए जाने के उम्मीद थी ताकि हर किसान को नुकसान होने पर क्लेम मिल सके। इस पर कोई घोषणा नहीं की गई है। आवारा पशु के प्रकोप से मुकाबला करने के लिए किसान को विशेष अनुदान मिले, वित्त मंत्री ने इसके बारे में कुछ नहीं बताया है। भारत में १०.०७ करोड़ किसान परिवारों में से (कुल परिवारों का ४८ प्रतिशत) ५२.५ प्रतिशत क़र्ज़ में दबे हुए हैं। वर्ष २०१७ में एक किसान परिवार की कुल मासिक आय ८,९३१ रुपये (फसल से आय ३,८५१ रुपये, पशुधन से ७११ रूपये, मजदूरी से ३०२५ रूपये और अन्य स्रोतों २०५५ रूपये) थी। यह कैसे बढ़ेगी इसको देखना बहुत जरुरी है। देश में अभी भी आर्थिक मानकों पर किसान बेहद असुरक्षित हैं, कम आय, बढ़ती लागत व उचित एमएसपी न मिलना इसके मुख्य कारण है। कृषि पर लगभग दो गुणा बजट सराहनीय है, लेकिन कुछ ज़रूरी घोषणाओं को दरकिनार करना उचित नहीं रहा|

