उत्तर प्रदेश

Aligarh में बेटी ने निभाया बेटे का फर्ज, पिता की अर्थी को 19 साल की निमि ने दिया कंधा; भावुक हुआ पूरा मोहल्ला

Aligarh में सामने आई एक ऐसी तस्वीर ने लोगों को भावुक कर दिया, जिसमें एक 19 वर्षीय बेटी ने अपने पिता की अंतिम यात्रा में आगे बढ़कर अर्थी को कंधा दिया। अलीगढ़ के सासनी गेट क्षेत्र स्थित ब्राह्मनपुरी में जब पिता की अंतिम यात्रा निकली तो परिवार और रिश्तेदारों के बीच मौजूद लोगों की नजरें उस पल पर टिक गईं, जब बेटी निमि गुप्ता ने स्वयं आगे आकर अपने पिता की अर्थी को कंधा दिया।

निमि का यह कदम केवल पिता को अंतिम विदाई देने का भावुक क्षण नहीं था, बल्कि उस सामाजिक सोच को भी चुनौती देता दिखाई दिया जिसमें अंतिम संस्कार और अर्थी को कंधा देने जैसे संस्कारों को अक्सर बेटों से जोड़कर देखा जाता है। पिता के निधन के बाद बेटी ने बिना किसी झिझक के आगे बढ़कर अपनी जिम्मेदारी निभाई और उन्हें अंतिम यात्रा पर विदा किया।

19 साल की निमि दिल्ली में रहकर पढ़ाई कर रही हैं। पिता के निधन की खबर मिलते ही वह तत्काल अलीगढ़ पहुंचीं। मंगलवार को जब अंतिम यात्रा शुरू हुई तो उन्होंने पिता की अर्थी को कंधा दिया। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद रिश्तेदारों और मोहल्ले के लोगों की आंखें नम हो गईं।

ब्राह्मनपुरी में अंतिम यात्रा के दौरान भावुक हुआ माहौल

अलीगढ़ के सासनी गेट क्षेत्र के ब्राह्मनपुरी निवासी निमिष गुप्ता का सोमवार रात इलाज के दौरान निधन हो गया था। मंगलवार को उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई।

परिवार के लिए यह बेहद कठिन समय था। पिता को अंतिम विदाई देने के लिए रिश्तेदार, परिचित और आसपास के लोग एकत्र हुए थे। इसी दौरान जब अर्थी को कंधा देने की बारी आई तो 19 वर्षीय बेटी निमि आगे बढ़ीं।

उन्होंने पिता की अर्थी को कंधा दिया और अंतिम यात्रा में शामिल हुईं।

बेटी को इस तरह पिता के अंतिम सफर में जिम्मेदारी निभाते देखकर वहां मौजूद लोगों का भावुक होना स्वाभाविक था। कई लोगों की आंखों से आंसू छलक पड़े और लोगों ने निमि के साहस की सराहना की।

पिता की अर्थी को कंधा देकर बेटी ने पेश की मिसाल

भारतीय समाज में बेटे को अक्सर परिवार की जिम्मेदारियों और अंतिम संस्कार से जुड़ी परंपराओं के साथ जोड़ा जाता है। हालांकि बदलते समय के साथ बेटियां भी परिवार की जिम्मेदारियों को बराबरी से निभा रही हैं।

निमि गुप्ता का यह कदम इसी बदलाव की एक भावुक तस्वीर बन गया।

उन्होंने किसी औपचारिक घोषणा या दिखावे के बजाय उस समय पिता के साथ खड़े होने का फैसला किया, जब परिवार सबसे कठिन दौर से गुजर रहा था।

पिता की अर्थी को कंधा देते समय निमि के चेहरे पर भावनाओं का गहरा असर दिखाई दे रहा था। आसपास मौजूद लोग भी इस दृश्य को देखकर भावुक हो गए।

निमिष गुप्ता थे हार्डवेयर कारोबारी

ब्राह्मनपुरी निवासी निमिष गुप्ता हार्डवेयर का कारोबार करते थे। परिवार के मुताबिक, करीब 15 वर्ष पहले एक सड़क हादसे में उन्होंने अपना एक हाथ गंवा दिया था।

यह हादसा उनकी जिंदगी के लिए बेहद बड़ा झटका था, लेकिन उन्होंने परिस्थितियों के आगे हार नहीं मानी।

एक हाथ गंवाने के बाद भी उन्होंने अपनी जिंदगी को दोबारा व्यवस्थित किया और कारोबार को संभालना जारी रखा।

परिवार के अनुसार उन्होंने एक हाथ से गाड़ी चलाना सीखा और अपने हार्डवेयर कारोबार को आगे बढ़ाया।

एक हाथ गंवाने के बाद भी नहीं टूटा हौसला

निमिष गुप्ता की जिंदगी संघर्ष और आत्मविश्वास की कहानी रही। सड़क हादसे में एक हाथ गंवाने के बावजूद उन्होंने अपने काम और परिवार की जिम्मेदारियों को निभाना जारी रखा।

जहां ऐसी स्थिति किसी व्यक्ति को लंबे समय तक मानसिक और शारीरिक रूप से प्रभावित कर सकती है, वहीं निमिष ने परिस्थितियों के सामने खुद को कमजोर नहीं पड़ने दिया।

उन्होंने अपने काम को जारी रखा और परिवार के लिए मजबूती से खड़े रहे।

उनके परिवार के लिए उनका यह संघर्ष ही उनकी सबसे बड़ी पहचान बन गया था।

बेटियों की पढ़ाई को बनाया प्राथमिकता

निमिष गुप्ता ने अपनी दोनों बेटियों की शिक्षा को लेकर भी कोई समझौता नहीं किया।

परिवार के अनुसार उन्होंने अपनी बेटियों निमि गुप्ता और कनिष्का गुप्ता को उच्च शिक्षा दिलाने में पूरी कोशिश की।

दोनों बेटियां दिल्ली में रहकर पढ़ाई कर रही हैं।

बेटियों को आगे बढ़ाने और उच्च शिक्षा दिलाने की उनकी सोच उस परिवार की प्राथमिकताओं को भी दर्शाती है, जिसमें बेटियों की शिक्षा को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया।

आज पिता के निधन के बाद बड़ी बेटी निमि का जिस तरह सामने आकर जिम्मेदारी निभाना परिवार के लिए गर्व और भावुकता दोनों का क्षण बन गया।

पिता की मौत से छह दिन पहले तक सब सामान्य था

परिवार के अनुसार, निमिष गुप्ता की तबीयत बिगड़ने की घटना उनके कारखाने में हुई।

घटना से करीब छह दिन पहले वह अपने कारखाने में मौजूद थे। उस समय कारखाने का स्टाफ अभी वहां नहीं पहुंचा था।

इसी दौरान उन्होंने एक हार्डवेयर की पेटी उठाकर उसे दूसरी जगह रखने की कोशिश की।

एक हाथ से पेटी उठाने के प्रयास में उनके शरीर पर काफी खिंचाव पड़ा।

इसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ने लगी।

हार्डवेयर की पेटी उठाने के बाद बिगड़ी हालत

बताया गया है कि पेटी उठाने के दौरान खिंचाव के चलते उनकी रीढ़ की हड्डी से खून निकलने जैसी गंभीर स्थिति बनी और इसके बाद उन्हें पैरालाइसिस जैसे लक्षण दिखाई देने लगे।

अचानक स्वास्थ्य बिगड़ने से परिवार में चिंता बढ़ गई।

परिजन उन्हें तत्काल इलाज के लिए रामघाट रोड स्थित एक निजी नर्सिंग होम लेकर पहुंचे।

वहां चिकित्सकों ने उनकी स्थिति को गंभीर बताया।

निजी नर्सिंग होम में चलता रहा इलाज

परिवार के अनुसार, निजी नर्सिंग होम में डॉक्टरों ने निमिष गुप्ता की हालत गंभीर बताई थी।

इसके बाद उनका उपचार शुरू किया गया। परिवार को उम्मीद थी कि इलाज के बाद उनकी स्थिति में सुधार आएगा।

लेकिन उनकी हालत गंभीर बनी रही।

परिवार के लिए अगले कुछ दिन बेहद तनावपूर्ण रहे। एक तरफ अचानक आई स्वास्थ्य समस्या थी, दूसरी तरफ इलाज के बावजूद हालत में अपेक्षित सुधार नहीं हो रहा था।

सोमवार रात इलाज के दौरान मौत

कई दिनों तक इलाज चलने के बाद सोमवार रात निमिष गुप्ता ने दम तोड़ दिया।

उनके निधन की खबर परिवार और परिचितों के लिए बेहद दुखद थी।

एक ऐसे व्यक्ति की अचानक मौत हो गई जिसने जीवन में एक हाथ खोने के बाद भी अपने परिवार और कारोबार की जिम्मेदारियां संभाली थीं।

उनके निधन के बाद परिवार में मातम छा गया।

दिल्ली से तुरंत अलीगढ़ पहुंचीं 19 वर्षीय बेटी

निमिष गुप्ता की बड़ी बेटी निमि दिल्ली में रहकर पढ़ाई कर रही हैं।

पिता के निधन की खबर मिलते ही वह दिल्ली से तुरंत अलीगढ़ पहुंचीं।

पिता के निधन के बाद बेटी के लिए यह बेहद कठिन समय था। लेकिन अंतिम विदाई के समय उन्होंने खुद को संभाला और पिता के अंतिम सफर में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाने का फैसला किया।

मंगलवार को जब अंतिम यात्रा शुरू हुई तो निमि ने आगे बढ़कर पिता की अर्थी को कंधा दिया।

जब बेटी ने खुद आगे बढ़कर थामा पिता की अर्थी का भार

अंतिम यात्रा के दौरान मौजूद लोगों की नजरें उस समय निमि पर टिक गईं, जब उन्होंने पिता की अर्थी को अपने कंधे पर उठाया।

यह दृश्य परिवार और मोहल्ले के लोगों के लिए बेहद भावुक था।

निमि ने यह साबित किया कि पिता के प्रति जिम्मेदारी और प्रेम किसी रिश्ते को केवल सामाजिक परंपराओं के आधार पर सीमित नहीं किया जा सकता।

बेटी ने उस अंतिम क्षण में अपने पिता के साथ खड़े होकर उन्हें सम्मान के साथ विदाई दी।

‘बेटे का फर्ज’ निभाने की चर्चा

निमि के इस कदम को वहां मौजूद लोगों ने बेटे के समान जिम्मेदारी निभाने के रूप में देखा।

हालांकि पिता की अंतिम यात्रा में बेटी का शामिल होना कोई असामान्य या निषिद्ध बात नहीं है, लेकिन कई परिवारों और समुदायों में आज भी अंतिम संस्कार की कुछ जिम्मेदारियां पारंपरिक रूप से बेटों से जोड़कर देखी जाती हैं।

ऐसे माहौल में निमि का आगे आना वहां मौजूद लोगों के लिए खास अनुभव था।

लोगों ने उनके साहस और पिता के प्रति समर्पण की सराहना की।

रूढ़ सोच से आगे बढ़ता समाज

निमि की कहानी केवल एक परिवार की निजी त्रासदी नहीं है। यह उस बदलती सामाजिक सोच की भी तस्वीर है जिसमें बेटियां परिवार की जिम्मेदारियों को निभाने में पीछे नहीं हैं।

बेटियां आज शिक्षा, रोजगार, कारोबार और परिवार की जिम्मेदारियों में बराबर की भूमिका निभा रही हैं।

अंतिम संस्कार जैसे पारंपरिक अवसरों पर भी कई परिवार अब बेटियों को आगे आने से नहीं रोकते।

निमि ने अपने पिता की अंतिम यात्रा में जो किया, वह इसी बदलते सामाजिक नजरिए की भावुक झलक है।

पिता ने बेटियों को पढ़ाया, बेटी ने अंतिम सफर में साथ दिया

इस घटना का सबसे भावुक पहलू यह भी है कि जिस पिता ने अपनी दोनों बेटियों की उच्च शिक्षा को महत्व दिया, उसी पिता की अंतिम यात्रा में बड़ी बेटी ने आगे बढ़कर अपनी जिम्मेदारी निभाई।

निमिष गुप्ता ने दोनों बेटियों निमि और कनिष्का को पढ़ाने में कोई कमी नहीं छोड़ी।

दोनों बेटियां दिल्ली में पढ़ाई कर रही हैं।

ऐसे में निमि का पिता की अर्थी को कंधा देना उनके रिश्ते की गहराई और पिता से मिले संस्कारों की एक भावुक अभिव्यक्ति के रूप में देखा जा रहा है।

15 साल पहले हादसा, फिर भी जिंदगी से नहीं मानी हार

निमिष गुप्ता के जीवन की एक महत्वपूर्ण घटना करीब 15 साल पहले हुई थी, जब सड़क हादसे में उन्होंने अपना एक हाथ खो दिया था।

उस हादसे के बाद उनकी जिंदगी बदल गई, लेकिन उन्होंने परिस्थितियों के सामने हार नहीं मानी।

उन्होंने अपने दैनिक जीवन और कारोबार को नए तरीके से व्यवस्थित किया।

एक हाथ से गाड़ी चलाना सीखा और कारोबार की जिम्मेदारियां संभालते रहे।

परिवार के लिए वह मुश्किल परिस्थितियों में भी हिम्मत बनाए रखने की मिसाल थे।

कारोबार संभालते हुए बेटियों के भविष्य की चिंता

निमिष गुप्ता की जिंदगी में परिवार और कारोबार दोनों महत्वपूर्ण रहे।

एक हाथ खोने के बावजूद उन्होंने हार्डवेयर कारोबार को जारी रखा। साथ ही बेटियों की शिक्षा पर भी ध्यान दिया।

उनकी कोशिश थी कि बेटियां अच्छी शिक्षा हासिल करें और अपने पैरों पर खड़ी हों।

आज उनके निधन के बाद बेटियों और परिवार के लिए यह कमी आसानी से पूरी होने वाली नहीं है।

मंगलवार को नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई

निमिष गुप्ता की अंतिम यात्रा मंगलवार को निकली।

परिवार, रिश्तेदार और मोहल्ले के लोग उनके अंतिम सफर में शामिल हुए।

लेकिन इस यात्रा की सबसे भावुक तस्वीर उनकी 19 वर्षीय बेटी निमि की रही।

जब उन्होंने पिता की अर्थी को कंधा दिया तो आसपास मौजूद कई लोगों की आंखें भर आईं।

पिता को खोने का दर्द अपनी जगह था, लेकिन उसी दर्द के बीच बेटी का इस तरह मजबूत होकर सामने आना लोगों को भावुक कर गया।

मोहल्ले में हुई बेटी के साहस की चर्चा

अंतिम यात्रा के बाद ब्राह्मनपुरी में निमि के इस कदम की चर्चा रही।

लोगों ने कहा कि पिता के प्रति बेटी का प्रेम और सम्मान किसी से कम नहीं होता।

निमि ने जिस तरह अंतिम यात्रा में अपनी जिम्मेदारी निभाई, उसने लोगों को भावुक करने के साथ-साथ बेटियों को लेकर बनी पारंपरिक धारणाओं पर भी सोचने के लिए मजबूर किया।

कनिष्का और परिवार के लिए भी बेहद कठिन समय

निमिष गुप्ता के परिवार में उनकी पत्नी श्वेता और दोनों बेटियां निमि तथा कनिष्का हैं।

अचानक पिता और परिवार के मुखिया का निधन पूरे परिवार के लिए गहरा सदमा है।

दोनों बेटियां दिल्ली में रहकर पढ़ाई कर रही हैं। पिता के साथ उनकी यादें अब उनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहेंगी।

ऐसे समय में परिवार को भावनात्मक सहारे की सबसे ज्यादा जरूरत होती है।

एक पिता की कहानी, जिसे बेटी ने अंतिम क्षणों में सम्मान दिया

निमिष गुप्ता की जिंदगी में संघर्ष कम नहीं था। एक सड़क हादसे में हाथ गंवाने के बाद भी उन्होंने अपना जीवन फिर से खड़ा किया।

उन्होंने कारोबार संभाला, परिवार की जिम्मेदारियां निभाईं और बेटियों की शिक्षा को प्राथमिकता दी।

लेकिन अचानक स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद उनका निधन हो गया।

उनकी अंतिम यात्रा में बड़ी बेटी निमि का आगे आकर अर्थी को कंधा देना उनके पूरे जीवन और पिता-बेटी के रिश्ते को एक बेहद भावुक मोड़ देता है।

बेटी के कंधे पर पिता की अंतिम यात्रा

आमतौर पर अंतिम यात्रा की तस्वीरों में बेटों को अर्थी को कंधा देते देखा जाता है। लेकिन अलीगढ़ के ब्राह्मनपुरी में मंगलवार को एक अलग तस्वीर सामने आई।

19 वर्षीय निमि ने पिता की अर्थी को कंधा दिया और अंतिम यात्रा में उनके साथ चलीं।

यह दृश्य उन लोगों के लिए भावुक था, जो इस परिवार को लंबे समय से जानते हैं।

निमि ने उस क्षण किसी सामाजिक टिप्पणी या बहस की परवाह किए बिना अपने पिता के प्रति अपना कर्तव्य निभाया।

पिता के संघर्ष की विरासत अब बेटियों के साथ

निमिष गुप्ता ने जीवन में कठिन परिस्थितियों का सामना किया और अपनी बेटियों को शिक्षा दिलाकर आगे बढ़ाने की कोशिश की।

उनकी बेटियों के सामने अब पिता की यादें और उनके संघर्ष की विरासत है।

निमि का अंतिम यात्रा में आगे आना यह भी दिखाता है कि पिता द्वारा दिए गए आत्मविश्वास और संस्कार बेटी के जीवन में कितनी गहराई तक मौजूद हो सकते हैं।

अलीगढ़ की यह तस्वीर लंबे समय तक याद रहेगी

सासनी गेट क्षेत्र के ब्राह्मनपुरी में हुई यह घटना परिवार के लिए सबसे दुखद दिन था, लेकिन इसी दिन निमि ने ऐसा साहस दिखाया जिसे वहां मौजूद लोग लंबे समय तक याद रख सकते हैं।

एक बेटी ने अपने पिता को अंतिम विदाई देते हुए न केवल उनके प्रति अपने प्रेम का प्रदर्शन किया, बल्कि यह भी दिखाया कि जिम्मेदारी निभाने के लिए रिश्ते का नाम नहीं, भावना और साहस मायने रखता है।

निमिष गुप्ता की अंतिम यात्रा में बेटी के कंधे का वह दृश्य परिवार और मोहल्ले के लिए एक भावुक स्मृति बन गया।

अलीगढ़ के सासनी गेट क्षेत्र के ब्राह्मनपुरी में 19 वर्षीय निमि गुप्ता ने अपने पिता निमिष गुप्ता की अंतिम यात्रा में अर्थी को कंधा देकर उन्हें अंतिम विदाई दी। निमिष गुप्ता हार्डवेयर कारोबारी थे और करीब 15 वर्ष पहले एक सड़क हादसे में अपना एक हाथ गंवाने के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी। परिवार के अनुसार उन्होंने एक हाथ से गाड़ी चलाना सीखा, कारोबार संभाला और अपनी दोनों बेटियों निमि तथा कनिष्का की उच्च शिक्षा को प्राथमिकता दी। करीब छह दिन पहले कारखाने में हार्डवेयर की पेटी उठाने के दौरान उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। इलाज के दौरान सोमवार रात उनका निधन हो गया। दिल्ली में पढ़ाई कर रही बड़ी बेटी निमि सूचना मिलते ही अलीगढ़ पहुंचीं और मंगलवार को अंतिम यात्रा के दौरान खुद आगे बढ़कर पिता की अर्थी को कंधा दिया। इस भावुक दृश्य ने रिश्तेदारों और मोहल्ले में मौजूद लोगों की आंखें नम कर दीं।

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