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Muzaffarnagar मोरना में किसानों का गुस्सा फूटा! निरगाजनी झाल के पास क्षतिग्रस्त पनचक्की पुल चार माह से बंद – प्रशासन की लापरवाही पर प्रदर्शन की चेतावनी

मोरना (Muzaffarnagar) – क्षेत्र के निरगाजनी झाल के पास स्थित पनचक्की पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद चार माह से बंद पड़े रहने से ग्रामीणों और किसानों की परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। पुल की मरम्मत या पुनर्निर्माण की दिशा में कोई ठोस कदम न उठाने पर ग्रामीणों ने धरना-प्रदर्शन की चेतावनी दी है।

यह पुल भोपा थाना क्षेत्र में आता है और सिकंदरपुर, रहमतपुर व गड़वाड़ा जैसे कई गांवों को जोड़ता है। पुल दरकने के बाद प्रशासन ने सुरक्षा के दृष्टिकोण से पुल पर दीवार खड़ी कर वाहनों का आवागमन पूरी तरह बंद कर दिया था, लेकिन चार महीने बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।


खेती-बाड़ी ठप, किसानों की मुश्किलें बढ़ीं – खेतों तक पहुंचने में 16 किलोमीटर का चक्कर

क्षेत्र के किसानों का कहना है कि पुल बंद होने से उनका कृषि कार्य बुरी तरह प्रभावित हो गया है। गांव गड़वाड़ा निवासी किसान हरेन्द्र सिंह ने बताया,
“हमारे खेत नहर के दूसरी ओर हैं। हमें पशुओं के लिए चारा लाने में दो-दो बार बोगी बदलनी पड़ती है। पहले आधा किलोमीटर में जो काम होता था, अब 16 किलोमीटर घूमकर करना पड़ता है।”

उन्होंने बताया कि ट्रैक्टरों में डीजल की खपत बढ़ गई है, जिससे खर्च कई गुना बढ़ गया है। वहीं, समय भी अधिक लगने से खेती का शेड्यूल पूरी तरह बिगड़ गया है।


किसान देवेंद्र सिंह बोले – अधिकारी सिर्फ जिम्मेदारी टाल रहे हैं

किसान देवेंद्र सिंह ने बताया कि वे पिछले तीन-चार महीनों से नए पुल के निर्माण के लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) और सिंचाई विभाग के दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन दोनों विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं।

उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा,
“हम किसान हैं, रोज खेतों में जाते हैं। पुल बंद होने से हमारा जीवन ठहर गया है। अधिकारी फाइलें इधर-उधर कर रहे हैं, लेकिन जमीन पर काम कोई नहीं कर रहा।”

देवेंद्र सिंह ने बताया कि इस पुल से गुजरना अब नामुमकिन हो गया है और प्रशासन की अनदेखी ने ग्रामीणों को बेबस बना दिया है।


राजीव कुमार ने कहा – पुल था जर्जर, पर मरम्मत से पहले बंद कर देना गलत निर्णय

गांव गड़वाड़ा के किसान राजीव कुमार ने बताया कि पनचक्की पुल की हालत पिछले कई वर्षों से खराब थी। उन्होंने कहा,
“अगर प्रशासन को पुल बंद करना ही था, तो पहले नया पुल बनाना चाहिए था। अब स्थिति यह है कि न नया पुल है और न रास्ता।”

राजीव ने बताया कि गांव के लोगों को नहर के पार अपने खेतों, स्कूलों और बाजारों तक पहुंचने के लिए 16 किलोमीटर का अतिरिक्त रास्ता तय करना पड़ रहा है। इससे न सिर्फ समय, बल्कि पैसा और ऊर्जा दोनों की बर्बादी हो रही है।


श्रद्धालु भी परेशान – शुक्रताल जाने वाले यात्रियों को वापस लौटना पड़ रहा है

पुल के बंद होने से केवल किसान ही नहीं, बल्कि शुक्रताल जाने वाले तीर्थ यात्रियों को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। श्रद्धालु विनय कुमार ने बताया कि कई लोग जानकारी के अभाव में इस पुल तक पहुंच जाते हैं, लेकिन वहां दीवार देखकर उन्हें वापस लौटना पड़ता है।

उन्होंने कहा, “शुक्रताल विश्वप्रसिद्ध तीर्थ है। प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु वहां जाते हैं। लेकिन पुल बंद होने से धार्मिक यात्राएं भी प्रभावित हो रही हैं।”

रात के समय वैकल्पिक मार्ग से गुजरना और भी खतरनाक बताया जा रहा है, क्योंकि संकरी सड़कों पर वाहन फिसलने या हादसे की आशंका रहती है।


प्रशासनिक विभागों की जिम्मेदारी टालने की प्रवृत्ति से बढ़ी समस्या

ग्रामीणों का आरोप है कि लोक निर्माण विभाग और सिंचाई विभाग के बीच तालमेल की कमी इस समस्या की मुख्य वजह है। पुल के निर्माण का जिम्मा तय न होने के कारण चार माह बीत जाने के बाद भी कोई कार्य प्रारंभ नहीं हुआ है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक विभागों के बीच स्पष्ट जिम्मेदारी नहीं तय की जाएगी, तब तक पुल निर्माण की उम्मीद व्यर्थ है।


ग्रामीणों ने दिया अल्टीमेटम – जल्द निर्माण नहीं हुआ तो होगा आंदोलन

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर आने वाले दिनों में पुल निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ, तो वे धरना-प्रदर्शन और चक्का जाम करेंगे।

गांव के हेम सिंह, देवेंद्र, ब्रह्मपाल, हरेंद्र, राजीव, सचिन और बबलू वर्मा ने संयुक्त बयान जारी कर कहा,
“हम प्रशासन से बार-बार गुहार लगा चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। अब हम सड़कों पर उतरने को तैयार हैं।”

उन्होंने यह भी मांग की कि जब तक नया पुल नहीं बन जाता, तब तक वैकल्पिक मार्ग या अस्थायी पुल की व्यवस्था की जाए ताकि किसानों और यात्रियों को राहत मिल सके।


शुक्रताल के तीर्थ पर्यटन पर असर, स्थानीय अर्थव्यवस्था पर संकट

पुल के क्षतिग्रस्त होने से न सिर्फ गांवों के बीच संपर्क टूटा है, बल्कि स्थानीय व्यापार और तीर्थ पर्यटन पर भी असर पड़ा है। दुकानदारों का कहना है कि तीर्थ यात्रियों की संख्या घटने से उनकी आमदनी लगभग आधी रह गई है।

गांव के दुकानदार सचिन कुमार ने बताया,
“पहले शुक्रताल जाने वाले हर यात्री यहां रुकता था। अब पुल बंद होने से ग्राहक नहीं आते। आर्थिक स्थिति बिगड़ रही है।”


प्रशासन से ग्रामीणों की गुहार – “या तो नया पुल बनाओ, या अस्थायी रास्ता दो”

ग्रामीणों का कहना है कि अब प्रशासन को जल्द निर्णय लेना होगा। या तो नया पुल तत्काल बनाया जाए, या तब तक अस्थायी पुल या लकड़ी का बैरिकेड मार्ग बनाया जाए ताकि रोजमर्रा की जिंदगी फिर से पटरी पर लौट सके।


मोरना क्षेत्र के निरगाजनी झाल के पास क्षतिग्रस्त पनचक्की पुल की समस्या अब सिर्फ असुविधा नहीं रही, बल्कि यह ग्रामीणों के जीवन और आजीविका का सवाल बन चुकी है। चार महीनों से प्रशासन की चुप्पी और विभागों की जिम्मेदारी टालने की प्रवृत्ति ने जनता का धैर्य समाप्त कर दिया है। अगर शीघ्र पुल निर्माण या वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई, तो मोरना में किसान आंदोलन तय है – और इसकी गूंज पूरे जनपद में सुनाई देगी।

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