माँ अन्नपूर्णा जयंती
🚩इस साल 2019 में माँ अन्नपूर्णा की जयंती मार्गशीर्ष मास की पूर्णिमा तिथि, 12 दिसंबर दिन गुरुवार को मनाई जाएगी है। अगर अन्न न हो तो धरती पर शायद जीवन भी संभव नहीं हो सकेगा, इसलिए तो अन्न को जीवन का अति महत्वपूर्ण अंग माना जाता है और जिनके उपर मां अन्नपूर्णा की कृपा हो जाये तो फिर उनके जीवन में कभी भी किसी चीज का अभाव नहीं रहता। शास्त्रों के अनुसार इस दिन रसोईघर में चूल्हे आदि का पूजन करने से घर परिवार में कभी भी अन्न और धन-धान्य की कमी नहीं रहती।
शास्त्रों में उल्लेख आता है कि एक बार जब धरती पर अन्न की कमी हो गयी तो जगतजननी मां पार्वती ने माँ अन्नपूर्णा का रूप लेकर धरती पृथ्वी लोक पर अन्न की पूर्ति की थी, जिस दिन माता अन्नपूर्णा धरती पर प्रगट हुई थी उस दिन मार्गशीर्ष मास की पूर्णिमा तिथि ही थी। तभी से मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन अन्नपूर्णा जयंती मनाई जाती है।
प्राचीन कथानुसार एक समय जब धरती पर पानी और अन्न समाप्त होने लगा जिससे चारों ओर हाहाकार मचने लगा और मनुष्य ने अन्न की समस्या से मुक्ति के लिए भगवान श्री ब्रह्मा जी एवं भगवान श्री विष्णु जी की आराधना प्रारंभ कर दी। मनुष्यों की करूण पुकार सुनकर श्री ब्रह्म देव एवं श्री विष्णु जी ने आदिदेव भगवान शिवजी की आराधना की जिससे प्रसन्न होकर शिवजी ने माता पार्वती से प्राणी मात्र की समस्या को दूर करने का आग्रह किया। दयालु माता पार्वती ने माँ अन्नपूर्णा का रूप धारण करके सभी की समस्या का समाधान कर धरती पर अन्न का भंडार भर दिया। तभी से सभी देवों के साथ धरती के मनुष्यों ने भी माँ अन्नपूर्णा की पूजा आराधना आरंभ कर दी।
👍अन्नपूर्णा जयंती के दिनघर की रसोई में ऐसे करें पूजन🎂
👍अन्नपूर्णा जयंती के दिन रसोईघर साफ सफाई करके गंगाजल छिड़कें।
👍भोजन पकाने वाले चूल्हे का हल्दी कुमकुम चावल पुष्प धुप दीपक जलाकर पूजन करें।
👍रसोई में ही माता पार्वती एवं भगवान शंकर जी की पूजा भी करें।
👍मां अन्नपूर्णा की पूजा भी रसोई घर में ही उपरोक्त विधि से करते हुए प्रार्थना करें कि हे माता हमारे घर परिवार में सदैव अन्न जल भरा रहे।
👍पूजन करने के बाद गरीबों को अपने घर में बना हुआ भोजन जरूर खिलावें।
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॥ 🔥श्रीअन्नपूर्णास्तोत्रम् अपरनाम अन्नपूर्णाष्टकम् 🔥॥
नित्यानन्दकरी वराभयकरी सौन्दर्यरत्नाकरी निर्धूताखिलघोरपावनकरी प्रत्यक्षमाहेश्वरी । var घोरपापनिकरी प्रालेयाचलवंशपावनकरी काशीपुराधीश्वरी भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी माताऽन्नपूर्णेश्वरी ॥ १॥
नानारत्नविचित्रभूषणकरी हेमाम्बराडम्बरी मुक्ताहारविलम्बमान विलसत् वक्षोजकुम्भान्तरी । काश्मीरागरुवासिता रुचिकरी काशीपुराधीश्वरी भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी माताऽन्नपूर्णेश्वरी ॥ २॥
योगानन्दकरी रिपुक्षयकरी धर्मार्थनिष्ठाकरी चन्द्रार्कानलभासमानलहरी त्रैलोक्यरक्षाकरी । सर्वैश्वर्यसमस्तवाञ्छितकरी काशीपुराधीश्वरी भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी माताऽन्नपूर्णेश्वरी ॥ ३॥
कैलासाचलकन्दरालयकरी गौरी उमा शङ्करी कौमारी निगमार्थगोचरकरी ओङ्कारबीजाक्षरी । मोक्षद्वारकपाटपाटनकरी काशीपुराधीश्वरी भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी माताऽन्नपूर्णेश्वरी ॥ ४॥
दृश्यादृश्य विभूतिवाहनकरी ब्रह्माण्डभाण्डोदरी लीलानाटकसूत्रभेदनकरी विज्ञानदीपाङ्कुरी । श्रीविश्वेशमनः प्रसादनकरी काशीपुराधीश्वरी भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी माताऽन्नपूर्णेश्वरी ॥ ५॥
उर्वी सर्वजनेश्वरी भगवती माताऽन्नपूर्णेश्वरी वेणीनीलसमानकुन्तलधरी नित्यान्नदानेश्वरी । सर्वानन्दकरी सदाशुभकरी काशीपुराधीश्वरी भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी माताऽन्नपूर्णेश्वरी ॥ ६॥
आदिक्षान्तसमस्तवर्णनकरी शम्भोस्त्रिभावाकरी काश्मीरा त्रिजलेश्वरी त्रिलहरी नित्याङ्कुरा शर्वरी । कामाकाङ्क्षकरी जनोदयकरी काशीपुराधीश्वरी भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी माताऽन्नपूर्णेश्वरी ॥ ७॥
देवी सर्वविचित्ररत्नरचिता दाक्षायणी सुन्दरी वामे स्वादुपयोधरा प्रियकरी सौभाग्य माहेश्वरी । भक्ताभीष्टकरी सदाशुभकरी काशीपुराधीश्वरी भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी माताऽन्नपूर्णेश्वरी ॥ ८॥
चन्द्रार्कानलकोटिकोटिसदृशा चन्द्रांशुबिम्बाधरी चन्द्रार्काग्निसमानकुण्डलधरी चन्द्रार्कवर्णेश्वरी । मालापुस्तकपाशसाङ्कुशधरी काशीपुराधीश्वरी भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी माताऽन्नपूर्णेश्वरी ॥ ९॥
क्षत्रत्राणकरी महाऽभयकरी माता कृपासागरी साक्षान्मोक्षकरी सदा शिवकरी विश्वेश्वरी श्रीधरी । दक्षाक्रन्दकरी निरामयकरी काशीपुराधीश्वरी भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी माताऽन्नपूर्णेश्वरी ॥ १०॥
अन्नपूर्णे सदापूर्णे शङ्करप्राणवल्लभे । ज्ञानवैराग्यसिद्ध्यर्थं भिक्षां देहि च पार्वति ॥ ११॥
माता मे पार्वती देवी पिता देवो महेश्वरः । बान्धवाः शिवभक्ताश्च स्वदेशो भुवनत्रयम् ॥ १२॥ ॥
🙏 इति श्रीशङ्करभगवतः कृतौ अन्नपूर्णास्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥🙏
