लेखक Geetanjali Shree 2022 अंतर्राष्ट्रीय बुकर प्राइज से सम्मानित
लेखक गीतांजलि श्री (Geetanjali Shree) की हिंदी से अंग्रेजी में अनुवादित (Translated) किए गए उपन्यास ‘टॉम ऑफ सैंड’ (Tomb of Sand) को प्रतिष्ठित 2022 अंतर्राष्ट्रीय बुकर प्राइज (International Booker Prize) से सम्मानित किया गया है। मूल रूप से यह उपन्यास हिंदी में ‘रेत समाधि’ के नाम के शीर्षक से लिखा गया है, जिसे अंग्रेजी में डेजी रॉकवेल ने अनुवाद किया है। यह पहला भारतीय उपन्यास जिसे इस पुरस्कार से नवाजा गया है।
गीतांजलि श्री (Geetanjali Shree) ने इस दौरान कहा कि “मैंने कभी बुकर प्राइज का कभी भी सपना नहीं देखा था। मैंने कभी भी इसके बारे में नहीं सोचा था, लेकिन यह मुझे मिला है। मैं प्रसन्न और सम्मानित महसूस कर रही हूं।”
बुकर प्राइज की लिस्ट में ‘टॉम ऑफ सैंड’ के साथ लॉन्ग लिस्ट में 13 कृतियां भी शामिल थीं, जिन्हें 11 अलग-अलग भाषाओँ से अंग्रेजी में अनुवाद किया गया है। गीतांजली (Geetanjali Shree) को बुकर प्राइज के साथ 50,000 ब्रिटिश पाउंड्स की राशि पुरस्कार के साथ मिली है, जिसे लेखक और अनुवादक में बांटा जाएगा।
अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता इस उपन्यास में एक 80 वर्षीय महिला की कहानी को बताया गया है जो अपने पति की मृत्यु के बाद डिप्रेशन में चली जाती है। अचानक से से वह एक दिन डिप्रेशन से बाहर आ जाती है और अपने अतीत का सामना करने पाकिस्तान पहुंच जाती है जो बंटवारे के वक्त उनका परिवार वहां छोड़कर आया था।
गौरतलब है कि ‘रेत समाधि’ गीतांजलि श्री Geetanjali Shree की पांचवां उपन्यास है। उन्होंने सबसे पहले उपन्यास ‘माई’ लिखकर लेखन की दुनिया में कदम रखा था। इसके अलावा उनका दूसरा उपन्यास ‘हमारा शहर उस बरस’ लिखा था जो सांप्रदायिकता और 90 के दशक की परिस्थितियों पर केंद्रित था।
फिर ‘तिरोहित’ जिसमें समलैंगिकता पर चर्चा की गई थी और फिर ‘खाली जगह’ नाम के शीर्षक से उनका चौथा उपन्यास आया और फिर उन्होंने ‘रेत समाधि’ उपन्यास लिखा, जिसे कुछ समय पहले लॉन्च किया गया था। बता दें, इस उपन्यास को हिंदी में राजकमल प्रकाशन की ओर से प्रकाशित किया जाता है।
गीतांजलि श्री (Geetanjali Shree) का जन्म उत्तर प्रदेश के मैनपुरी में हुआ। फिलहाल वह दिल्ली में रहती है उन्होंने उपन्यास के साथ कई कहानियों को भी लिखा है। उनके उपन्यासों का अंग्रेजी के साथ-साथ फ्रेंच, जर्मन, सर्बियन और कोरियाई भाषाओं में अनुवाद हो चुका है।
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