Muzaffarnagar: संत महेन्द्रपाल के निर्वाण दिवस पर सेवा की जगाई अलख
Muzaffarnagar २३ वर्ष पूर्व सन्त महेन्द्र पाल का गोलोक प्रस्थान हो गया। उसके उपरांत यहां उनकी समाधी बनाई गई। जिसमें दूर दूर से सन्त जी के शिष्य आकर नमन करते हैं। डाअशोक सिंघल ने बताया कि वे मूलरूप से ग्राम बोपाडा के रहने वाले हैं इसी कारण इस गांव मे आश्रम का निर्माण कराया गया है। उन्होंने कहा कि सन्त जी की प्रेरणा से वे मानवता के कार्यो के लिए पूर्णतरू समर्पित हैं। उन्होंने कहा कि मानवता पूर्ण कार्यो के कारण ही इस आश्रम का नाम मानवता धाम आश्रम रखा गया है।
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