उत्तर प्रदेश

Ayushman Yojana में 10 करोड़ का घोटाला: हज़रतगंज में दर्ज हुई एफआईआर, फर्जीवाड़े की परतें खुलीं

लखनऊ में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (Ayushman Yojana) और मुख्यमंत्री जन आरोग्य अभियान में अब तक का सबसे बड़ा घोटाला सामने आया है। कुल ₹9.94 करोड़ की हेराफेरी का मामला प्रकाश में आया है। इस फर्जीवाड़े की परतें खुलने के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था की जड़ों को हिलाने वाला यह घटनाक्रम राज्य और केंद्र दोनों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है।

💣39 अस्पतालों, 6239 फर्जी लाभार्थी और सैकड़ों फर्जी भुगतान

सचिस (SACHIS) एजेंसी के नोडल अधिकारी डॉ. ब्रजेश कुमार श्रीवास्तव द्वारा हज़रतगंज थाने में दर्ज एफआईआर के अनुसार, 39 निजी अस्पतालों में 6239 फर्जी लाभार्थियों के नाम पर भुगतान किया गया, जिससे कुल मिलाकर लगभग ₹10 करोड़ की धनराशि का दुरुपयोग हुआ।

💻ईमेल आईडी और लॉग-इन से हुआ हाई-टेक फर्जीवाड़ा

पुलिस रिपोर्ट में यह सामने आया है कि घोटालेबाज़ों ने एजेंसी के सीईओ, मैनेजर और लेखाधिकारी की ईमेल आईडी और लॉग-इन क्रेडेंशियल्स का दुरुपयोग किया। इसके ज़रिए अस्पतालों के पोर्टल पर इलाज का झूठा विवरण अपलोड किया गया और जांच के बिना ही भुगतान की संस्तुति कर दी गई।

📍ऐसे हुआ फर्जी भुगतान का पूरा खेल

आयुष्मान योजना के अंतर्गत लाभार्थियों के इलाज का ब्योरा अस्पताल की ओर से पोर्टल पर अपलोड किया जाता है। फिर एजेंसी जांच कर इसे स्वीकृति देती है, जिसके बाद लेखाधिकारी और सीईओ की मंजूरी से अंतिम भुगतान होता है। लेकिन इस घोटाले में सीधी प्रक्रिया को बायपास कर, फर्जी लॉग-इन से सीधे भुगतान की संस्तुति कर दी गई।

📊हर दिन 5 हजार लाभार्थियों को होता है भुगतान, उसी में हुई गड़बड़ी

सचिस एजेंसी के अनुसार, रोज़ाना लगभग 5,000 कार्ड धारकों को योजना के अंतर्गत भुगतान किया जाता है। लेकिन आंतरिक ऑडिट के दौरान यह अनियमितता पकड़ में आई। जांच में पाया गया कि संबंधित अस्पतालों को एजेंसी के किसी अधिकारी की ओर से स्वीकृति नहीं दी गई थी, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई।

🔍ऑडिट, पूछताछ और जांच में जुटी पुलिस, अधिकारी रडार पर

फिलहाल पुलिस ईमेल लॉग्स, ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड्स और ऑडिट डिटेल्स की बारीकी से जांच कर रही है। इस मामले में एजेंसी के उच्चाधिकारियों से पूछताछ शुरू कर दी गई है। लॉग-इन डिटेल्स के दुरुपयोग के पीछे किसका हाथ है, इसे लेकर साइबर क्राइम विभाग भी सक्रिय हो गया है।

💬राज्य स्तर पर मचा हड़कंप, स्वास्थ्य विभाग की साख पर सवाल

इस खुलासे के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर कई सवाल खड़े हो गए हैं। जिन अस्पतालों को भुगतान मिला, वे किसकी मिलीभगत से यह सब कर पाए, इसका खुलासा होना बाकी है। राज्य सरकार के उच्च अधिकारी भी इस मामले पर नजर रखे हुए हैं और मुख्यमंत्री कार्यालय से भी रिपोर्ट मांगी गई है।

⚠️पहले भी सामने आ चुके हैं इस तरह के फर्जीवाड़े

यह कोई पहला मामला नहीं है जब आयुष्मान योजना में फर्जीवाड़ा सामने आया है। पिछले वर्षों में कई बार छोटे स्तर पर गड़बड़ियों की सूचना मिली, लेकिन इस बार इतनी बड़ी रकम का फर्जीवाड़ा सामने आना न केवल चौंकाने वाला है, बल्कि इससे योजना की पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल उठते हैं।

🏥39 अस्पतालों की भूमिका संदिग्ध, लाइसेंस रद्द होने की आशंका

जिन 39 अस्पतालों के नाम इस घोटाले में सामने आए हैं, उनकी भूमिका पूरी तरह संदिग्ध मानी जा रही है। यदि जांच में इनकी संलिप्तता सिद्ध होती है, तो इनका लाइसेंस रद्द किया जा सकता है, साथ ही आपराधिक मुकदमे भी दर्ज किए जाएंगे।

📢सरकार ने दिए सख्त कार्रवाई के संकेत, दोषियों को नहीं बख्शा जाएगा

राज्य सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि दोषियों के खिलाफ सख्त और त्वरित कार्रवाई की जाएगी। सीएम ऑफिस ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि पूरी जांच पारदर्शिता से की जाए और एक-एक दोषी को सजा मिले। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा है कि आयुष्मान योजना गरीबों के लिए है, इसे भ्रष्टाचार की भेंट नहीं चढ़ने दिया जाएगा।

🛡️साइबर सुरक्षा और पोर्टल प्रणाली में बड़े बदलाव की तैयारी

इस घटना के बाद आयुष्मान योजना के पोर्टल की साइबर सुरक्षा को लेकर केंद्र और राज्य सरकार दोनों ही सतर्क हो गई हैं। जल्द ही इस पोर्टल को द्विस्तरीय सुरक्षा प्रणाली के तहत अपग्रेड किया जाएगा, ताकि भविष्य में इस तरह की धोखाधड़ी न दोहराई जा सके।

📝एफआईआर में शामिल मुख्य बिंदु

  • ₹9.94 करोड़ की धोखाधड़ी

  • 6239 फर्जी लाभार्थी

  • 39 अस्पतालों की संदिग्ध भूमिका

  • सीईओ, लेखाधिकारी, मैनेजर की ईमेल का दुरुपयोग

  • ई-हस्ताक्षर और पोर्टल लॉग-इन से फर्जीवाड़ा

  • बैंक से किया गया ऑनलाइन भुगतान

  • जांच में स्पष्ट हुई कोई अधिकारी स्वीकृति नहीं


यह मामला स्वास्थ्य क्षेत्र की सबसे बड़ी योजनाओं में से एक को कलंकित करने वाला है। यदि जांच में सच्चाई सामने आ जाती है, तो यह न केवल दोषियों को सलाखों के पीछे पहुंचाएगा बल्कि भविष्य में इस तरह के घोटालों पर अंकुश लगाने का रास्ता भी साफ करेगा। जनता की गाढ़ी कमाई से चलने वाली इस योजना का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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