Bareilly में मिलावटी खाद्य तेल का बड़ा खुलासा: 15 माह में 172 में से 66 नमूने फेल, स्वास्थ्य पर गंभीर खतरे की चेतावनी
News-Desk
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विभागीय जांच के अनुसार स्थानीय स्तर पर संचालित छोटी-छोटी फर्मों और गोदामों से कथित रूप से बड़े पैमाने पर खाद्य तेल की बिक्री की जा रही है। ऐसे उत्पादों की गुणवत्ता पर सवाल उठने के बाद स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी लोगों से खाद्य तेल खरीदते समय विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।
15 माह की जांच में सामने आए चिंताजनक आंकड़े
खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार पिछले 15 महीनों के दौरान जिले में कुल 172 नमूने जांच के लिए लिए गए।
इनमें से—
- 66 नमूने निर्धारित मानकों पर फेल पाए गए।
- इनमें कुछ नमूनों को मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक श्रेणी में भी रखा गया।
- संबंधित मामलों में न्यायालय में कार्रवाई शुरू की गई।
- अब तक 38 मामलों का निस्तारण किया जा चुका है।
- दोषी पाए गए पक्षों पर कुल 22.84 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
इन आंकड़ों ने जिले में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय स्तर पर तैयार ब्रांडों पर सबसे अधिक सवाल
विभागीय जांच में यह भी सामने आया कि फेल होने वाले अधिकांश नमूने स्थानीय स्तर पर तैयार किए जा रहे विभिन्न ब्रांडों से संबंधित हैं।
अधिकारियों के अनुसार प्रयोगशाला परीक्षण के दौरान कुछ नमूनों में ऐसे तत्व पाए गए जो खाद्य मानकों के अनुरूप नहीं थे और लंबे समय तक इनके सेवन से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
खाद्य सुरक्षा विभाग का कहना है कि जांच प्रक्रिया नियमों के अनुसार की जाती है और प्रत्येक मामले में प्रयोगशाला रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाती है।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में क्या रहे आंकड़े?
खाद्य सुरक्षा विभाग के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान कुल 138 नमूने एकत्र किए गए।
जांच रिपोर्ट में—
- 58 नमूने फेल पाए गए।
- 4 नमूनों को मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक श्रेणी में रखा गया।
इन मामलों में नियमानुसार कानूनी प्रक्रिया अपनाई गई और संबंधित पक्षों के विरुद्ध कार्रवाई शुरू की गई।
2026-27 में भी मिल रहे फेल नमूने
वर्तमान वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक 35 नमूने लिए जा चुके हैं।
इनमें से—
- 27 नमूनों की जांच रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है।
- 3 नमूने फेल पाए गए।
- 1 नमूना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पाया गया।
इससे संकेत मिलता है कि निगरानी और कार्रवाई के बावजूद मिलावट के मामले पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं।
इन ब्रांडों के नमूने जांच में फेल पाए गए
खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा जिन ब्रांडों के नमूने जांच में फेल पाए जाने की जानकारी दी गई है, उनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—
- तिल ऑयल किंग तिल प्योर
- राजहंस सोया हेल्थ
- समृद्धि
- न्यूट्रीप्लस
- चक्र
- क्लासिक
- खिलौना ब्रांड
- पंकीजा गोल्ड
- माउंटेन गोल्ड
- साथिया
विभाग की ओर से यह जानकारी जांच रिपोर्ट के आधार पर साझा की गई है। प्रत्येक मामले में संबंधित विधिक प्रक्रिया अलग-अलग स्तर पर चल रही है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने जताई गंभीर चिंता
जिला चिकित्सालय के फिजीशियन डॉ. एमएल अग्रवाल के अनुसार मिलावटी खाद्य पदार्थों का लगातार सेवन स्वास्थ्य के लिए गंभीर परिणाम उत्पन्न कर सकता है।
उन्होंने बताया कि ऐसे खाद्य तेलों का सबसे पहले प्रभाव पेट और आंतों पर पड़ सकता है। लंबे समय तक लगातार सेवन करने पर लीवर और किडनी भी प्रभावित होने का खतरा बढ़ जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मिलावट की प्रकृति और उसमें प्रयुक्त पदार्थों के आधार पर स्वास्थ्य संबंधी जोखिम अलग-अलग हो सकते हैं। इसलिए गुणवत्तापूर्ण और प्रमाणित खाद्य उत्पादों का उपयोग करना आवश्यक है।
तेल खरीदते समय किन बातों का रखें ध्यान?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि उपभोक्ताओं को खाद्य तेल खरीदते समय कुछ महत्वपूर्ण बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए—
- केवल विश्वसनीय विक्रेता से ही तेल खरीदें।
- पैकेजिंग, निर्माण तिथि और लेबल की जांच करें।
- संदिग्ध या अत्यधिक सस्ते उत्पादों से बचें।
- यदि संभव हो तो पारंपरिक तरीके से तैयार शुद्ध सरसों के तेल का उपयोग करें।
- किसी उत्पाद की गुणवत्ता पर संदेह होने पर संबंधित विभाग को सूचना दें।
डॉ. एमएल अग्रवाल ने सुझाव दिया कि यदि संभव हो तो सरसों खरीदकर पेरवाकर निकाला गया तेल उपयोग करना अधिक सुरक्षित विकल्प हो सकता है।
मिलावट पर रोक के लिए लगातार चल रही कार्रवाई
खाद्य सुरक्षा विभाग का कहना है कि जिले में नियमित रूप से नमूने लिए जा रहे हैं और प्रयोगशाला रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। विभाग का उद्देश्य उपभोक्ताओं को सुरक्षित खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराना और खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशासनिक निगरानी के साथ-साथ उपभोक्ताओं की जागरूकता भी मिलावट पर प्रभावी नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

