Bareilly: अदालत में अपने बयानों से पलट गई महिला-मुकदमा दर्ज करने के आदेश
Bareilly: जिसके खिलाफ बेटी को बहला-फुसलाकर भगा ले जाने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी उसी से शादी कर दी। बाद में रिपोर्ट दर्ज कराने वाली मां अदालत में अपने बयानों से पलट गई। विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट कुमार मंयक ने दोनों आरोपियों को दोषमुक्त करार देते हुए बरी कर दिया जबकि मुकदमा दर्ज कराने वाली लड़की की मां के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं।
महिला ने 25 जुलाई 2015 को बारादरी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराते हुए कहा था कि 23 जुलाई 2015 को चाचा व ताऊ उसके घर पर आए और उसकी लड़की के अपहरण की धमकी दी। इसके बाद दूसरे दिन 24 जुलाई को आरोपी व उसके साथ चार-पांच लड़के आए और लड़की को जबरदस्ती पकड़कर ले गए।
इसकी जब शिकायत की तो चाचा-ताऊ झगड़ा करने लगे। पुलिस ने आरोपी व उसके दोस्त के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच के बाद आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया। सुनवाई के दौरान किशोरी ने खुद को बालिग बताते हुए उम्र 19 साल बताई, लेकिन मेडिकल जांच के आधार पर उसकी उम्र 17 साल मानी गई।
घटनाक्रम का विवरण
बरेली में एक माँ द्वारा दर्ज की गई रिपोर्ट में अपनी नाबालिग बेटी के अपहरण और धमकी का मामला सामने आया। घटना 23 जुलाई 2015 की है जब महिला ने शिकायत की कि उसके चाचा और ताऊ घर पर आकर उसकी बेटी के अपहरण की धमकी दी। अगले दिन, 24 जुलाई को आरोपी और चार-पाँच लड़के आए और लड़की को जबरदस्ती पकड़कर ले गए। इस घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया और जांच के बाद आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया।
अदालती निर्णय
विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट, कुमार मयंक ने सुनवाई के दौरान दोनों आरोपियों को दोषमुक्त करार देते हुए बरी कर दिया जबकि रिपोर्ट दर्ज कराने वाली माँ के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए। अदालत में पेश होने पर, किशोरी ने खुद को बालिग बताते हुए अपनी उम्र 19 साल बताई, लेकिन मेडिकल जांच के आधार पर उसकी उम्र 17 साल मानी गई।
सामाजिक प्रभाव
इस प्रकार की घटनाएँ समाज पर गहरा प्रभाव डालती हैं। नाबालिगों के अपहरण और जबरदस्ती शादी के मामले केवल एक परिवार तक सीमित नहीं रहते, बल्कि यह पूरे समाज को प्रभावित करते हैं।
1. शिक्षा और स्वास्थ्य पर प्रभाव
- शिक्षा में रुकावट: नाबालिग लड़कियों का अपहरण और शादी उनके शिक्षा के अधिकार को बाधित करता है। इससे उनकी शिक्षा अधूरी रह जाती है, जिससे उनके भविष्य के अवसर सीमित हो जाते हैं।
- स्वास्थ्य पर प्रभाव: छोटी उम्र में विवाह और मातृत्व से लड़कियों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। गर्भावस्था के दौरान जटिलताएँ और मातृत्व की जिम्मेदारियाँ उनके स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती हैं।
2. कानूनी और मानवाधिकार के मुद्दे
- कानूनी प्रक्रियाओं की चुनौती: इस प्रकार के मामलों में अक्सर कानूनी प्रक्रियाओं का दुरुपयोग होता है। रिपोर्ट दर्ज कराने और फिर बयानों से पलटने जैसी घटनाएँ न्याय प्रणाली में विश्वास को कमजोर करती हैं।
- मानवाधिकार का उल्लंघन: नाबालिगों के अपहरण और जबरदस्ती शादी उनके मानवाधिकारों का उल्लंघन है। यह उनके जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार को छीनता है।
3. मानसिक और सामाजिक दबाव
- मानसिक तनाव: नाबालिग लड़कियों और उनके परिवारों को इस प्रकार की घटनाओं से मानसिक तनाव और चिंता का सामना करना पड़ता है।
- सामाजिक कलंक: ऐसी घटनाएँ समाज में लड़कियों और उनके परिवारों पर कलंक लगाती हैं। इससे उनके सामाजिक जीवन में अनेक समस्याएँ उत्पन्न होती हैं।
निवारण के उपाय
इन समस्याओं का समाधान समाज, सरकार और परिवारों के समन्वित प्रयास से ही संभव है।
1. शिक्षा और जागरूकता
- शिक्षा का प्रसार: लड़कियों की शिक्षा को प्रोत्साहित करना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना नाबालिग विवाह को रोकने में सहायक हो सकता है।
- जागरूकता अभियान: समाज में जागरूकता फैलाना और कानूनी अधिकारों के बारे में जानकारी देना अत्यंत आवश्यक है।
2. कानूनी सुधार
- कानून का कड़ाई से पालन: नाबालिग विवाह और अपहरण के मामलों में कानून का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए। दोषियों को सख्त सजा दी जानी चाहिए ताकि अन्य लोगों को इससे सबक मिले।
- मुकदमे की त्वरित सुनवाई: ऐसे मामलों की त्वरित सुनवाई और निष्पक्ष न्याय सुनिश्चित करना चाहिए ताकि पीड़ितों को न्याय मिल सके।
3. सामाजिक समर्थन
- समुदाय का सहयोग: समाज के हर वर्ग को इस प्रकार की घटनाओं के खिलाफ एकजुट होना चाहिए और पीड़ितों को सहयोग प्रदान करना चाहिए।
- परिवार का समर्थन: परिवारों को अपनी बेटियों का समर्थन करना चाहिए और उन्हें सशक्त बनाना चाहिए ताकि वे इस प्रकार की समस्याओं का सामना कर सकें।
नाबालिग लड़कियों का अपहरण और जबरदस्ती शादी एक गंभीर सामाजिक समस्या है जो समाज के प्रत्येक वर्ग को प्रभावित करती है। इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए समाज, सरकार और परिवारों को मिलकर कार्य करना होगा। शिक्षा, जागरूकता, कानूनी सुधार और सामाजिक समर्थन के माध्यम से ही इस समस्या का समाधान संभव है।
समाज को चाहिए कि वह इस प्रकार की घटनाओं के खिलाफ एकजुट हो और पीड़ितों को न्याय दिलाने में सहयोग करे। नाबालिग लड़कियों का अपहरण और जबरदस्ती शादी एक अपराध है और इसे समाप्त करने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करना होगा।

