Donald Trump का धमाका: “अमेरिका करेगा फिर से परमाणु हथियारों का टेस्ट!” — चीन और रूस से बराबरी का एलान, वैश्विक राजनीति में मचा भूचाल🔥
वॉशिंगटन डीसी: दुनिया की सबसे बड़ी ताकत माने जाने वाले अमेरिका में एक बार फिर परमाणु हथियारों की टेस्टिंग को लेकर भूचाल मच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक चौंकाने वाला ऐलान करते हुए कहा कि उन्होंने रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) को आदेश दिया है कि अमेरिका तुरंत परमाणु हथियारों की टेस्टिंग शुरू करे, ताकि चीन और रूस के बराबर शक्ति प्रदर्शन किया जा सके।
ट्रंप का यह बयान न केवल अमेरिकी राजनीति में हलचल मचा गया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी तनाव और रणनीतिक चिंताओं को बढ़ा रहा है।
ट्रंप का बड़ा आदेश: “बराबरी के स्तर पर शुरू होगी परमाणु टेस्टिंग”
ट्रंप ने अपनी पोस्ट में लिखा —
“दूसरे देशों की टेस्टिंग को देखते हुए मैंने डिपार्टमेंट ऑफ वॉर को आदेश दिया है कि हमारे परमाणु हथियारों की टेस्टिंग बराबरी के आधार पर शुरू की जाए। यह प्रक्रिया तुरंत शुरू होगी।”
उनकी इस घोषणा ने अमेरिकी रक्षा तंत्र में अचानक हलचल पैदा कर दी। कई विश्लेषकों का मानना है कि यह निर्णय अमेरिका की रणनीतिक नीति में बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।
चीन-रूस से प्रतिस्पर्धा की नई शुरुआत
इस बयान के तुरंत बाद रक्षा विशेषज्ञों ने बताया कि ट्रंप का यह कदम चीन और रूस से बढ़ती प्रतिस्पर्धा का परिणाम है। दरअसल, बीते कुछ महीनों में रूस और चीन दोनों ने अपने-अपने परमाणु एवं हाइपरसोनिक मिसाइल प्रोग्राम को लेकर कई परीक्षण किए हैं।
रूस ने हाल ही में 21 अक्टूबर को न्यूक्लियर-पावर्ड मिसाइल का सफल परीक्षण किया था। उस समय ट्रंप ने पुतिन की आलोचना करते हुए कहा था कि “परीक्षण नहीं, युद्ध रोकना ज्यादा जरूरी है।” अब ट्रंप का खुद टेस्टिंग का आदेश देना अमेरिकी राजनीति में कथनी और करनी के फर्क के रूप में देखा जा रहा है।
गुरुवार को ट्रंप की होगी शी जिनपिंग से मुलाकात
ट्रंप गुरुवार को दक्षिण कोरिया में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात करने वाले हैं। यह बैठक पहले से ही ट्रेड वॉर और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सैन्य तनाव को कम करने के उद्देश्य से तय की गई थी।
अब, ट्रंप के इस अचानक फैसले ने इस मुलाकात की राजनयिक संवेदनशीलता को और जटिल बना दिया है।
राजनयिकों का मानना है कि यदि यह आदेश लागू होता है, तो अमेरिका-चीन वार्ता का माहौल टकरावपूर्ण मोड़ ले सकता है।
अमेरिका बनाम रूस: किसके पास ज्यादा परमाणु हथियार?
ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका के पास दुनिया में सबसे ज्यादा परमाणु हथियार हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टें इस दावे का समर्थन नहीं करतीं।
‘इंटरनेशनल कैंपेन टू एबॉलिश न्यूक्लियर वेपंस (ICAN)’ के अनुसार:
रूस के पास 5,500 से अधिक न्यूक्लियर वारहेड्स हैं।
अमेरिका के पास लगभग 5,044 वारहेड्स हैं।
चीन तीसरे स्थान पर है, जिसके पास लगभग 500 से 600 वारहेड्स हैं।
अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि “ट्रंप की बयानबाजी शायद राजनीतिक रणनीति का हिस्सा हो, लेकिन इसके प्रभाव से परमाणु संतुलन पर खतरा मंडरा सकता है।”
अमेरिका ने आखिरी बार कब किया था परमाणु परीक्षण?
अमेरिका ने 23 सितंबर 1992 को नेवादा में आखिरी बार परमाणु परीक्षण किया था। उसी साल तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज एच. डब्ल्यू. बुश ने भूमिगत परमाणु परीक्षणों पर प्रतिबंध की घोषणा की थी। तब से अमेरिका अपने हथियारों की टेस्टिंग सिमुलेशन और प्रयोगशाला अनुसंधान तक सीमित रखता आया है।
लेकिन अब, ट्रंप का यह आदेश यदि पेंटागन द्वारा लागू किया जाता है, तो यह तीन दशकों बाद अमेरिका की परमाणु नीति में सबसे बड़ा बदलाव होगा।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया: “दुनिया को नए परमाणु संकट की ओर मत ले जाएं”
यूरोपियन यूनियन और संयुक्त राष्ट्र से जुड़े कई विशेषज्ञों ने इस घोषणा पर गंभीर चिंता व्यक्त की है।
जर्मनी के पूर्व विदेश मंत्री ने कहा —
“यदि अमेरिका फिर से परमाणु परीक्षण शुरू करता है, तो वैश्विक हथियार नियंत्रण प्रणाली पूरी तरह बिखर जाएगी।”
वहीं रूस ने इसे “खतरनाक उकसावा” करार दिया, जबकि चीन ने ट्रंप के आदेश पर राजनयिक संयम की अपील की है।
पेंटागन की प्रतिक्रिया: “ऑर्डर मिला है, प्रक्रिया समीक्षा में”
पेंटागन के सूत्रों के मुताबिक रक्षा मंत्रालय को राष्ट्रपति का आदेश प्राप्त हो गया है, लेकिन अभी तकनीकी समीक्षा और पर्यावरणीय सुरक्षा आकलन जारी है।
अमेरिकी रक्षा विश्लेषक मानते हैं कि इस प्रक्रिया में भारी विरोध का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि कई राज्यों में परमाणु परीक्षण स्थल के खिलाफ पर्यावरण समूहों ने पहले से विरोध दर्ज कराया हुआ है।
वैज्ञानिक समुदाय की चेतावनी
अमेरिकी वैज्ञानिक संघ (American Association of Scientists) ने चेतावनी दी है कि नई टेस्टिंग की लहर न केवल दुनिया को “नए कोल्ड वॉर” की ओर धकेलेगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय विश्वास को भी कमजोर करेगी।
संघ के अध्यक्ष डॉ. ब्रायन विल्सन ने कहा —
“यह सिर्फ टेस्टिंग नहीं, बल्कि एक वैश्विक संदेश है कि दुनिया फिर से हथियारों की दौड़ में उतर चुकी है।”
विश्लेषण: ट्रंप की रणनीति या चुनावी स्टंट?
कई राजनीतिक पर्यवेक्षक मानते हैं कि ट्रंप का यह कदम उनके चुनावी एजेंडा से जुड़ा हो सकता है। 2025 की अमेरिकी राजनीति में ट्रंप फिर से सक्रिय हैं और उनकी रणनीति “सशक्त अमेरिका” की छवि को पुनर्जीवित करने पर केंद्रित है।
हालांकि विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि इस तरह की आक्रामक नीतियाँ वैश्विक स्थिरता के लिए खतरा बन सकती हैं।
क्या फिर लौटेगा 90 के दशक का परमाणु डर?
ट्रंप के आदेश के बाद दुनिया भर में यह सवाल उठ रहा है कि क्या अब फिर से 90 के दशक की तरह परमाणु तनाव लौट आएगा?
रूस और चीन पहले ही नई हथियार तकनीकों में बढ़त बनाने की कोशिश में हैं, ऐसे में अमेरिका का यह निर्णय अंतरराष्ट्रीय संबंधों को नई ठंडक भरी जंग (Cold War 2.0) की ओर धकेल सकता है।

