नये साल में कैलेंडर के साथ जिंदगी भी बदल जाए तो कितना अच्छा रहे..
हमें अपने सपनों को सच करना है, हर हाल में। आपदा को अवसर में बदलते हुए आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते हुए। इस जाते हुए साल ने हमें दर्द दिए हैं, आंसू दिए हैं पर वह हमें तोड़ नहीं पाया है। न हमारी जिजाविषा को, न हमारे मन को, न ही जीवन की गति को। नए अवसरों और नए रास्तों की तलाश में यह सारा वर्ष गुजरा है।
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