बारिश के साथ ओला पढने से बढी ठंड
आज खेतों में गन्ने की छुलाई नहीं हुई। जिसके चलते उन किसानों को दिक्कत आयेगी जिनकी शुगर मिल से पर्ची आई हैं। कुल मिलाकर सुबह से शुरू हुई बारिश व ओलों ने ठंड पैदा कर ही दी।
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आज खेतों में गन्ने की छुलाई नहीं हुई। जिसके चलते उन किसानों को दिक्कत आयेगी जिनकी शुगर मिल से पर्ची आई हैं। कुल मिलाकर सुबह से शुरू हुई बारिश व ओलों ने ठंड पैदा कर ही दी।
Read more...भाजपा का कहना है कि अब तक की राजनैतिक हिंसा में बंगाल में उनके 100 से ऊपर कार्यकर्ताओं की हत्या हो चुकी है। यह किसी से छुपा नहीं है कि बंगाल में चाहे स्थानीय चुनाव ही क्यों न हों , चुनावों के दौरान हिंसा आम बात है।
Read more...जिस कारण वाहनों की भी लंबी लंबी लाईने लगी रही। भीषण ठंड से बचने के लिए लोग अलाव, रूप हीटर, तथा गर्म कपडों का सहारा ले रहे है, लेकिन कडाके की ठंड कम होने का नाम नही ले रही।
Read more...कार्यक्रम की मुख्य समन्वयक रुचि श्रीवास्तव ने बताया जिले में 50071 लाभार्थियों को इस योजना का लाभ मिल चुका है। पहली बार गर्भवती हुई महिलाएं इस योजना का ज्यादा से ज्यादा लाभ लें।
Read more...अल्पसंख्यक अब कौन है और किसे कहा जाए, इसको नए सिरे से रेखांकित करने जरूरत है। हिंदुस्तान में आज
Read more...लखनऊ उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन आईटी विंग की लापरवाही और मनमानी से नियामक आयोग के आदेश के बाद भी
Read more...मुजफ्फरनगर। दिसम्बर का महीने की शुरूआज से ही सर्दी ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया था। दिन-प्रतिदिन बढती
Read more...सर्द हवा चलने के कारण सड़कों पर दुपहिया वाहनों की संख्या कम हो गई है। सुबह-शाम में लोग मजबूरी में ही घर से बाहर निकल पा रहे हैं। बाजार सुबह देर से खुल रहे हैं और शाम को जल्दी बंद हो रहे हैं। बाजार में गर्म कपड़ों, मेवे और मूंगफली आदि की डिमांड बढ़ी है।
Read more...इस भुगतान के मामले में बजाज हिन्दुस्थान ग्रुप की बुढ़ाना क्षेत्र में स्थित भैसाना चीनी मिल सबसे फिसड्डी चल रही थी। सहकारी चीनी मिल मोरना पर भी 29 करोड़ का भुगतान बकाया चल रहा था
Read more...शहर के भगत सिंह रोड, झांसी रानी रोड, एसडी मार्केट, नई मंडी क्षेत्र, नावल्टी चौक आदि क्षेत्रों में सुबह से लेकर सायं तक भीड़ देखी जा सकती है। भीड़ खरीदारी को निकलती है तो शारीरिक दूरी के सामान्य नियमों का भी पालन नहीं किया जाता।
Read more...किसानों को अपनी लागत से 20 प्रतिशत मूल्य ज्यादा मिलेगा और उन्हें नुकसान होने पर 32 करोड़ रु. तक की सहायता सरकार देगी। भारतीय खेती को अमेरिका की तरह खुला बाजार दे देना तो ठीक है
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