उत्तर प्रदेश

फ़र्ज़ी क्राइम ब्रांच अफ़सर की पोल खुली! मोबाइल ढूंढने के नाम पर ठगी, Varanasi पुलिस ने दबोचा

Varanasi के मुर्गिया टोला, बजरडीहा इलाके में एक शातिर ठग ने खुद को क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर लोगों से ठगी करने की कोशिश की। यह शख्स खोए हुए मोबाइल ढूंढने के नाम पर पैसों की मांग करता था और खुद को पुलिस से जुड़ा हुआ बताने का नाटक करता था। भेलूपुर पुलिस ने जब इसकी सच्चाई उजागर की, तो यह मामला और भी सनसनीखेज़ हो गया।

कैसे खुली दिलशाद की पोल?

भेलूपुर थाने में तैनात सिपाही मोहम्मद आसिफ को एक कॉल आई, जिसमें एक व्यक्ति ने खुद को लोहता का प्रधान बताते हुए जानकारी दी कि एक संदिग्ध शख्स उनके पास मौजूद है। इस व्यक्ति ने अपना नाम दिलशाद बताया और दावा किया कि वह क्राइम ब्रांच से जुड़ा हुआ है। इतना ही नहीं, उसने प्रधान से कहा कि वह 3000 रुपये लेकर उनका खोया हुआ मोबाइल खोज देगा।

यह सुनकर सिपाही मोहम्मद आसिफ को शक हुआ और उन्होंने तुरंत इस सूचना को भेलूपुर थानाध्यक्ष तक पहुंचाया। पुलिस की टीम ने तेजी से कार्रवाई करते हुए दिलशाद को धर दबोचा। पूछताछ में उसकी साजिश का पूरा खुलासा हो गया।

खुद को पुलिसवाला बताने का ड्रामा!

दिलशाद सिर्फ क्राइम ब्रांच का झूठा दावा ही नहीं कर रहा था, बल्कि वह भेलूपुर थाने में तैनात सिपाही को अपना भाई बताकर पुलिस से अपनी नजदीकियां भी दर्शाने की कोशिश कर रहा था। इसका मकसद था लोगों को डराकर और भरोसा जीतकर उनसे पैसे ऐंठना।

स्थानीय लोगों ने भी बताया कि दिलशाद पहले भी ऐसे फर्जीवाड़े कर चुका है। वह कभी खुद को क्राइम ब्रांच का अफसर बताता, तो कभी किसी पुलिस अधिकारी का रिश्तेदार। इस बार उसने खुद की पहचान छिपाने के लिए बनारस में अलग-अलग इलाकों में जाकर लोगों से संपर्क बनाया और खोए हुए मोबाइल फोन ढूंढने के बहाने रुपये ऐंठने की योजना बनाई।

ठगी का पूरा खेल – ऐसे बनाता था शिकार

दिलशाद की ठगी का तरीका बेहद शातिराना था।

  1. खोए मोबाइल की तलाश का झांसा – दिलशाद को किसी तरह यह पता लग जाता कि किसी का मोबाइल फोन गुम हो गया है। वह पीड़ित के पास जाकर खुद को क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताता और दावा करता कि वह उनका मोबाइल खोज सकता है।
  2. रुपयों की मांग – वह इस काम के लिए कुछ हजार रुपये एडवांस में मांगता था, जिससे लोग सोचते कि यह असली अधिकारी होगा और मोबाइल खोजने के लिए पैसे लगेंगे।
  3. पुलिस से जुड़ा होने का नाटक – कभी वह पुलिस अधिकारियों को अपना रिश्तेदार बताता, तो कभी खुद को विभाग का हिस्सा बताकर लोगों को विश्वास में लेता था।

पुलिस ने किया गिरफ़्तार, अब होगा पर्दाफाश

पुलिस ने सोमवार रात को दिलशाद के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया। भेलूपुर थाना प्रभारी ने बताया कि दिलशाद के खिलाफ कई शिकायतें मिली थीं, लेकिन इस बार वह रंगे हाथों पकड़ा गया।

अब पुलिस यह भी जांच कर रही है कि दिलशाद के तार कहीं बड़े ठग गिरोह से तो नहीं जुड़े हैं। इस बात की भी संभावना है कि उसने पहले भी कई लोगों से खोए मोबाइल दिलाने के नाम पर ठगी की हो।

क्या आपके आसपास भी हैं ऐसे ठग? रहें सतर्क!

अगर कोई व्यक्ति खुद को पुलिस अधिकारी बताकर आपसे पैसों की मांग करे, तो बिना जांच-पड़ताल किए उस पर भरोसा न करें। क्राइम ब्रांच या पुलिस विभाग खोए हुए मोबाइल को खोजने के लिए किसी भी तरह की फीस नहीं लेता। अगर कोई ऐसा करता है, तो तुरंत निकटतम पुलिस स्टेशन में इसकी सूचना दें।

निष्कर्ष – अपराधी कितना भी शातिर क्यों न हो, पुलिस की पकड़ से नहीं बच सकता!

दिलशाद ने सोचा था कि वह क्राइम ब्रांच का नाम लेकर आसानी से लोगों को ठग लेगा, लेकिन पुलिस की सतर्कता से उसकी साजिश का पर्दाफाश हो गया। यह घटना एक चेतावनी है कि ऐसे फर्जी पुलिसकर्मियों से सतर्क रहना बेहद जरूरी है।

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