फ्रांस ने विदेशी इमामों और अध्यापकों पर प्रतिबंध लगाया
फ्रांस सरकार ने इस्लामी कट्टरपंथ और अलगाववाद से निपटने के लिए विदेशी इमामों के देश में प्रवेश पर रोक लगा दी है। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने बुधवार को कहा कि फ्रांस में मौजूद सभी इमामों को फ्रेंच सीखना अनिवार्य होगा। साथ ही उन्होंने कहा कि फ्रांस में रहने वाले लोगों को यहां के कानूनों का सख्ती से पालन करना अनिवार्य होगा।
2019 में फ्रांस की कुल जनसंख्या करीब 6.7 करोड़ थी। इसमें करीब 65 लाख मुस्लिम आबादी भी शामिल थी। दरअसल, फ्रांस का नौ देशों सहित चार मुस्लिम देशों से एक समझौता हुआ है, जिसके अंतर्गत ये देश अपने इमाम, इस्लामिक शिक्षक और विद्वान फ्रांस में भेज सकते हैं। वहीं, राष्ट्रपति की इमामों के प्रवेश पर रोक लगाने के बाद यह समझौता 2020 में खत्म हो जाएगा।
Le « séparatisme » c’est ne plus respecter les lois et règles de la République au nom d’une religion ou d’une influence extérieure. C’est précisément contre cela que nous nous battons. pic.twitter.com/sRdtleLcwj
— Élysée (@Elysee) February 18, 2020
मैक्रों ने कहा कि सितंबर से शुरू होने वाले पाठ्यक्रमों और उनकी सामग्री पर नियंत्रण रखने के लिए फ्रांस अन्य देशों के साथ द्विपक्षीय समझौते करेगा। साथ ही उन्होंने कहा कि इस नए कानून के आने के बाद मस्जिदों में होने वाले वित्तपोषण पर पारदर्शिता से नजर रखी जाएगी।
मैक्रों ने कहा कि उन्होंने फ्रांस में इमामों के प्रशिक्षण में सुधार के लिए फ्रांसीसी मुस्लिम परिषद (सीएफसीएम) से बातचीत की है। उन्होंने कहा कि हमने उन्हें बता दिया है कि अल्जीरिया, मोरक्को और तुर्की को इमामों को फ्रांस भेजने की अनुमति देने की प्रथा को समाप्त कर दिया जाएगा।
पूर्वी फ्रांस के मुलहाउस शहर में पहुंचे इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि फ्रांस का कानून इस्लामी कट्टरपंथ से मुकाबला करने के लिए सरकार को मुस्लिम छात्रों की पढ़ाई, मस्जिदों के वित्तपोषण और इमामों के प्रशिक्षण का अधिकार देता है। उन्होंने कहा कि परेशानी यह है कि जब धर्म के नाम पर कुछ लोग खुद को फ्रांस से अलग करना चाहते है और इसलिए वह देश के कानूनों का पालन नहीं करते हैं। इसलिए फ्रांस उनके देश में आने पर प्रतिबंध लगाता है।
