Meerut में हड़कंप! जीएसटी टीम का हाजी सईद के छह ठिकानों पर एक साथ छापा – करोड़ों की टैक्स चोरी का शक, कंप्यूटर ने खोला राज़
News-Desk
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GST raid Meerut, Haji Saeed tax evasion, meerut, Meerut steel businessman raid, State GST Meerut newsMeerut: मंगलवार दोपहर मेरठ शहर में उस समय हड़कंप मच गया जब स्टेट जीएसटी विभाग की छह टीमें स्टील के बड़े रिटेल कारोबारी हाजी सईद के ठिकानों पर पहुंचीं। दोपहर 12 बजे से 1 बजे के बीच शुरू हुई यह कार्रवाई देर रात तक चलती रही। विभाग के कंप्यूटर सिस्टम ने बिलिंग में भारी गड़बड़ी का संकेत दिया, जिसके बाद यह छापा मारा गया।
छह जगहों पर एक साथ रेड – पहली बार इस तरह की बड़ी कार्रवाई
यह पहली बार हुआ है जब स्टेट जीएसटी टीम ने आयकर विभाग की तर्ज पर एक साथ छह लोकेशन पर दबिश दी।
इसमें 20 अधिकारी, 30 विभागीय कर्मचारी और शहर के विभिन्न थानों की पुलिस फोर्स शामिल रही।
छापेमारी का नेतृत्व खुद जीएसटी कमिश्नर ग्रेड-वन हरिराम चौरसिया कर रहे थे, जबकि हर टीम में अनुभवी कर अधिकारी और डेटा एनालिस्ट मौजूद थे।
मुख्य ठिकानों पर छानबीन – पुराने शहर से लेकर पटेल नगर तक
टीम ने सबसे पहले पुराने शहर में जली कोठी स्थित हाजी सईद के गोदाम पर दस्तक दी, जो उनका प्रमुख व्यवसायिक केंद्र माना जाता है।
यहीं से स्टील की बड़ी सप्लाई पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में होती है।
इसके बाद टीम पटेल नगर स्थित नई कोठी, जो हाल ही में तैयार हुई आलीशान इमारत है, वहां भी पहुंची।
सूत्रों के मुताबिक, कंप्यूटर और बहीखातों की जांच में कई संदिग्ध ट्रांजेक्शन पाए गए। टीम ने सिस्टम से डेटा बैकअप लेकर बिलिंग रिकॉर्ड और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) से जुड़ी जानकारियां कब्जे में ली हैं।
फैक्टरी और मंडप पर भी कार्रवाई – दस्तावेजों की हो रही बारीकी से जांच
जीएसटी टीम ने सिर्फ घर या गोदाम तक ही सीमित न रहकर, बिजली बंबा बाईपास स्थित लोहे की चादर बनाने वाली फैक्टरी में भी जांच की।
इसके अलावा, आईटीओ रोड पर बने परिवार के नाम के मंडप में भी टीम ने प्रवेश किया और वहां के रेंटल एग्रीमेंट और प्रॉपर्टी पेपर्स खंगाले।
टीम को शक है कि इन परिसरों का इस्तेमाल नकली बिलिंग और टैक्स चोरी के लिए किया गया है।
दो महीने से चल रही थी निगरानी, इलेक्ट्रॉनिक सबूत बने आधार
विभागीय सूत्रों का कहना है कि हाजी सईद के कारोबार की जांच पिछले दो महीनों से जारी थी।
डिजिटल फाइलों, बैंक ट्रांजेक्शन और ई-वे बिल रिकॉर्ड की गहन समीक्षा की गई।
कंप्यूटर सिस्टम में दर्ज डेटा के अनुसार, कई बार इनवॉइस नंबर रिपीट पाए गए और नकली GSTIN नंबर से माल की एंट्री दिखाई गई।
यानी, टैक्स बचाने के लिए फर्जी बिल तैयार कर बिक्री दिखाई जा रही थी।
जमीन खरीद-बिक्री के दस्तावेजों पर भी उठे सवाल
जांच टीम ने सईद की हाल की संपत्ति खरीद पर भी सवाल उठाए हैं।
पटेल नगर की कोठी और बाईपास स्थित फैक्टरी के जमीन रिकॉर्ड और रजिस्ट्री की तारीखों की जांच की जा रही है।
पता लगाया जा रहा है कि कब, किससे और किस मूल्य पर यह जमीन खरीदी गई, और क्या इन लेनदेन में टैक्स का सही भुगतान किया गया था या नहीं।
विभाग ने जब्त किए बहीखाते और कंप्यूटर डेटा
सूत्रों के अनुसार, विभाग ने छापेमारी के दौरान कई कंप्यूटर हार्ड डिस्क, रसीद रजिस्टर, बैंक पासबुक और बिक्री रिकॉर्ड जब्त किए हैं।
टीम अब सभी फाइलों को क्रॉस-वेरिफाई कर रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी लेनदेन फर्जी न हो।
कुछ दस्तावेजों में एक ही बिल नंबर से बार-बार बिक्री दर्ज करने के सबूत मिले हैं।
कमिश्नर का बयान: जांच पूरी होने पर होगी कार्रवाई
जीएसटी कमिश्नर हरिराम चौरसिया ने बताया कि फिलहाल जांच जारी है। उन्होंने कहा, “जली कोठी सहित छह स्थानों पर हमारी टीम जांच में जुटी है। पूरी जांच रिपोर्ट आने के बाद ही मीडिया को विस्तृत जानकारी दी जाएगी।”उन्होंने यह भी कहा कि विभाग ‘डिजिटल ऑडिट सिस्टम’ के ज़रिए अब बड़े व्यापारिक घरानों की निगरानी बढ़ा रहा है ताकि टैक्स चोरी पर अंकुश लगाया जा सके।
व्यापार जगत में सनसनी: ‘कर चोरी का खेल’ या सिस्टम की गलती?
मेरठ के व्यापारिक हलकों में अब यह चर्चा का विषय बन गया है कि क्या वाकई हाजी सईद ने टैक्स चोरी की या यह सिस्टम जनरेटेड त्रुटि का मामला है।
कई व्यापारियों का कहना है कि GST की प्रक्रिया बेहद जटिल है, और कभी-कभी कंप्यूटर जनित त्रुटियां भी इस तरह की समस्या खड़ी कर देती हैं।
लेकिन कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बिलिंग में बार-बार एक ही नंबर दिखे या GSTIN संदिग्ध हो, तो मामला स्पष्ट रूप से टैक्स चोरी का होता है।
हाजी सईद – मेरठ के स्टील बाजार का बड़ा नाम
हाजी सईद का नाम मेरठ के स्टील और लोहे के कारोबार में जाना-पहचाना है।
उनके गोदाम से रोजाना लाखों रुपये की बिक्री होती है, और उनके ग्राहक सिर्फ मेरठ तक सीमित नहीं बल्कि सहारनपुर, हापुड़, बुलंदशहर और दिल्ली के कुछ हिस्सों तक फैले हैं।
वर्षों से स्थानीय स्तर पर उन्हें ‘स्टील किंग ऑफ मेरठ’ कहा जाता है।
अब, इसी प्रतिष्ठा के बीच उन पर यह टैक्स चोरी का आरोप उनके पूरे कारोबारी नेटवर्क को हिला सकता है।
आगे क्या? बुधवार को बड़ा खुलासा संभव
विभागीय सूत्रों के अनुसार, बुधवार को इस पूरे मामले पर बड़ा खुलासा हो सकता है।
संभावना है कि जीएसटी टीम कुल टैक्स चोरी की रकम और कंपनियों के नाम सार्वजनिक कर सकती है जो इस नेटवर्क से जुड़ी हैं।
वहीं, हाजी सईद के नजदीकी सूत्रों का कहना है कि वे कानूनी दस्तावेजों के साथ अपना पक्ष रखेंगे और किसी भी गलतफहमी को दूर करेंगे।

