Health Care: मेरे अनुभव और कैंसर
Health Care: पन्द्रह पर्ष पहले मैने पहला गेंगरीन का एक केस अपने हाथ मेंलिया। रोगी सागर का रहने वाला था। उसके दाहिने पैर की दोऊँगलियाँ निर्जीव होकर लटक गई थी। अंगूठे पर सूजन थी और वहअत्यन्त कड़ा था। यहाँ के एलोपैथ चिकित्सकों ने घुटने से ऊपर से पैरकाटने का निर्णय लिया था। मेरे पास लाए जाने पर मैने कहा कि मुझेनब्बे प्रतिशत से अधिक उसके अच्छे होने की आशा है।
थोड़ी देरसोचने केपश्चात्रोगी ने स्वयं कहा ” इस पार या उस पार आपइलाज शुरू करें।” मै अपना पैर नहीं कटवाऊँगा। करीब दो महीने केइलाज के बाद वह पूर्ण रूप से स्वस्थ हो गया। उसका अंगूठा बचगया और साथ ही पैर भी। करीब दो वर्ष पूर्व उसके रिश्तेदारअकस्मात मुझे मिल गए, उन्हों ने कहा कि वह अभी तक पूर्ण स्वस्थहै और अपना नियमित कार्य सुचारू रूप से कर रहा है।
इसके बाद तीन केस जिनमें एक ‘डायबेटिक ग्रेग्रीन’ का केस भीथा अच्छे हुए और पैर काटने की नौबत नही आई। ग्रेग्रीन में आर्सएल्ब ३०, २०० कार्बोवेज २००, केलेंडुला (बाहरी प्रयोग)इचिनेशिया, लैकेसिस २०० फेरमफास 6X काली फॉस 6X आदि।
कई दवाओं का प्रयोग लाभप्रद रहा।
अन्न नली के कैन्सर के तीन केस मेरे पास आए। एक केस मेंतो मरीज अन्न का एक दाना तथा पानी का एक घूँट भी नहीं निगलसकता था। नाक में नली डालकर तरल खाद्य पदार्थ दिया जा रहाथा। अन्य दो रोगी ऐसे थे जो आंशिक रूप से कठिनाई के साथ कछखा-पी सकते थे। उनकी जाँच रिपोर्ट (एक्सरे बेरियम तथा बायप्सी)में उन्हें अन्न नली का कैन्सर बताया जा चका था तथा शल्य क्रियाएवं कोबाल्ट सिंकाई के लिए कहा गया था। ये तीनों रोगी स्वस्थ होगए और शल्य क्रिया तथा सिंकाई (कोबाल्ट) की आवश्यकता नहींपड़ी।
पहले केस में अन्य दवाओं के अतिरिक्त फासफोरस 10Mपाटन्सी तक ने काम नही किया। फासफोरस 10M की तीन खुराक एकखुराक प्रतिदिन दी गई, तीसरी खुराक लेने के बाद मरीज पूर्णस्वस्थ हो गया। अपने हाथों से उसने नाक में लगी नली निकाल फेंकीऔर सामान्य व्यक्ति की तरहव्यक्ति की तरह भोजन ग्रहण करने लगा।

