उत्तर प्रदेश

Aligarh रेलवे स्टेशन पर 3 साल की बच्ची का दिल दहला देने वाला अपहरण, 24 घंटे बाद संभल से सकुशल बरामद

Aligarh रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर पांच से 19 जुलाई की देर रात एक बेहद चिंताजनक घटना सामने आई, जिसने इलाके में सनसनी मचा दी। तीन साल की मासूम बच्ची टीना, जो अपने पिता करन प्रकाश के साथ सो रही थी, अचानक गायब हो गई। बाद में पता चला कि एक दंपती ने बच्ची का अपहरण कर लिया था। तेज़ और सतर्क कार्रवाई के कारण 20 जुलाई की देर रात बच्ची को संभल जिले से सकुशल बरामद कर लिया गया है। इस मामले में दो युवकों को हिरासत में लिया गया है और उनसे गहन पूछताछ जारी है।


अपहरण की दर्दनाक घटना का पूरा घटनाक्रम

19 जुलाई की वह रात जब करन प्रकाश, जो होली चौक के पला रोड, थाना सासनी गेट क्षेत्र के निवासी हैं, नशे की हालत में अपने तीन साल की बेटी टीना के साथ दिल्ली जाने के लिए निकले थे। टिकट लेकर वह प्लेटफॉर्म नंबर पांच पर पहुंचे। ट्रेन के इंतजार में उन्होंने अपनी बच्ची को पास में ही सुला दिया और खुद सो गए। उसी बीच बच्ची जाग गई और खेलने लगी। खेलते-खेलते मासूम स्टेशन पर बैठे एक दंपती के पास पहुंच गई। दंपती ने बच्ची को कुछ खाने को दिया और धीरे-धीरे बच्ची उनके साथ घुल-मिल गई। इसके बाद दंपती ने बच्ची को गोद में लेकर स्टेशन के मालगोदाम साइड की ओर ले जाकर गायब हो गए।


पिता की नींद खुलने पर हड़कंप, जीआरपी ने शुरू की तलाश

जब करन प्रकाश की नींद खुली तो उनकी बच्ची वहां नहीं थी। उनकी चीख पुकार से रेलवे स्टेशन पर अफरा-तफरी मच गई। जीआरपी प्रभारी निरीक्षक संदीप तोमर ने बताया कि करन प्रकाश नशे की हालत में थे, इसलिए पूछताछ में वे उलझन में थे और अस्पष्ट बयान दे रहे थे। बावजूद इसके, बच्ची की खोज के लिए जीआरपी और आरपीएफ की चार संयुक्त टीमें गठित की गईं।


अलीगढ़ के साथ-साथ आसपास के जिलों में व्यापक जांच

तलाश अभियान सिर्फ अलीगढ़ तक सीमित नहीं रहा। बुलंदशहर, गाजियाबाद, बबराला, मुरादाबाद और आसपास के क्षेत्रों में भी पुलिस ने छापेमारी की। मोबाइल, सीसीटीवी फुटेज और संदिग्ध व्यक्तियों पर नजर रखी गई। इस घटना ने स्थानीय प्रशासन की तत्परता को चुनौती दी, लेकिन उनकी तेज कार्रवाई ने अंततः बच्चे की सकुशल बरामदगी को संभव बनाया।


सफल बरामदगी: संभल में मिली बच्ची

20 जुलाई की देर रात जब बच्ची को संभल में बरामद किया गया तो परिवार और पुलिस दोनों ने राहत की सांस ली। इस सफलता के पीछे जीआरपी और आरपीएफ की लगातार मेहनत और जागरूकता थी। दो युवकों को हिरासत में लिया गया है, जिनसे पूछताछ जारी है। पुलिस इस बात का पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बच्ची को क्यों और किस मकसद से अपहरण किया गया था।


रेलवे स्टेशनों पर बढ़ते अपहरणों का खौफ

यह पहली बार नहीं है जब रेलवे स्टेशन से बच्चों के अपहरण की घटना सामने आई हो। केवल एक माह पहले यानी 19 जून 2025 को बिहार के गया जिले के मजदूर धर्मेंद्र मांझी और सोना मांझी की दो साल की बेटी का भी एक युवक ने रेलवे स्टेशन से अपहरण किया था। बच्ची को चंद घंटों में ही इटावा स्टेशन से बरामद कर लिया गया था और युवक गिरफ्तार कर लिया गया था। इसी तरह 22 अगस्त 2024 को भी एक दंपती के बेटे का अपहरण हुआ था, जिसे पुलिस ने पांच दिनों बाद सकुशल बरामद किया।

छह साल पहले भी इसी इलाके में एक बच्ची का अपहरण हुआ था, जिसे अब तक पुलिस तलाश नहीं पाई है। ये घटनाएं रेलवे स्टेशनों की सुरक्षा पर सवाल खड़े करती हैं और चिंतित करती हैं कि बच्चे सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षित नहीं हैं।


रेलवे स्टेशन की सुरक्षा व्यवस्था में सुधार की सख्त जरूरत

रेलवे स्टेशन पर बच्चों के अपहरण की घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर खामियां हैं। विशेष रूप से बच्चों और कमजोर वर्गों के लिए स्टेशनों को सुरक्षित बनाना अब प्राथमिकता होनी चाहिए। इस दिशा में CCTV कैमरों की संख्या बढ़ाना, सुरक्षा कर्मियों की तैनाती, जागरूकता अभियान, और यात्रियों की सतर्कता बढ़ाना जरूरी है।

रेलवे प्रशासन के साथ-साथ स्थानीय पुलिस विभाग को भी मिलकर ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने होंगे। ट्रेन के प्लेटफॉर्म पर यात्रियों की निगरानी और संदिग्ध गतिविधियों पर त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करनी होगी।


बच्चों की सुरक्षा के लिए जागरूकता अभियान

ऐसी घटनाओं के बढ़ते मामलों ने समाज के हर वर्ग को सचेत कर दिया है। अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों की सुरक्षा के लिए विशेष सावधानी बरतें, खासकर जब वे सार्वजनिक स्थानों पर हों। बच्चों को अकेला नहीं छोड़ना चाहिए और उनकी गतिविधियों पर नजर रखनी चाहिए।

सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं को मिलकर बच्चों की सुरक्षा के लिए विशेष जागरूकता अभियान चलाने चाहिए। रेलवे स्टेशन, बस अड्डे, और भीड़भाड़ वाले इलाकों में सतर्कता बढ़ाने के लिए संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं।


पुलिस की भूमिका और तकनीकी मदद

जीआरपी और आरपीएफ की संयुक्त टीमें इस मामले में तेजी से सक्रिय हुईं। तकनीकी उपकरणों जैसे मोबाइल ट्रैकिंग, सीसीटीवी फुटेज विश्लेषण और संदिग्धों की पहचान में आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया गया। इस आधुनिक तंत्र के कारण बच्ची को सुरक्षित पाया जा सका।

हालांकि, पुलिस को लगातार प्रशिक्षण और संसाधन उपलब्ध कराए जाने चाहिए ताकि वे और भी प्रभावी ढंग से इस तरह के अपराधों को रोक सकें।


समाज के लिए संदेश

अलीगढ़ में हुए इस घटना से यह स्पष्ट होता है कि बच्चों की सुरक्षा केवल परिवार का ही जिम्मा नहीं है, बल्कि पूरे समाज और प्रशासन की भी जिम्मेदारी है। हर व्यक्ति को सतर्क रहना होगा और संदिग्ध गतिविधि देखते ही इसकी सूचना पुलिस को देनी होगी। इस तरह की घटनाएं रोकने के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता है।


अलीगढ़ रेलवे स्टेशन पर हुई इस दुखद घटना ने एक बार फिर से बच्चों की सुरक्षा को लेकर लोगों में चिंता बढ़ा दी है। समय रहते जागरूकता और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था ही बच्चों को ऐसे खतरों से बचा सकती है। पुलिस की सक्रियता और जनता की सहयोग भावना से ही हम सुरक्षित समाज का निर्माण कर सकते हैं।

 

News-Desk

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