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चांद की कक्षा में स्थापित हुआ चंद्रयान-2

इसरो अध्यक्ष के सिवन ने कहा कि चंद्रयान 2 मिशन ने आज एक बड़ा मील का पत्थर पार कर लिया। इसरो चीफ के सिवन ने बताया कि सुबह 9 बजे चांद की कक्षा में चंद्रयान-2 पहुंचा। उन्होंने कहा कि इस दौरान 30 मिनट तक उनकी धड़कनें तक रुक गईं थीं। उन्होंने बताया कि अभी चंद्रयान-2 चांद की परिक्रमा कर रहा है। 

इसरो प्रमुख ने कहा कि ‘लूनर ऑर्बिट इंसर्शन’ (एलओआई) प्रक्रिया सुबह नौ बजकर दो मिनट पर सफलतापूर्वक पूरी हुई। प्रणोदन प्रणाली के जरिए इसे संपन्न किया गया। इसरो ने कहा, ‘यह पूरी प्रक्रिया 1,738 सेकेंड की थी और इसके साथ ही चंद्रयान-2 चंद्रमा की कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित हो गया।’

इसरो ने कहा कि इसके बाद यान को चंद्रमा की सतह से लगभग 100 किलोमीटर की दूरी पर चंद्र ध्रुवों के ऊपर से गुजरना है। इसकी अंतिम कक्षा में पहुंचाने के लिए चार और कक्षीय प्रक्रियाओं को अंजाम दिया जाएगा। अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा कि इसके बाद लैंडर ‘विक्रम’ दो सितंबर को ऑर्बिटर से अलग हो जाएगा।

इसरो ने कहा कि सात सितंबर को चंद्रमा की सतह पर ‘साॉफ्ट लैंडिंग’ कराने की प्रक्रिया शुरू करने से पहले लैंडर संबंधी दो कक्षीय प्रक्रियाओं को अंजाम दिया जाएगा। बंगलूरू के नजदीक ब्याललू स्थित इंडियन डीप स्पेस नेटवर्क (आईडीएसएन) के एंटीना की मदद से बंगलूरू स्थित ‘इसरो, टेलीमेट्री, ट्रैकिंग एंड कमांड नेटवर्क’ (आईएसटीआरएसी) के मिशन ऑपरेशन्स कांप्लेक्स (एमओएक्स) से यान की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

इसरो ने कहा कि अगली कक्षीय प्रक्रिया बुधवार को दोपहर साढ़े 12 से डेढ़ बजे के बीच की जाएगी। इसरो के सबसे शक्तिशाली तीन चरण वाले रॉकेट जीएसएलवी-एमके3-एम1 ने आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र से 22 जुलाई को चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण किया था।

प्रक्षेपण के बाद चंद्रयान-2 ने गत 14 अगस्त को पृथ्वी की कक्षा से निकलकर चंद्र पथ पर आगे बढ़ना शुरू किया था। इसरो का यह अब तक का सबसे जटिल और सबसे प्रतिष्ठित मिशन है। यदि सब कुछ सही रहता है तो रूस, अमेरिका और चीन के बाद भारत, चांद की सतह पर ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ करने वाला चौथा देश बन जाएगा।

‘चंद्रयान-2’ मिशन भारत के लिए इसलिए भी बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि चांद के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में अभी तक कोई देश नहीं पहुंचा है।  जिससे चांद के अनसुलझे रहस्य जानने में मदद मिलेगी। यह ऐसी नई खोज होगी जिसका भारत और पूरी मानवता को लाभ मिलेगा।

पहले चंद्र मिशन की सफलता के 11 साल बाद इसरो ने भू-स्थैतिक प्रक्षेपण यान जीएसएलवी-मार्क ।।। के जरिए 978 करोड़ रुपये की लागत से बने ‘चंद्रयान-2’ का प्रक्षेपण किया। स्वदेशी तकनीक से निर्मित ‘चंद्रयान-2’ में कुल 13 पेलोड हैं। आठ ऑर्बिटर में, तीन पेलोड लैंडर ‘विक्रम’ और दो पेलोड रोवर ‘प्रज्ञान’ में हैं।भारत का महात्वकांक्षी चंद्रमिशन चंद्रयान-2 सफलतापूर्वक चंद्रमा की कक्षा में मंगलवार सुबह नौ बजकर दो मिनट पर स्थापित हो गया है। चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश करने में चंद्रयान को 1738 सेकेंड्स का समय लगा। इसे 29 दिन पहले श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपित किया गया था। चंद्रयान-2 को चांद की कक्षा में प्रवेश कराना वैज्ञानिकों के लिए कड़ी चुनौती थी।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष के सिवन इसे लेकर आज  मिशन को लेकर बात करेंगे।इससे पहले सोमवार को सिवन ने बताया था कि चांद की कक्षा में आने के बाद से चंद्रयान-2 चांद की चार कक्षाओं से होकर गुजरेगा, जिसके बाद यह चांद की अंतिम कक्षा में दक्षिणी ध्रुव पर करीब 100 किमी ऊपर से गुजरेगा। इसी दौरान यानी दो सितंबर को यान का विक्रम लैंडर ऑर्बिटर से अलग हो जाएगा। विक्रम चार दिन तक 30 गुणा 100 किमी के दायरे में चांद का चक्कर लगाएगा।

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इसके बाद यह चांद के दक्षिणी ध्रुव में सतह पर सात सितंबर को अपना कदम रखेगा। 22 जुलाई को लॉन्च हुए इस मिशन ने इससे पहले 23 दिन पृथ्वी के चक्कर लगाए थे। फिर चंद्रमा की कक्षा में पहुंचने में इसे 6 दिन लगे। चांद की कक्षा में पहुंचने के बाद यान 13 दिन तक चक्कर लगाएगा।

चार दिन बाद यानी संभवत: सात सितंबर को वह चांद की सतह पर पहले से निर्धारित जगह पर सॉफ्ट लैंडिंग करेगा। वैज्ञानिकों के मुताबिक, चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग इसरो के लिए इस मिशन की सबसे बड़ी चुनौती होगी, क्योंकि वहां हवा नहीं चलती और गुरुत्वाकर्षण बल भी हर जगह अलग-अलग होता है।

News Desk

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