एक ही जनपद में रह सकेंगे पति-पत्नी, अंतर जनपदीय तबादले की प्रक्रिया शुरू
मुजफ्फरनगर। बेसिक शिक्षा के हजारों सहायक अध्यापकों और प्रधानाचार्यों के लिए खुशखबरी है। लोकसभा चुनाव की आचार संहिता खत्म होते ही अंतर जनपदीय तबादले की प्रक्रिया प्रदेश में शुरू हो गयी है। तबादले के लिए कम से कम पति या पत्नी का तीन वर्ष एक जिले में शिक्षण कार्य करना जरूरी है। प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों के बड़ी संख्या में सहायक अध्यापक एवं प्रधानाचार्य अंतर जनपदीय तबादले के लिए परेशान हैं, क्योंकि पति किसी जिले में तो पत्नी किसी दूसरे जिले में तैनात है। इस मामले पर साथ-साथ रह सकेंगे शिक्षक पति-पत्नी शासन स्तर पर जोर-शोर से तैयारियां शुरू हो गयी हैं। इसके लिए एक लाख से अधिक शिक्षक-शिक्षिकाओं के अंतर जनपदीय तबादले के लिए आनलाइन आवेदन करने की उम्मीद है। जानकारों के अनुसार इस अंतर जनपदीय तबादले से उन 50 हजार से अधिक शिक्षक-शिक्षिकाओं को लाभ मिलेगा, जो कई वर्षों से अपने पसंद के जिले में पत्नी सहित नौकरी के लिए तरस रहे थे। अंतर्जनपदीय तबादले के लिए ऑनलाइन लिये जाने की प्रक्रिया शीघ्र शुरू हो जायेगी। राजकीय इण्टर कालेजों में शिक्षक-शिक्षिकाओं के तबादले के लिए ऑनलाइन आवेदन 17 मई से लिया जा रहा है।
आचार संहिता समाप्त होते ही अंतर जनपदीय तबादले की प्रक्रिया शुरू
यह तबादले भी दो माह में हो जाएंगे। तबादले के दौरान सेना, मरीज, विधवा, दिव्यांग सहित अन्य प्रभावित लोगों को छूट दी जाती है, जबकि शेष अन्य को नहीं। प्रदेश में सपा शासनकाल के दौरान तीन बार अंतर जनपदीय तबादले हुए थे। इसमें 50 हजार से अधिक शिक्षक-शिक्षिकाएं शामिल हैं, जबकि प्रदेश के पूर्व सीएम अखिलेश यादव व बेसिक शिक्षा मंत्री ने विशेषाधिकार के तहत भी तबादले किये थे। प्रदेश की भाजपा सरकार के वर्ष 2017-18 के दौरान अंतर जनपदीय तबादले हुए थे। उस दौरान करीब 11 हजार शिक्षक-शिक्षिकाओं के तबादले हुए थे, जबकि तबादले के लिए आवेदन एक लाख से अधिक ऑनलाइन आये हुए थे। बताया जा रहा है कि शासन स्तर पर अंतर जनपदीय तबादले के लिए नीति तैयार हो रही है। लोकसभा चुनाव की आचार संहिता हटते ही तबादला नीति जारी हो गयी। जून के पहले हफ्ते से ऑनलाइन आवेदन लिये जायेंगे व 20 जुलाई तक तबादले कर दिये जायेंगे।
