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Iran nuclear deal पर निर्णायक मोड़: ट्रम्प बोले– बातचीत पर नजर रखूंगा, जिनेवा में दूसरा दौर, मिडिल ईस्ट में बढ़ा अमेरिकी सैन्य दबाव

अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से अटकी Iran nuclear deal एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। दूसरे दौर की बातचीत से ठीक पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि अमेरिका इस प्रक्रिया में सीधे नहीं, बल्कि इनडायरेक्ट रूप से शामिल रहेगा। ट्रम्प का यह बयान ऐसे समय आया है, जब दोनों देशों के बीच कूटनीतिक प्रयासों के साथ-साथ सैन्य तनाव भी तेज़ होता जा रहा है।


🔴 ट्रम्प का बयान: बातचीत पर रखेंगे नजर

एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रम्प ने कहा कि वह अमेरिका और ईरान के बीच चल रही परमाणु वार्ता पर करीबी नजर रखेंगे। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इस बार ईरान समझौते को लेकर पहले से अधिक गंभीर दिखाई दे रहा है।

ट्रम्प ने सख्त लहजे में कहा कि ईरान लंबे समय तक कठोर रुख अपनाता रहा है, लेकिन पिछले वर्ष उसके परमाणु ठिकानों पर हुई अमेरिकी बमबारी के बाद उसे यह समझ आ गया है कि समझौता न करने के क्या परिणाम हो सकते हैं। ट्रम्प ने चेतावनी देते हुए कहा कि उन्हें नहीं लगता कि ईरान दोबारा ऐसे परिणाम भुगतना चाहेगा।


🔴 जिनेवा में आज दूसरा दौर, पहले ओमान में हुई थी बैठक

अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की वार्ता आज 17 फरवरी 2026 को जिनेवा में हो रही है। इससे पहले 6 फरवरी को ओमान में दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों के बीच पहली बैठक हुई थी।

इस वार्ता का मुख्य उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करना है, ताकि वह परमाणु हथियार विकसित न कर सके। व्हाइट हाउस का कहना है कि अमेरिका ऐसा समझौता चाहता है, जो क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा को सुनिश्चित कर सके।


🔴 ईरान की नौसैनिक गतिविधियों से बढ़ी हलचल

वार्ता के बीच ईरान ने अपनी सैन्य गतिविधियां भी तेज कर दी हैं। एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार, ईरान ने कुछ ही हफ्तों में दूसरी बार बड़े पैमाने पर नौसैनिक अभ्यास शुरू किया है। यह अभ्यास स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज, पर्शियन गल्फ और गल्फ ऑफ ओमान में किया जा रहा है।

इसका उद्देश्य खुफिया और ऑपरेशनल क्षमताओं की जांच बताया गया है। समुद्री सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, इस इलाके से गुजरने वाले जहाजों को रेडियो के जरिए चेतावनी दी गई है कि उत्तरी मार्ग में लाइव-फायर ड्रिल हो सकती है, हालांकि ईरानी सरकारी मीडिया ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।


🔴 मिसाइल और समुद्री सुरक्षा पर अमेरिकी चिंता

जनवरी के अंत में हुए इसी तरह के अभ्यास के दौरान अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कड़ा बयान जारी किया था। अमेरिका ने कहा था कि ईरान को अंतरराष्ट्रीय समुद्री और हवाई क्षेत्र में पेशेवर तरीके से काम करने का अधिकार है, लेकिन वह अमेरिकी वॉरशिप और व्यापारिक जहाजों को परेशान न करे।

यह बयान इस बात को दर्शाता है कि परमाणु वार्ता के समानांतर समुद्री सुरक्षा अमेरिका की बड़ी चिंता बनी हुई है।


🔴 प्रतिबंध हटें तो डील संभव: ईरान का संकेत

ईरान के उप विदेश मंत्री मजीद तख्त‑रवांची ने अमेरिका के साथ समझौते को लेकर नरम संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि यदि अमेरिका प्रतिबंध हटाने पर गंभीरता से बात करने को तैयार है, तो ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम से जुड़े कई मुद्दों पर समझौता कर सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि परमाणु वार्ता में प्रगति न होने का कारण अमेरिका नहीं, बल्कि दोनों पक्षों के बीच भरोसे की कमी रही है।


🔴 यूरेनियम पर प्रस्ताव, लेकिन रूस का सवाल खुला

तख्त-रवांची के अनुसार, ईरान ने 60 प्रतिशत तक इंरिच्ड यूरेनियम को कम करने का प्रस्ताव दिया है। फिलहाल ईरान के पास 400 किलोग्राम से अधिक उच्च स्तर पर इंरिच्ड यूरेनियम का भंडार है।

2015 के परमाणु समझौते के तहत ईरान ने अपना यूरेनियम रूस भेज दिया था। इस बार भी रूस ने इसे स्वीकार करने की पेशकश की है, लेकिन ईरान ने कहा है कि इस पर अंतिम निर्णय लेना अभी जल्दबाजी होगी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, तेहरान अस्थायी रूप से यूरेनियम इंरिचमेंट रोकने पर भी विचार कर रहा है।


🔴 बैलिस्टिक मिसाइल बना सबसे बड़ा रोड़ा

परमाणु वार्ता में सबसे बड़ा विवाद ईरान का बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम बना हुआ है। ईरान इसे अपनी ‘रेड लाइन’ मानता है और किसी भी हाल में इस पर बातचीत को तैयार नहीं है।

ईरान का तर्क है कि उसका मिसाइल प्रोग्राम पूरी तरह रक्षात्मक है। जून 2025 में जब इजराइल और अमेरिका ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला किया था, तब उसकी मिसाइलों ने ही देश की रक्षा की थी। ईरानी अधिकारियों का साफ कहना है कि बातचीत केवल परमाणु मुद्दे तक सीमित रहेगी, मिसाइल या क्षेत्रीय समूहों पर नहीं।


🔴 प्रॉक्सी ग्रुप्स पर भी टकराव

अमेरिका चाहता है कि ईरान हिजबुल्लाह और हूती जैसे प्रॉक्सी संगठनों को समर्थन देना बंद करे। ईरान इस मुद्दे को वार्ता में शामिल करने के सख्त खिलाफ है। उसका कहना है कि क्षेत्रीय समूहों पर चर्चा करना परमाणु समझौते के दायरे से बाहर है।


🔴 ‘अस्तित्व को खतरा हुआ तो जवाब देंगे’

तख्त-रवांची ने ट्रम्प के बयानों और क्षेत्र में बढ़ती अमेरिकी सैन्य मौजूदगी पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक बयानों और निजी संदेशों में अमेरिका का रुख अलग-अलग दिखता है। यदि ईरान को अपने अस्तित्व पर खतरा महसूस हुआ, तो वह जवाब देगा।

उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्रीय देशों से बातचीत में सभी ने युद्ध का विरोध किया है और ईरान को लगता है कि इजराइल इस वार्ता को पटरी से उतारना चाहता है।


🔴 मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य तैनाती तेज

ईरान से बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य मौजूदगी तेजी से बढ़ा रहा है। अमेरिका अब अपना सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर USS जेराल्ड आर. फोर्ड क्षेत्र में भेज रहा है। यह न्यूक्लियर-पावर्ड कैरियर एक हफ्ते के भीतर मिडिल ईस्ट पहुंच सकता है।

वर्तमान में वहां पहले से अब्राहम लिंकन कैरियर और अन्य युद्धपोत तैनात हैं। हाल के हफ्तों में कई गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर, फाइटर जेट और निगरानी विमान भी क्षेत्र में भेजे गए हैं।


ईरान परमाणु वार्ता अब ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां कूटनीति और सैन्य दबाव दोनों साथ-साथ चल रहे हैं। जिनेवा में हो रही बातचीत न केवल अमेरिका और ईरान के रिश्तों की दिशा तय करेगी, बल्कि पूरे मिडिल ईस्ट की सुरक्षा और वैश्विक राजनीति पर भी गहरा असर डालेगी। आने वाले दिन यह तय करेंगे कि बातचीत समझौते में बदलेगी या टकराव और बढ़ेगा।

 

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