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Iran के Minab School पर Missile Attack: शुरुआती जांच में अमेरिका जिम्मेदार, 175 मौतों से मचा वैश्विक आक्रोश

Iran School Missile Strike ने मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष को और अधिक गंभीर बना दिया है। ईरान के मीनाब शहर में एक प्राथमिक स्कूल पर हुए मिसाइल हमले को लेकर शुरुआती जांच में अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया गया है। अमेरिकी सैन्य जांच के अनुसार यह हमला गलत पहचान के कारण हुआ, क्योंकि टार्गेटिंग के लिए इस्तेमाल किया गया डेटा पुराना था और उस आधार पर स्कूल को सैन्य ठिकाना समझ लिया गया।

28 फरवरी को हुए इस हमले में टॉमहॉक क्रूज मिसाइल का इस्तेमाल किया गया था। उस समय अमेरिकी सेना स्कूल के पास स्थित एक ईरानी नौसैनिक अड्डे को निशाना बना रही थी, जो पहले उसी परिसर का हिस्सा रहा था। शुरुआती जांच में सामने आया कि पुराने खुफिया डेटा के कारण लक्ष्य की गलत पहचान हो गई।


मीनाब स्कूल हमले में भारी जनहानि

ईरानी अधिकारियों के अनुसार मीनाब में हुए इस मिसाइल हमले में 175 लोगों की मौत हुई, जिनमें 160 से अधिक बच्चे शामिल बताए जा रहे हैं। यह घटना पूरे क्षेत्र में आक्रोश और शोक का कारण बन गई है।

हमले के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थानीय प्रशासन और राहत एजेंसियों ने तुरंत बचाव अभियान शुरू किया, लेकिन कई लोग मलबे के नीचे दबे हुए मिले।

1 मार्च को मारे गए बच्चों और शिक्षकों के अंतिम संस्कार से पहले मीनाब के कब्रिस्तान में लगभग 100 से ज्यादा कब्रें खोदी गईं, जिससे इस त्रासदी की भयावहता का अंदाजा लगाया जा सकता है।


अमेरिकी सैन्य जांच में सामने आई चूक

Iran School Missile Strike को लेकर अमेरिकी अधिकारियों ने कहा है कि मामले की जांच अभी जारी है। शुरुआती जांच में यह संकेत मिला है कि अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने खुफिया एजेंसी द्वारा उपलब्ध कराए गए पुराने डेटा के आधार पर हमला किया।

इस डेटा में उस स्थान को अभी भी सैन्य परिसर के रूप में दिखाया गया था, जबकि बाद में वहां स्कूल संचालित होने लगा था।

अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी कहा है कि यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि हमले से पहले उस डेटा की दोबारा पुष्टि क्यों नहीं की गई


फारस की खाड़ी में तेल टैंकर पर हमला

इसी बीच फारस की खाड़ी में एक नया घटनाक्रम सामने आया है। बुधवार रात एक ऑयल टैंकर में हमले के बाद आग लग गई। हालांकि यह अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इस हमले के पीछे कौन जिम्मेदार था।

इस घटना ने क्षेत्र में पहले से जारी तनाव को और बढ़ा दिया है। तेल आपूर्ति से जुड़े समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ने लगी है।


ओमान में ड्रोन हमले के बाद आग

ओमान के सलालाह बंदरगाह पर भी एक बड़ा हादसा सामने आया, जहां ईरानी ड्रोन हमले के बाद आग लग गई। इस घटना के बाद बंदरगाह क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई।

इसके अलावा अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने गुरुवार को ईरान के सैन्य ठिकानों और विमान पर किए गए हमलों के वीडियो फुटेज भी जारी किए हैं।


लेबनान में भी बढ़ा संघर्ष

मिडिल ईस्ट के इस संघर्ष का असर लेबनान तक पहुंच चुका है। इजराइल ने बेरूत में ईरान समर्थक संगठन हिज्बुल्लाह को निशाना बनाकर हमला किया।

लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार बालबेक जिले के शाअत कस्बे में हुए हमले में कम से कम 8 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल हुए हैं।

बेरूत के दक्षिणी उपनगरों में भी हमलों के बाद कम से कम 17 लोग घायल हुए, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।


हिज्बुल्लाह का जवाबी हमला

इजराइल के हमलों के बाद हिज्बुल्लाह ने भी जवाबी कार्रवाई की। संगठन ने दावा किया कि उसने इजराइल के कई सैन्य ठिकानों पर रॉकेट दागे

हिज्बुल्लाह के मुताबिक इन हमलों में अमियाद और सैमसन सैन्य अड्डे, उत्तरी कमान मुख्यालय और सफद के पास ऐन जैतिम अड्डे को निशाना बनाया गया।

इसके अलावा हाइफा शहर के नौसैनिक अड्डे और कार्मेल वायुसेना अड्डे पर भी मिसाइलें दागे जाने का दावा किया गया।


ईरान की नई सैन्य रणनीति

दिलचस्प बात यह है कि लगातार हमलों के बावजूद ईरान दावा कर रहा है कि वह लंबे समय तक युद्ध जारी रखने की क्षमता रखता है।

रिपोर्टों के अनुसार ईरान ने अपनी सैन्य रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। सेना की कमान अब एक ही व्यक्ति के पास नहीं बल्कि सात अलग-अलग हिस्सों में बांट दी गई है

इसके अलावा हर महत्वपूर्ण पद के लिए चार संभावित उत्तराधिकारी पहले से तय किए गए हैं, ताकि शीर्ष नेतृत्व के खत्म होने की स्थिति में भी कमान तुरंत संभाली जा सके।


19 हजार से ज्यादा इमारतें प्रभावित

ईरानी रेड क्रिसेंट सोसाइटी (IRCS) के मुताबिक अमेरिका और इजराइल के हमलों में 19,734 से अधिक नागरिक इमारतों को नुकसान पहुंचा है

इनमें लगभग

  • 16,000 घर

  • 3,300 से ज्यादा दुकानें और ऑफिस

  • 77 अस्पताल

  • 69 स्कूल शामिल बताए गए हैं।

राहत एजेंसियों ने बताया कि कई स्थानों पर अभी भी मलबा हटाने और घायलों को निकालने का काम जारी है।


तेल की कीमतों को लेकर अमेरिका की तैयारी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि ईरान से जुड़े युद्ध के कारण तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। इसे नियंत्रित करने के लिए अमेरिका स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व से तेल जारी करेगा

ट्रम्प के अनुसार इससे पेट्रोल की कीमतों को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी और बाद में इस रिजर्व को दोबारा भर दिया जाएगा।


कतर पर ईरान का मिसाइल हमला

संघर्ष के बीच ईरान ने कतर की ओर 9 बैलिस्टिक मिसाइलें और कई ड्रोन दागे। कतर के रक्षा मंत्रालय के अनुसार एयर डिफेंस सिस्टम ने 8 मिसाइलों और सभी ड्रोन को हवा में ही मार गिराया

एक मिसाइल निर्जन क्षेत्र में गिरने की सूचना है, जिससे किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।


विदेशों से भारतीय नागरिकों की वापसी

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव को देखते हुए कई भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला जा रहा है।

कतर से 500 से अधिक भारतीय नागरिक सुरक्षित भारत लौट चुके हैं। ये लोग कतर एयरवेज की उड़ानों से नई दिल्ली और अन्य शहरों में पहुंचे।

इसी तरह लेबनान से भी 177 भारतीय नागरिकों का पहला समूह विशेष विमान के जरिए नई दिल्ली पहुंचा।

भारतीय दूतावासों ने वहां मौजूद भारतीयों को सतर्क रहने और किसी संदिग्ध वस्तु या मलबे के पास न जाने की सलाह दी है।


मिडिल ईस्ट में तेजी से बदलते हालात ने पूरे क्षेत्र को अस्थिर बना दिया है। ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच जारी सैन्य टकराव अब कई देशों को प्रभावित कर रहा है। मीनाब स्कूल पर हुए मिसाइल हमले ने इस संघर्ष के मानवीय पहलू को सामने ला दिया है, जिससे वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ गई है। आने वाले दिनों में कूटनीतिक प्रयास और सैन्य रणनीतियां इस युद्ध की दिशा तय करेंगी, जिस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।

 

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