Kanpur Cyber Fraud Case: डिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी की रकम निकालने में बैंक अधिकारियों पर शिकंजा, 25 स्टाफ को नोटिस—8 पहले ही भेजे जा चुके जेल
Kanpur में सामने आए cyber fraud case ने बैंकिंग व्यवस्था और साइबर अपराध के गठजोड़ पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। डिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी से जुड़ी करोड़ों रुपये की रकम को संदिग्ध खातों के जरिए ट्रांसफर और निकालने के मामले में पुलिस ने 25 बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। जांच के दायरे में आए इन कर्मियों से पूछा गया है कि खातों को फ्रीज करने के निर्देश के बावजूद रकम कैसे निकाली गई और बिना खाताधारकों की मौजूदगी के धन अन्य खातों में कैसे स्थानांतरित हुआ।
बर्रा पुलिस के अनुसार सोमवार को अन्य संदिग्ध बैंक कर्मचारियों और संबंधित व्यक्तियों को भी नोटिस भेजे जाने की तैयारी है।
म्यूल अकाउंट और हवाला नेटवर्क से जुड़े आठ आरोपी पहले ही भेजे जा चुके जेल
जांच के दौरान पुलिस ने साइबर ठगों की रकम को ठिकाने लगाने, हवाला नेटवर्क से जोड़ने और म्यूल अकाउंट खुलवाने में सहयोग करने के आरोप में आठ लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। इनमें एक्सिस बैंक कन्नौज शाखा के ऑपरेशनल हेड धर्मेंद्र सिंह, डिप्टी मैनेजर अमित सिंह, स्वरूपनगर स्थित सीएसबी बैंक के ब्रांच मैनेजर अमित कुमार और यूनिटी स्मॉल फाइनेंस बैंक के रिलेशनशिप मैनेजर आशीष कुमार शामिल हैं।
इसके अलावा वरुण विहार निवासी सोनू शर्मा, सतीश पांडेय, तनिष गुप्ता और गोविंदनगर निवासी साहिल विश्वकर्मा का नाम भी इस नेटवर्क से जुड़े होने के आरोप में सामने आया है।
कई जिलों के बैंक स्टाफ जांच के दायरे में
Kanpur cyber fraud case की जांच अब शहर से बाहर भी फैलती दिखाई दे रही है। पुलिस के अनुसार कानपुर के अलावा लखनऊ, फर्रुखाबाद, कन्नौज और आगरा जिलों के सरकारी व निजी बैंकों के कर्मचारियों के नाम भी जांच में सामने आए हैं।
अब तक मिले साक्ष्यों के आधार पर 13 बैंक कर्मियों की पहचान हो चुकी है। इनमें से कुछ कर्मचारी जांच से पहले ही छुट्टी पर चले गए हैं, जिनकी तलाश जारी है। एक महिला अधिकारी समेत चार बैंक कर्मियों का अभी तक कोई स्पष्ट पता नहीं चल सका है।
खाते फ्रीज करने के निर्देश के बावजूद जारी रही निकासी
बर्रा थाना प्रभारी निरीक्षक रविंद्र कुमार श्रीवास्तव के अनुसार साइबर ठगी, डिजिटल अरेस्ट और फर्जी कंपनियां बनाकर इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ लेने जैसे मामलों में पुलिस ने कई संदिग्ध बैंक खातों को फ्रीज करने के निर्देश दिए थे।
इसके बावजूद संबंधित खातों से सात से दस दिनों तक लगातार धन निकासी होती रही। इस घटनाक्रम ने जांच एजेंसियों को बैंकिंग सिस्टम के भीतर संभावित मिलीभगत की आशंका की ओर संकेत दिया है।
फ्रीज खातों से निकले लाखों रुपये, बैंक अधिकारियों से मांगा गया जवाब
जांच में सामने आया कि तीन संदिग्ध खातों से क्रमशः 18 लाख रुपये, 5.50 लाख रुपये और 11 लाख रुपये निकाले गए, जबकि इन खातों को पहले ही फ्रीज करने का निर्देश दिया गया था। इस आधार पर बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की गहन जांच शुरू की गई है।
इसी क्रम में विभिन्न बैंकों के 25 कर्मचारियों को नोटिस जारी कर उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है। नोटिस पाने वालों में शाखा प्रबंधक, डिप्टी मैनेजर और कैशियर स्तर के अधिकारी शामिल हैं।
सरकारी और निजी दोनों बैंकों के स्टाफ जांच के घेरे में
जांच एजेंसियां जिन बैंकों के कर्मचारियों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं, उनमें यूपी ग्रामीण बैंक, जेएंडके बैंक, सीएसबी बैंक, यूनिटी स्मॉल फाइनेंस बैंक, एक्सिस बैंक, महाराष्ट्र ग्रामीण बैंक, यूको बैंक और सिटी यूनियन बैंक जैसे संस्थानों के नाम शामिल हैं।
पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि संदिग्ध खातों के संचालन और धन के ट्रांसफर में किस स्तर तक लापरवाही या मिलीभगत हुई।
म्यूल अकाउंट खोलने में बैंक कर्मियों की भूमिका पर विशेष निगरानी
जांच में यह भी सामने आया है कि साइबर ठगी की रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कराने और म्यूल अकाउंट खुलवाने में कई बैंक कर्मियों की भूमिका संदिग्ध रही है। ऐसे खातों का उपयोग आमतौर पर अवैध लेनदेन की रकम को छिपाने के लिए किया जाता है।
डीसीपी साउथ दीपेंद्रनाथ चौधरी के अनुसार इस पूरे नेटवर्क की परत-दर-परत जांच की जा रही है और जिन कर्मचारियों के नाम सामने आए हैं, उन्हें नोटिस भेजकर जवाब मांगा गया है।
डिजिटल अरेस्ट ठगी के बढ़ते मामलों ने बढ़ाई चिंता
हाल के महीनों में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर होने वाली ठगी के मामलों में तेजी आई है। अपराधी खुद को जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं और फिर रकम ट्रांसफर करवाते हैं। इस तरह की घटनाओं में बैंक खातों का इस्तेमाल महत्वपूर्ण कड़ी बन जाता है।
जांच एजेंसियों का मानना है कि यदि बैंकिंग स्तर पर निगरानी मजबूत हो तो ऐसे मामलों पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है।
आगे और खुलासों की संभावना, जांच का दायरा बढ़ा
जांच अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आने वाले दिनों में और नाम सामने आ सकते हैं। पुलिस अन्य संदिग्ध खातों और संबंधित व्यक्तियों की गतिविधियों की भी निगरानी कर रही है।
इस पूरे घटनाक्रम ने साइबर अपराध के खिलाफ चल रहे अभियान को और तेज कर दिया है तथा बैंकिंग तंत्र में जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत दिए हैं।

