उत्तर प्रदेश

Kanpur हत्याकांड: सहकर्मियों ने ‘सबक सिखाने’ के नाम पर मोनू जायसवाल की हत्या की, चेहरा तेजाब से जलाकर शव शुक्लागंज में फेंका

Kanpur के कैंट थाना क्षेत्र के गोलाघाट निवासी 34 वर्षीय मोनू जायसवाल की हत्या का सनसनीखेज खुलासा पुलिस ने कर दिया है। पुलिस ने मृतक के दो सहकर्मियों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने पूछताछ में स्वीकार किया कि वे उसे केवल “सबक सिखाना” चाहते थे, लेकिन पिटाई के दौरान उसकी मौत हो गई। इसके बाद पहचान छिपाने के लिए चेहरा तेजाब से जलाकर शव को शुक्लागंज क्षेत्र में फेंक दिया गया।

पुलिस के अनुसार यह हत्या अचानक नहीं बल्कि एक महीने पहले रची गई साजिश का परिणाम थी, जिसे सुनसान स्थान चुनकर योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया गया।


घर से निकले मोनू का अगले दिन मिला शव, पहचान मिटाने की कोशिश

परिजनों के अनुसार मोनू जायसवाल रविवार देर शाम घर से निकले थे और इसके बाद वापस नहीं लौटे। अगले दिन उनका शव Shuklaganj क्षेत्र में मिला। शव की स्थिति देखकर स्पष्ट था कि हत्या के बाद पहचान छिपाने का प्रयास किया गया है।

चेहरे को तेजाब से जलाए जाने की घटना ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया। शुरुआती जांच में ही पुलिस को हत्या की आशंका हो गई थी, जिसके बाद जांच की दिशा बदल दी गई।


गोलाघाट चौराहे पर परिजनों का विरोध प्रदर्शन, गिरफ्तारी की मांग

मृतक का शव मिलने के बाद परिवार और स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया। मंगलवार को परिजनों ने गोलाघाट चौराहे पर शव रखकर विरोध प्रदर्शन किया और आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग उठाई।

इस दौरान पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई का आश्वासन दिया, जिसके बाद जांच तेज कर दी गई और संदिग्धों की तलाश शुरू हुई।


दोनों आरोपी सहकर्मी निकले, गोरा कब्रिस्तान के पास से गिरफ्तार

जांच के दौरान पुलिस ने मुख्य आरोपी पॉपेन पॉल और उसके साथी अतीत वर्मा उर्फ कार्तिक बृजवासी को गोरा कब्रिस्तान के पास से गिरफ्तार कर लिया। पॉपेन मूल रूप से कोलकाता का रहने वाला है और वर्तमान में शुक्लागंज की मिश्रा कॉलोनी में रह रहा था, जबकि अतीत शुक्लागंज के चंपापुरवा राजीवनगर क्षेत्र का निवासी बताया गया।

दोनों से पूछताछ में हत्या की पूरी साजिश सामने आई, जिसने इस मामले को एक सोची-समझी आपराधिक योजना के रूप में स्थापित कर दिया।


प्रताड़ना और अपमान का बदला लेने की बात कबूली

पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि मोनू उनसे अक्सर अभद्र व्यवहार करता था और कार्यस्थल पर उन्हें अपमानित करता रहता था। उनका आरोप था कि वह जबरन उनसे लक्ष्य पूरा करवाता था, जिससे उसे कंपनी से अधिक इंसेंटिव मिलता था।

इसके अलावा आरोपियों ने यह भी कहा कि मोनू उन पर बीसी की रकम जमा कराने का दबाव बनाता था। लगातार बढ़ती नाराजगी के कारण उन्होंने बदला लेने की योजना बना ली।


एक महीने पहले बनाई गई हत्या की योजना

पॉपेन पॉल ने पुलिस को बताया कि उसने लगभग एक महीने पहले ही अतीत वर्मा के साथ मिलकर हत्या की योजना बनाई थी। वारदात को अंजाम देने के लिए सुनसान स्थान चुना गया ताकि किसी को शक न हो।

योजना के तहत मोनू को शराब पिलाने के बहाने घर से बाहर बुलाया गया और फिर उसे सुनसान इलाके की ओर ले जाया गया।


शराब पिलाकर सुनसान सड़क पर बेरहमी से की गई पिटाई

आरोपियों ने मोनू को गंगाघाट कोतवाली क्षेत्र के मरहाला इलाके में नरबीजपुर गांव की ओर जाने वाली सुनसान सड़क पर ले जाकर पहले शराब पिलाई। इसके बाद उसके चेहरे पर डियो स्प्रे छिड़ककर लाठी-डंडों से ताबड़तोड़ हमला किया।

लगातार प्रहार से मोनू की मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद दोनों आरोपी घबरा गए और शव को ठिकाने लगाने की योजना बनाने लगे।


पहचान छिपाने के लिए चेहरा जलाकर शव फेंका

हत्या के बाद आरोपियों ने पहचान छिपाने के उद्देश्य से मृतक का चेहरा तेजाब से जला दिया। इसके बाद शव को ऑटो में डालकर सुनसान इलाके में फेंक दिया गया और मौके से फरार हो गए।

यह तरीका दर्शाता है कि आरोपी पहले से गिरफ्तारी से बचने की रणनीति बना चुके थे।


हत्या में प्रयुक्त सामान पुलिस ने बरामद किया

डीसीपी पूर्वी सत्यजीत गुप्ता के अनुसार आरोपियों के पास से हत्या में इस्तेमाल डियो स्प्रे, दो डंडे, मृतक का मोबाइल फोन, शराब की बोतल, वारदात में प्रयुक्त ऑटो और बाइक बरामद की गई है।

इन बरामद वस्तुओं ने जांच को मजबूत आधार दिया और आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य स्पष्ट हो गए।


परिवार के साथ घूमता रहा आरोपी, खुद गुमशुदगी दर्ज कराने पहुंचा था थाने

हत्या के बाद शक से बचने के लिए पॉपेन पॉल ने खुद को सामान्य दिखाने की कोशिश की। वह मृतक के परिवार के साथ लगातार संपर्क में रहा और यहां तक कि कैंट थाने में गुमशुदगी दर्ज कराने भी पहुंचा।

हालांकि बाद में मोनू की पत्नी को उस पर शक हुआ और उसने घर आना बंद कर दिया। इसी बिंदु से पुलिस का ध्यान उस पर केंद्रित हो गया।


लोकेशन और कॉल डिटेल से खुला राज

शुरुआती पूछताछ में आरोपी लगातार वारदात से इनकार करता रहा, लेकिन पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच जारी रखी। कॉल डिटेल रिकॉर्ड, लोकेशन ट्रैकिंग और सीसीटीवी फुटेज से जब महत्वपूर्ण सुराग मिले तो आरोपी टूट गया और उसने अपराध स्वीकार कर लिया।

तकनीकी साक्ष्य इस मामले में निर्णायक साबित हुए और जांच को अंतिम दिशा मिली।


सहकर्मियों के बीच तनाव से हत्या तक पहुंचा विवाद

जांच में सामने आया कि कार्यस्थल से जुड़ा तनाव धीरे-धीरे व्यक्तिगत दुश्मनी में बदल गया था। लगातार अपमान और दबाव की भावना ने आरोपियों को हिंसक कदम उठाने की ओर धकेला।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के मामलों में अक्सर छोटी-छोटी घटनाएं समय के साथ गंभीर अपराध का रूप ले लेती हैं।


स्थानीय लोगों में दहशत, पुलिस ने जांच तेज की

घटना के खुलासे के बाद क्षेत्र में चर्चा का माहौल बना हुआ है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि हत्या जैसी घटनाएं सामाजिक सुरक्षा की भावना को प्रभावित करती हैं।

पुलिस का कहना है कि मामले की विवेचना जारी है और अन्य संभावित पहलुओं की भी जांच की जा रही है।


गोलाघाट निवासी मोनू जायसवाल की हत्या का खुलासा होने के बाद यह मामला केवल एक आपराधिक घटना तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि कार्यस्थल से जुड़े विवादों के खतरनाक परिणामों की भी गंभीर चेतावनी बनकर सामने आया है। पुलिस द्वारा आरोपियों की गिरफ्तारी और साक्ष्यों की बरामदगी के बाद अब आगे की न्यायिक प्रक्रिया पर क्षेत्रवासियों की नजर टिकी हुई है।

 

News-Desk

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